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राजस्थान में 23 प्रसूताओं की मौत के बाद बड़ा सर्वे, हर छठी होने वाली मां हाई रिस्क कैटेगरी में मिलीस्वास्थ्य
1 घंटे पहले· 0

राजस्थान में 23 प्रसूताओं की मौत के बाद बड़ा सर्वे, हर छठी होने वाली मां हाई रिस्क कैटेगरी में मिली

राजस्थान में 23 प्रसूताओं की मौत के बाद हुए सर्वे में हर छठी गर्भवती महिला हाई रिस्क कैटेगरी में मिली, 15,504 महिलाओं की अब विशेष निगरानी होगी।

राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की सेहत को लेकर एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। राज्य में अब तक 23 प्रसूताओं की जान जा चुकी है और लगातार हो रही इन मौतों ने आखिरकार सरकार और स्वास्थ्य विभाग को हरकत में ला दिया। विभाग ने प्रदेशभर में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया, जिसके नतीजे बेहद चिंताजनक निकले हैं। अभियान के दौरान करीब 1 लाख 6 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 15 हजार से अधिक महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण मिले। यानी हर छठी होने वाली मां को सामान्य गर्भावस्था से कहीं ज्यादा चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है।

निरीक्षण में क्या-क्या जांचा गया

गर्भवती महिलाओं की असल स्थिति का पता लगाने के लिए राज्य स्तर पर यह विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत प्रदेश के करीब 4 हजार अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच प्रक्रिया पूरी की गई। टीमों ने सिर्फ महिलाओं की जांच तक ही सीमित न रहते हुए उनकी नियमित चेकअप रिपोर्ट, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, अस्पतालों में उपलब्ध इलाज की सुविधाएं और प्रसव के दौरान दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता को भी बारीकी से परखा। इसी जांच के आधार पर सामने आया कि जिन महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है, उनमें समय से पहले प्रसव होने, डिलीवरी के वक्त जटिलताएं आने या मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा होने की आशंका सामान्य महिलाओं के मुकाबले काफी ज्यादा रहती है।

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15 हजार से ज्यादा महिलाओं पर रहेगी विशेष नजर

यह अभियान कुल दो दिन तक चला, जिसमें प्रदेश के 3 हजार 800 से ज्यादा स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा किया गया। अधिकारियों ने सिर्फ कागजी जांच नहीं की, बल्कि सीधे गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उन्हें मिल रही सुविधाओं का हाल भी जाना। साथ ही मां और नवजात बच्चे से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का भी आकलन किया गया। इस पूरी कवायद में कुल 15 हजार 504 गर्भवती महिलाएं ऐसी मिलीं, जिन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग अब इन सभी महिलाओं पर विशेष नजर रखेगा। इन्हें समय-समय पर डॉक्टरों की सलाह, जरूरी जांच और उपचार मुहैया कराया जाएगा, ताकि प्रसव के दौरान कोई गंभीर स्थिति पैदा न हो। अधिकारियों का कहना है कि अगर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान समय रहते हो जाए, तो मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है। इसी सोच के साथ सरकार ने यह बड़ा अभियान शुरू किया था।

86 हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मैदान में उतरे

इतने बड़े पैमाने पर अभियान को कामयाब बनाने के लिए प्रदेशभर में करीब 86 हजार चिकित्साकर्मियों और आशा वर्कर्स की टीमें लगाई गईं। जिला स्तर से लेकर गांव-गांव तक स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इस काम में जुटे रहे। चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम, आशा सहयोगिनियों और बाकी स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की जानकारी इकट्ठा की। इस दौरान गांवों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी बड़ी भूमिका निभाई और दूर-दराज के इलाकों तक स्वास्थ्य विभाग की पहुंच बनाई।

मातृ मृत्यु दर घटाना सरकार का मकसद

राज्य सरकार की पूरी कोशिश गर्भवती महिलाओं में होने वाली जटिलताओं और मातृ मृत्यु दर को कम करना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अगर हाई रिस्क मामलों की पहचान समय पर हो जाए, तो महिलाओं को बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव की सुविधा दी जा सकती है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को नियमित जांच, पौष्टिक खानपान, समय पर दवाएं और डॉक्टरों की लगातार निगरानी की जरूरत होती है। अभियान के जरिए अब ऐसी सभी महिलाओं को चिन्हित कर उनका लगातार फॉलोअप किया जाएगा। राजस्थान में चलाया गया यह पूरा अभियान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की निगरानी और इलाज व्यवस्था को और बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है।

सवाल-जवाब

राजस्थान में अब तक कितनी प्रसूताओं की मौत हो चुकी है?
राज्य में अब तक 23 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद यह विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया।
अभियान में कुल कितनी गर्भवती महिलाओं की जांच की गई?
अभियान के दौरान करीब 1 लाख 6 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांच की गई।
कितनी महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में रखा गया?
15 हजार 504 गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में रखा गया है।
यह निरीक्षण अभियान कितने दिन और कितने संस्थानों में चला?
यह अभियान दो दिन तक चला और इसमें 3 हजार 800 से ज्यादा स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया गया।
अभियान में कितने स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए?
करीब 86 हजार चिकित्साकर्मियों और आशा वर्कर्स की टीमों को इस अभियान में लगाया गया।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को अब क्या सुविधा मिलेगी?
उन्हें समय-समय पर डॉक्टरों की सलाह, जरूरी जांच और उपचार दिया जाएगा ताकि प्रसव के दौरान कोई गंभीर स्थिति न बने।
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