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मानसून में पिल्लों की जान ले रहा है यह खतरनाक वायरस, समय रहते पहचानें ये लक्षणस्वास्थ्य
17 जुल॰ 2026, 6:02 am (45 दिन पहले)· 2

मानसून में पिल्लों की जान ले रहा है यह खतरनाक वायरस, समय रहते पहचानें ये लक्षण

खरगोन जिले में मानसून शुरू होते ही कुत्तों में पार्वो वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं, जो छोटे पिल्लों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पशु चिकित्सक समय पर लक्षण पहचानने और वैक्सीनेशन की सलाह दे रहे हैं।

बारिश का मौसम इंसानों को भले राहत दे, लेकिन पालतू कुत्तों खासकर छोटे पिल्लों के लिए यह सीजन खतरे की घंटी लेकर आता है। खरगोन जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही कुत्तों में पार्वो वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है और पशु चिकित्सक इसे बेहद गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि समय पर पहचान न होने पर यह बीमारी पिल्लों की जान तक ले सकती है।

हर साल बारिश में क्यों बढ़ते हैं मामले

खरगोन के वेटनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. आदित्यराज परमार के मुताबिक, जैसे ही बरसात शुरू होती है, अस्पताल की ओपीडी में पार्वो वायरस से पीड़ित कुत्तों की संख्या हर साल बढ़ने लगती है। इसकी सबसे बड़ी चपेट में डेढ़ से 3 महीने तक की उम्र के छोटे पिल्ले आते हैं, क्योंकि इस उम्र में उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रहती है। डॉ. परमार बताते हैं कि अगर कोई संक्रमित कुत्ता किसी दूसरे कुत्ते के संपर्क में आ जाए तो वायरस बहुत तेजी से फैलता है। इतना ही नहीं, जिन पालतू कुत्तों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है, उन्हें बाहर घुमाने पर भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रास्ते में अगर किसी संक्रमित कुत्ते का मल पड़ा हो और पालतू कुत्ता गलती से उसके संपर्क में आ जाए, तो वहां से भी वायरस शरीर में पहुंच सकता है।

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शुरुआत में हल्के दिखने वाले लक्षण, नजरअंदाज करना भारी

पार्वो वायरस के शुरुआती लक्षण देखने में मामूली लग सकते हैं, इसलिए ज्यादातर मालिक इन्हें गंभीरता से नहीं लेते, जो सबसे बड़ी गलती साबित होती है। सबसे पहला संकेत यह होता है कि संक्रमित पिल्ला अचानक सुस्त पड़ जाता है और खेलना-कूदना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके बाद उसे बार-बार उल्टियां होने लगती हैं और वह जो कुछ भी खाता-पीता है, वह तुरंत बाहर निकल जाता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, तेज दस्त शुरू हो जाते हैं, जिनमें खून भी दिखाई दे सकता है और तेज बदबू आती है। इस दौरान पिल्ला बहुत तेजी से कमजोर होता चला जाता है।

अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं, लक्षणों के आधार पर होती है देखभाल

डॉ. परमार साफ करते हैं कि पार्वो वायरस का अब तक कोई निश्चित इलाज मौजूद नहीं है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं, जिसका मकसद शरीर में पानी की कमी न होने देना और संक्रमण से होने वाले नुकसान को कम से कम करना होता है। अगर बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही इलाज शुरू हो जाए, तो पिल्ले के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर इलाज में देरी हो गई, तो हालत गंभीर हो सकती है। आमतौर पर सही देखभाल मिलने पर करीब 7 दिन में पिल्ले को आराम मिलने की उम्मीद रहती है। अगर इस दौरान भी कोई सुधार नजर न आए, तो यह स्थिति के और गंभीर होने का संकेत माना जाता है।

बचाव के लिए क्या करें

विशेषज्ञों के मुताबिक पार्वो वायरस से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका समय पर वैक्सीन लगवाना है। इसके अलावा नए लाए गए पिल्ले को कुछ दिनों तक घर के दूसरे कुत्तों से अलग रखना चाहिए, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा न रहे। घर और आसपास की जगह को साफ-सुथरा रखना भी जरूरी है, साथ ही पालतू कुत्ते को गंदगी या आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। अगर पालतू कुत्ता अचानक सुस्त दिखने लगे, उल्टी या दस्त शुरू हो जाए या खाना-पीना छोड़ दे, तो बिना देर किए उसे नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाना चाहिए। बारिश के मौसम में बरती गई थोड़ी सी सतर्कता आपके पालतू साथी की जान बचा सकती है।

सवाल-जवाब

पार्वो वायरस किन कुत्तों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है?
डेढ़ से 3 महीने तक की उम्र के छोटे पिल्लों के लिए यह वायरस सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इस उम्र में उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
पार्वो वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
पिल्ला अचानक सुस्त हो जाता है, खेलना बंद कर देता है, बार-बार उल्टी करता है और बाद में खून के साथ तेज बदबूदार दस्त शुरू हो जाते हैं।
क्या पार्वो वायरस का कोई पक्का इलाज है?
नहीं, अभी तक इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है, डॉक्टर लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
पिल्ला कितने दिनों में ठीक हो सकता है?
सही इलाज मिलने पर आमतौर पर करीब 7 दिन में पिल्ले को आराम मिलने की संभावना रहती है।
पार्वो वायरस से बचाव कैसे किया जा सकता है?
समय पर वैक्सीन लगवाकर, नए पिल्ले को कुछ दिन दूसरे कुत्तों से अलग रखकर और साफ-सफाई का ध्यान रखकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
यह वायरस कैसे फैलता है?
संक्रमित कुत्ते के सीधे संपर्क में आने से या उसके मल के संपर्क में आने से यह वायरस दूसरे कुत्तों में फैल सकता है।
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