दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक छोटा सा लिट्टी-चोखा स्टॉल इन दिनों बिहार के असली जायके के लिए मशहूर हो गया है. दफ्तर से लौटते हुए कोई यहां लिट्टी-चोखे के लिए रुक जाता है, तो कोई सिर्फ इसी स्वाद के लिए शहर के दूसरे कोने से यहां तक पहुंचता है. बिना किसी बड़े बैनर या प्रचार के, इस स्टॉल ने केवल अपने स्वाद के दम पर अपनी पहचान बना ली है.
मशीन नहीं, हाथ से बनती है हर लिट्टी
यहां लिट्टी बनाने का तरीका आज भी पूरी तरह पारंपरिक है. आटे के अंदर सत्तू, मसाले और सरसों के तेल की स्टफिंग भरी जाती है, फिर उसे धीमी आंच पर सेंका जाता है ताकि बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बने. सिकते ही गर्मागर्म लिट्टी को देसी घी में डुबोया जाता है. जैसे ही यह तैयार होती है, इसकी खुशबू आसपास से गुजरने वाले लोगों को अपनी तरफ खींच लेती है.
बैंगन-आलू के चोखे के साथ घर जैसा स्वाद
लिट्टी के साथ बैंगन, आलू और टमाटर से तैयार चोखा परोसा जाता है. इसके साथ हरी मिर्च, कटा हुआ प्याज और नींबू भी दिया जाता है. हर निवाला ठीक वैसा ही स्वाद देता है जैसा घर की रसोई में मिलता है. यही वजह है कि एक बार यहां खाने वाला ग्राहक दोबारा लौटे बिना नहीं रहता.
मोदी से लेकर आमिर खान तक चख चुके हैं स्वाद
यह स्टॉल सिर्फ आम राहगीरों का ठिकाना नहीं रहा, बल्कि यहां कई बड़े नाम भी पहुंच चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अभिनेता आमिर खान और सांसद मनोज तिवारी जैसे लोग यहां का लिट्टी-चोखा चख चुके हैं और खुलकर इसके स्वाद की तारीफ कर चुके हैं.
रोजाना 150 प्लेट, हर दिन हजारों की कमाई
स्टॉल चलाने वाले रॉकी ने बताया कि यहां एक प्लेट लिट्टी-चोखा सिर्फ 50 रुपये में मिलती है. इसके बावजूद वह रोजाना करीब 150 प्लेट बेच लेते हैं, जिससे उन्हें आराम से 5000 से 6000 रुपये तक की रोजाना कमाई हो जाती है. 2010 से चल रहा यह स्टॉल पटना स्पेशल लिट्टी-चोखे के नाम से मशहूर है और सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है, यानी दिनभर में करीब 12 घंटे तक ग्राहकों की भीड़ यहां लगी रहती है.



















