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राजस्थान में अब हादसे के घायलों को तुरंत मिलेगा इलाज, सरकार लाई नई ट्रॉमा नीतिस्वास्थ्य
25 जून 2026, 10:05 pm (45 दिन पहले)· 4

राजस्थान में अब हादसे के घायलों को तुरंत मिलेगा इलाज, सरकार लाई नई ट्रॉमा नीति

राजस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश में एक जैसी और व्यवस्थित ट्रॉमा इलाज व्यवस्था के लिए नई ट्रॉमा नीति तैयार की है, जिससे सड़क हादसों में घायल मरीजों को समय पर बेहतर और जीवनरक्षक इलाज मिल सकेगा।

सड़क हादसों और दूसरी गंभीर दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों के लिए राजस्थान सरकार ने एक अहम फैसला किया है। अब घायल मरीज को इलाज के लिए इधर उधर भटकना न पड़े और उसे वक्त रहते बेहतर उपचार मिल सके, इसके लिए सरकार ने पूरे प्रदेश के लिए एक नई ट्रॉमा नीति तैयार की है। इसका मकसद है कि राज्य के हर कोने में एक जैसी और व्यवस्थित ट्रॉमा इलाज व्यवस्था खड़ी की जाए। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित के मुताबिक यह कदम ट्रॉमा मरीजों को बेहतर इलाज और जान बचाने वाली सुविधाएं देने में बड़ा साबित होगा।

मौत और विकलांगता की बड़ी वजह बना ट्रॉमा

डॉ. विकास राजपुरोहित का कहना है कि आज के दौर में ट्रॉमा मौत और गंभीर विकलांगता की एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है। यही वजह है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि एक समय था जब ट्रॉमा के मरीजों के लिए कोई अलग इंतजाम नहीं था, लेकिन धीरे धीरे ट्रॉमा केयर और ट्रॉमा कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं खड़ी की गईं। इसी का नतीजा है कि अब ऐसे मरीजों को पहले से कहीं बेहतर इलाज मिलने लगा है।

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हर ट्रॉमा सेंटर पर एक जैसा इलाज

नई नीति के तहत प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटरों पर इलाज के एक जैसे मानक लागू किए जाएंगे, ताकि कहीं भी इलाज की गुणवत्ता में फर्क न रहे। यह व्यापक नीति यूं ही नहीं बनी। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई, जिसने अलग अलग स्तरों पर गहराई से अध्ययन करने के बाद यह नीति तैयार की। डॉ. राजपुरोहित ने बताया कि इसके लागू होते ही गांव और शहर दोनों जगह के मरीजों को एक समान गुणवत्ता वाला इलाज मिल सकेगा, साथ ही अलग अलग अस्पतालों के बीच आपसी तालमेल भी बेहतर होगा।

एम्बुलेंस सेवा होगी और मजबूत

इस नीति में सबसे ज्यादा ध्यान उस अहम वक्त पर दिया गया है, जो दुर्घटना स्थल से अस्पताल पहुंचने तक का होता है। इसी दौरान मरीज को मिलने वाली सुविधाओं को और पुख्ता किया जाएगा। एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत बनाने, ट्रॉमा सेंटरों को जरूरी उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ से लैस करने और जो ट्रॉमा सेंटर अधूरे पड़े हैं उन्हें पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा अलग अलग विभागों के तालमेल से सड़क हादसों को रोकने और घायलों को फौरन इलाज दिलाने पर खास जोर रहेगा।

सवाल-जवाब

राजस्थान सरकार ने नई ट्रॉमा नीति क्यों बनाई है?
ताकि सड़क हादसों और गंभीर दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके और पूरे प्रदेश में एक जैसी ट्रॉमा इलाज व्यवस्था खड़ी हो सके।
इस नीति से मरीजों को क्या फायदा होगा?
प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटरों पर एक जैसे मानक लागू होंगे, जिससे गांव और शहर दोनों के मरीजों को समान गुणवत्ता का इलाज और जीवनरक्षक सुविधाएं मिलेंगी।
यह नीति किसने तैयार की है?
इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई, जिसने अलग अलग स्तरों पर अध्ययन के बाद यह व्यापक नीति तैयार की।
एम्बुलेंस सेवा को लेकर क्या योजना है?
नीति के तहत एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत किया जाएगा और दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक मरीज को मिलने वाली सुविधाओं को और पुख्ता किया जाएगा।
अधूरे ट्रॉमा सेंटरों का क्या होगा?
जो ट्रॉमा सेंटर अधूरे पड़े हैं उन्हें पूरा कर विकसित किया जाएगा और उन्हें जरूरी उपकरणों व प्रशिक्षित स्टाफ से लैस किया जाएगा।
यह जानकारी किसने दी है?
मथुरादास माथुर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने इस नीति और इसके फायदों के बारे में बताया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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