रात के समय गहरी नींद के बीच अचानक आंख खुल जाना और उसके बाद काफी देर तक दोबारा नींद न आने की स्थिति से कई लोग जूझते हैं। कभी-कभार ऐसा होना आम बात हो सकती है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की आधी रात में रोज या अक्सर ही नींद टूटने लगती है, तो इसके पीछे गलत आदतें या नींद से जुड़ी कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या जिम्मेदार हो सकती है। इस तरह की परेशानी के पीछे मुख्य रूप से मानसिक तनाव, अत्यधिक चाय या कॉफी का सेवन, रात के समय मोबाइल फोन का उपयोग, कमरे का असहज माहौल और स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ अन्य दिक्कतें नींद के चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
अनिद्रा यानी इन्सोमनिया का दायरा केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि रात के वक्त बिल्कुल भी नींद न आए। इसके लक्षणों में सोने में कठिनाई होना, रात के दौरान बार-बार जाग जाना, तय समय से बहुत पहले आंख खुल जाना और एक बार नींद टूटने के बाद दोबारा सोने में असमर्थता महसूस होना भी शामिल है। इस समस्या के परिणामस्वरुप सुबह के वक्त उठने पर भारी थकान बनी रहती है और दिनभर किसी काम में ध्यान केंद्रित करने या रोजमर्रा के कामकाज को निपटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। तनाव और चिंता इस स्थिति के सबसे बड़े और आम कारणों में गिने जाते हैं। इसके अलावा सोने के समय में अनियमिता बरतना, देर शाम के वक्त कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का सेवन करना, रात में स्क्रीन पर वक्त बिताना, शराब पीना और अन्य शारीरिक बीमारियां भी नींद की प्रक्रिया में बड़ी बाधा उत्पन्न करती हैं।
स्लीप एप्निया एक ऐसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार कुछ पलों के लिए रुक जाती है और फिर अपने आप दोबारा शुरू होती है। इस स्थिति के पीछे एक प्रमुख वजह यह होती है कि नींद के दौरान गले की मांसपेशियां अत्यधिक शिथिल पड़ जाती हैं, जिसके कारण श्वास नली संकरी होने लगती है या पूरी तरह बंद हो जाती है। इस अवस्था से जूझ रहे लोगों में तेज खर्राटे आने, सोते वक्त अचानक सांस थमने, घबराकर या हांफते हुए जागने, सुबह उठने पर मुंह सूखा मिलने और पूरे दिन अत्यधिक सुस्ती या थकान महसूस होने जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति को खुद इस बात का अहसास भी नहीं हो पाता है कि रात के दौरान उसकी सांस कई बार बाधित हुई थी।
यदि महीने में एकाध बार रात के वक्त नींद खुल जाती है, तो इसे किसी बड़ी बीमारी का लक्षण मानकर घबराना नहीं चाहिए। इसके पीछे कमरे में तापमान का बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा होना, बाहर से आने वाली तेज आवाज, अत्यधिक रोशनी, आरामदायक बिस्तर का न होना, मानसिक तनाव या देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करना जैसी वजहें भी नींद में खलल डाल सकती हैं। इसके अलावा जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, नींद अपने आप कुछ हल्की होने लगती है। ऐसी अवस्था में आसपास की मामूली आहट या शरीर में उठने वाली किसी हल्की सी असहजता से भी तुरंत आंख खुल जाती है।
रात में नींद टूटने पर क्या कदम उठाएं?
आधी रात में यदि किसी वजह से नींद खुल जाए तो तुरंत अपने मोबाइल फोन को देखने या बार-बार घड़ी पर नजर डालने की आदत से बचना चाहिए। ऐसा करने से दिमाग जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और दोबारा नींद न आने की चिंता और अधिक बढ़ने लगती है। अपने शयनकक्ष को शांत और पूरी तरह अंधेरायुक्त रखें तथा शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर आराम देने का प्रयास करें। यदि काफी समय बीत जाने के बाद भी नींद वापस न आए, तो बिस्तर से उठकर किसी कम रोशनी वाले स्थान पर कोई शांत गतिविधि कर सकते हैं। जैसे ही दोबारा नींद का अहसास होने लगे, तुरंत अपने बिस्तर पर वापस लौट जाएं।
अपने दैनिक जीवन में लगभग एक ही निर्धारित समय पर सोने और सुबह उठने की आदत डालना नींद की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। शाम ढलने के बाद और रात के वक्त चाय या कॉफी का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। सोने से ठीक पहले लंबे वक्त तक मोबाइल स्क्रीन या टेलीविजन देखने की आदत में भी कमी लानी जरूरी है। यदि रात में नींद टूटने की यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है और इसका नकारात्मक असर आपकी दिनभर की ऊर्जा, कार्यक्षमता या फोकस पर साफ तौर पर दिखाई देने लगता है, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे बेहतर विकल्प साबित होता है। विशेष रूप से यदि तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने की शिकायत हो, सोते समय घुटन महसूस होती हो या दिन के वक्त अत्यधिक नींद आती हो, तो स्लीप एप्निया की जांच करवाना बेहद आवश्यक हो जाता है।


















