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रोज एंटासिड खा रहे हैं तो सावधान, हड्डियां और फेफड़े हो सकते हैं कमजोरस्वास्थ्य
3 घंटे पहले· 1

रोज एंटासिड खा रहे हैं तो सावधान, हड्डियां और फेफड़े हो सकते हैं कमजोर

गैस या एसिडिटी होते ही बिना सोचे दवा खा लेने की आदत लंबे समय में हड्डियों, फेफड़ों और पेट पर भारी पड़ सकती है, फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर ने बताए इसके खतरे.

पूजा भट्टपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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गैस, जलन या एसिडिटी होते ही फरीदाबाद में कई लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खरीद लेते हैं. कुछ लोग तो एंटासिड की गोलियां या सिरप हमेशा अपने बैग या घर में रखते हैं और हल्की-सी तकलीफ होते ही उन्हें निगल लेते हैं. डॉक्टरों की मानें तो यही लापरवाही आगे चलकर शरीर पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि गैस-एसिडिटी की दवाएं तभी फायदा करती हैं जब इन्हें सही मात्रा और सीमित समय के लिए लिया जाए.

सही तरीके से लें तो फायदा, वरना नुकसान

फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. मनोज यादव के मुताबिक, गैस और एसिडिटी की दवाइयां अगर सही समय पर, सही मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से ली जाएं तो शरीर को राहत मिलती है. लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से महीनों या सालों तक इन दवाओं का सेवन करता रहता है. डॉ. यादव बताते हैं कि ऐसे लोगों के फेफड़ों में बार-बार निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है.

हड्डियां कमजोर, इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ता है

लंबे समय तक एंटासिड लेने वालों के शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी होने लगती है, जिसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है और वे कमजोर होने लगती हैं. इतना ही नहीं, पेट में संक्रमण, टाइफाइड और दूसरे बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन की आशंका भी बढ़ जाती है. डॉ. यादव के अनुसार यही वे दुष्प्रभाव हैं जो लोगों को शुरुआत में नजर नहीं आते, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करते जाते हैं.

दवा को सामान्य समझने की भूल

डॉ. मनोज यादव के मुताबिक सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोग गैस और एसिडिटी की दवा को एक आम, हानिरहित दवा मानकर बिना डॉक्टर को दिखाए लगातार खाते रहते हैं. उनका कहना है कि अगर किसी को बार-बार गैस या एसिडिटी की शिकायत हो रही है तो सिर्फ दवा खाकर तकलीफ छिपाने के बजाय पहले उसकी असली वजह पता की जानी चाहिए. सही जांच और सही इलाज से बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सकता है, जिससे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकता है.

युवाओं से ज्यादा खतरे में बुजुर्ग

डॉ. यादव यह भी बताते हैं कि इन दवाओं का असर हर उम्र के व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. युवाओं की हड्डियां अपेक्षाकृत मजबूत होती हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है, इसलिए शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादा तकलीफ महसूस नहीं होती. लेकिन बुजुर्गों में इन दवाओं के दुष्प्रभाव कहीं जल्दी सामने आ सकते हैं. यही वजह है कि खासतौर पर उम्रदराज़ लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से गैस या एसिडिटी की दवा खरीदकर खाने से बचना चाहिए.

बिगड़ती जीवनशैली और खानपान भी बड़ी वजह

डॉ. यादव के मुताबिक आज की भागदौड़ भरी और बदलती जीवनशैली भी गैस-एसिडिटी की समस्या को बढ़ावा दे रही है. लोगों की शारीरिक गतिविधियां लगातार घट रही हैं, जबकि तला-भुना, तीखा और फास्ट फूड खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यही खानपान पेट की समस्याओं की जड़ बनता जा रहा है. डॉ. यादव सलाह देते हैं कि रोजमर्रा के खाने में फल, हरी सब्जियां और घर का सादा भोजन शामिल किया जाना चाहिए. फास्ट फूड और ज्यादा मसालेदार खाने से दूरी बनाकर रखने से गैस और एसिडिटी की परेशानी काफी हद तक कम की जा सकती है.

बच्चे भी घर से ही सीखते हैं खानपान की आदतें

डॉ. मनोज यादव के मुताबिक बच्चों की खानपान की आदतें भी घर के माहौल से ही बनती हैं. अगर घर के बड़े रोजाना फास्ट फूड खाएंगे, तो बच्चे भी वही आदत अपनाएंगे. इसलिए परिवार के सभी सदस्यों को खुद स्वस्थ खानपान अपनाना चाहिए, ताकि बच्चे भी उसी राह पर चलें. डॉ. यादव का साफ कहना है कि अगर गैस या एसिडिटी की शिकायत बार-बार हो रही हो, तो बार-बार दवा खाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका है.

इसका आप पर असर

  • भारत में: जो लोग बार-बार गैस या एसिडिटी की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के खाते हैं, उन्हें हड्डियों के कमजोर होने, फेफड़ों में बार-बार निमोनिया और पेट के इंफेक्शन का खतरा हो सकता है, खासकर बुजुर्गों के लिए यह जोखिम ज्यादा है.
  • फरीदाबाद में: सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर की सलाह के मुताबिक स्थानीय लोगों को मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदने के बजाय बार-बार होने वाली गैस-एसिडिटी की शिकायत पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

सवाल-जवाब

गैस या एसिडिटी की दवा रोज खाने से क्या हो सकता है?
लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं के सेवन से फेफड़ों में बार-बार निमोनिया, हड्डियों का कमजोर होना और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है.
यह सलाह किसने दी है?
फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. मनोज यादव ने यह जानकारी दी है.
क्या गैस-एसिडिटी की दवा का असर सभी उम्र के लोगों पर एक जैसा होता है?
नहीं, युवाओं की हड्डियां और रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने से उन्हें शुरुआत में ज्यादा तकलीफ नहीं होती, जबकि बुजुर्गों में साइड इफेक्ट जल्दी दिख सकते हैं.
गैस और एसिडिटी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
फास्ट फूड और मसालेदार खाने से दूरी बनाकर फल, हरी सब्जियां और घर का सादा खाना खाना चाहिए, और बार-बार तकलीफ होने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
इन दवाओं से हड्डियों पर क्या असर पड़ता है?
लंबे समय तक सेवन से शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं.
क्या बच्चों की खानपान की आदतों का इससे कोई संबंध है?
हां, डॉ. यादव के मुताबिक बच्चे घर के बड़ों को देखकर ही खानपान की आदतें सीखते हैं, इसलिए परिवार का स्वस्थ खानपान जरूरी है.
पूजा भट्ट
लेखक के बारे मेंपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताहेल्थ समाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा रिपोर्टिंग, वेलनेस, फ़िटनेस, पोषण, स्वास्थ्य नीति, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो चिकित्सा ख़बरों, वेलनेस, स्वास्थ्य नीति, फ़िटनेस और सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट को कवर करती हैं। वे अहम स्वास्थ्य घटनाक्रमों और उभरते चिकित्सा रुझानों पर रिपोर्ट करती हैं।

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो हेल्थकेयर पत्रकारिता — चिकित्सा ख़बरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट, वेलनेस रुझानों, अस्पताल व स्वास्थ्य तंत्र की रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य नीति — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे ब्रेकिंग हेल्थ स्टोरी, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, फ़िटनेस, पोषण और हेल्थकेयर तकनीक की प्रगति कवर करती हैं। सटीकता और स्पष्टता पर मज़बूत ज़ोर के साथ पूजा ऐसी जानकारीपूर्ण रिपोर्टिंग देती हैं जो पाठकों को जटिल चिकित्सा विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करती है। उनकी कवरेज में सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल, हेल्थकेयर तक पहुँच, निवारक देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा में उभरते नवाचार शामिल हैं।

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