गैस, जलन या एसिडिटी होते ही फरीदाबाद में कई लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खरीद लेते हैं. कुछ लोग तो एंटासिड की गोलियां या सिरप हमेशा अपने बैग या घर में रखते हैं और हल्की-सी तकलीफ होते ही उन्हें निगल लेते हैं. डॉक्टरों की मानें तो यही लापरवाही आगे चलकर शरीर पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि गैस-एसिडिटी की दवाएं तभी फायदा करती हैं जब इन्हें सही मात्रा और सीमित समय के लिए लिया जाए.
सही तरीके से लें तो फायदा, वरना नुकसान
फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. मनोज यादव के मुताबिक, गैस और एसिडिटी की दवाइयां अगर सही समय पर, सही मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से ली जाएं तो शरीर को राहत मिलती है. लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से महीनों या सालों तक इन दवाओं का सेवन करता रहता है. डॉ. यादव बताते हैं कि ऐसे लोगों के फेफड़ों में बार-बार निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है.
हड्डियां कमजोर, इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ता है
लंबे समय तक एंटासिड लेने वालों के शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी होने लगती है, जिसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है और वे कमजोर होने लगती हैं. इतना ही नहीं, पेट में संक्रमण, टाइफाइड और दूसरे बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन की आशंका भी बढ़ जाती है. डॉ. यादव के अनुसार यही वे दुष्प्रभाव हैं जो लोगों को शुरुआत में नजर नहीं आते, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करते जाते हैं.
दवा को सामान्य समझने की भूल
डॉ. मनोज यादव के मुताबिक सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोग गैस और एसिडिटी की दवा को एक आम, हानिरहित दवा मानकर बिना डॉक्टर को दिखाए लगातार खाते रहते हैं. उनका कहना है कि अगर किसी को बार-बार गैस या एसिडिटी की शिकायत हो रही है तो सिर्फ दवा खाकर तकलीफ छिपाने के बजाय पहले उसकी असली वजह पता की जानी चाहिए. सही जांच और सही इलाज से बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सकता है, जिससे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकता है.
युवाओं से ज्यादा खतरे में बुजुर्ग
डॉ. यादव यह भी बताते हैं कि इन दवाओं का असर हर उम्र के व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. युवाओं की हड्डियां अपेक्षाकृत मजबूत होती हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है, इसलिए शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादा तकलीफ महसूस नहीं होती. लेकिन बुजुर्गों में इन दवाओं के दुष्प्रभाव कहीं जल्दी सामने आ सकते हैं. यही वजह है कि खासतौर पर उम्रदराज़ लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से गैस या एसिडिटी की दवा खरीदकर खाने से बचना चाहिए.
बिगड़ती जीवनशैली और खानपान भी बड़ी वजह
डॉ. यादव के मुताबिक आज की भागदौड़ भरी और बदलती जीवनशैली भी गैस-एसिडिटी की समस्या को बढ़ावा दे रही है. लोगों की शारीरिक गतिविधियां लगातार घट रही हैं, जबकि तला-भुना, तीखा और फास्ट फूड खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यही खानपान पेट की समस्याओं की जड़ बनता जा रहा है. डॉ. यादव सलाह देते हैं कि रोजमर्रा के खाने में फल, हरी सब्जियां और घर का सादा भोजन शामिल किया जाना चाहिए. फास्ट फूड और ज्यादा मसालेदार खाने से दूरी बनाकर रखने से गैस और एसिडिटी की परेशानी काफी हद तक कम की जा सकती है.
बच्चे भी घर से ही सीखते हैं खानपान की आदतें
डॉ. मनोज यादव के मुताबिक बच्चों की खानपान की आदतें भी घर के माहौल से ही बनती हैं. अगर घर के बड़े रोजाना फास्ट फूड खाएंगे, तो बच्चे भी वही आदत अपनाएंगे. इसलिए परिवार के सभी सदस्यों को खुद स्वस्थ खानपान अपनाना चाहिए, ताकि बच्चे भी उसी राह पर चलें. डॉ. यादव का साफ कहना है कि अगर गैस या एसिडिटी की शिकायत बार-बार हो रही हो, तो बार-बार दवा खाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका है.













