सेहतमंद और छरहरा दिखने की चाह में अधिकांश लोग अपनी डाइट पर कड़ा नियंत्रण रखते हैं और जिम में पसीना बहाते हैं, लेकिन रात के विश्राम को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। देर रात तक फोन की स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग और कामकाजी भागदौड़ ने नींद की अवधि घटा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का निरंतर कहना रहा है कि जिस तरह संतुलित खानपान और नियमित कसरत शारीरिक संतुलन के लिए जरूरी हैं, उसी तरह पर्याप्त और गहरी नींद भी शरीर की अनिवार्य जैविक जरूरत है।
घरों में स्वाभाविक माहौल के बीच परखा गया नींद का प्रभाव
अमेरिका स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि जब कोई व्यक्ति हर रोज तय अवधि से 80 से 90 मिनट कम सोता है, तो उसके शरीर के भार पर क्या बदलाव आते हैं। इस जांच की सबसे अहम खूबी यह रही कि यह किसी कृत्रिम प्रयोगशाला के कमरे में नहीं, बल्कि प्रतिभागियों के अपने-अपने घरों में पूरी की गई। अपने घरेलू परिवेश में रहने के कारण प्रतिभागियों की स्वाभाविक दिनचर्या, सोने-जागने के ढंग और जीवनशैली से जुड़े बदलावों को बेहद स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा सका। नतीजों से साफ संकेत मिला कि मामूली स्तर पर भी नींद में की गई कटौती समय बीतने के साथ वजन में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण बन जाती है।
छह-छह हफ्तों के दो चरणों में किया गया परीक्षण
इस पूरी पड़ताल में 20 वर्ष से अधिक उम्र वाले 95 वयस्कों को प्रतिभागी बनाया गया। प्रयोग को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया, जिनमें से प्रत्येक चरण छह सप्ताह तक चला। एक हिस्से में सभी प्रतिभागियों को अपनी सामान्य दिनचर्या का पालन करते हुए रोज रात को 7 से 9 घंटे की भरपूर नींद लेने की अनुमति दी गई। वहीं, दूसरे छह हफ्तों के दौर में उन्हें रोज लगभग 90 मिनट देरी से सोने के लिए कहा गया, ताकि उनकी नींद की अवधि घट सके।
पूरे अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की नियमित शारीरिक सक्रियता, वजन, कमर के घेरे की माप और शरीर के अन्य बुनियादी स्वास्थ्य मानकों पर निरंतर नजर बनाए रखी। आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया कि कम नींद वाले चरण में प्रतिभागियों ने सामान्य दिनों की तुलना में औसतन लगभग 80 मिनट कम नींद ली। इसका सीधा असर यह हुआ कि इस अवधि में उनका वजन औसतन लगभग 450 ग्राम तक बढ़ गया। इसके अलावा, नींद घटने पर लोगों की दिनभर की शारीरिक सक्रियता भी कम पाई गई और वे पहले के मुकाबले अधिक निष्क्रिय और सुस्त रहे।
शरीर में सूजन और कई गंभीर बीमारियों का खतरा
लगातार नींद की कमी झेलने पर मानव शरीर के भीतर आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है। स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, यही दीर्घकालिक सूजन आगे चलकर मोटापे की जमीन तैयार करती है और हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज व डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका को काफी तेज कर देती है। यही वजह है कि शरीर के वजन को संतुलित और नियंत्रित रखने के लिए केवल कैलोरी गिनना या दौड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि रात में पूरी नींद लेना भी समान रूप से अनिवार्य माना गया है।
नींद की गुणवत्ता सुधारने और फिट रहने के जरूरी उपाय
शरीर को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर पौष्टिक भोजन ग्रहण करें, नियमित रूप से व्यायाम करें और मानसिक तनाव का सही प्रबंधन करें। अपनी नींद को गहरा और बेहतर बनाने के लिए रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का स्क्रीन टाइम घटाएं। रोज एक ही निश्चित समय पर बिस्तर पर जाने की आदत डालें और अपने शयनकक्ष को ठंडा, शांत व आरामदायक रखें। इसके साथ ही, यदि पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर बेवजह थकान और भारीपन महसूस होता रहता है, तो स्लीप एपनिया जैसी नींद से जुड़ी संभावित समस्याओं की समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।



















