रक्त में शर्करा का स्तर अनियंत्रित होने पर खान-पान का उचित चयन करना किसी भी डायबिटीज मरीज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. भोजन में जरा सी भी चूक ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा सकती है, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परेशानियां पैदा हो सकती हैं. ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि केवल भोजन की मात्रा घटाना ही काफी नहीं होता, बल्कि दैनिक आहार में हरी सब्जियों, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का सही अनुपात तय करना भी उतना ही जरूरी है. जौनपुर में नईगंज स्थित वेदांता हॉस्पिटल के एमडी फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. अखिलेश कुमार सैनी ने रोजमर्रा के जीवन में आसानी से अपनाई जा सकने वाली डाइट योजना साझा की है.
भोजन में कम स्टार्च वाली हरी सब्जियों को दें प्राथमिकता
डॉ. अखिलेश कुमार सैनी के अनुसार डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को सबसे पहला सुधार अपने दैनिक खान-पान की गुणवत्ता में करना चाहिए. आहार में ऐसी सब्जियों को प्रमुखता देनी चाहिए जिनमें स्टार्च की मात्रा काफी कम होती है और फाइबर भरपूर रहता है. लोग आमतौर पर सिर्फ करेले को ही शुगर के लिए गुणकारी मानते हैं, लेकिन इसके अलावा भी कई हरी सब्जियां ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सहायक हैं. दैनिक भोजन में लौकी, नेनुआ, तोरी, करेला और भिंडी जैसी ताजी सब्जियों को नियमित तौर पर शामिल किया जा सकता है. ये सब्जियां पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती हैं और ग्लूकोज के स्तर को अचानक नहीं बढ़ने देतीं.
थाली का संतुलन: आधा हिस्सा सब्जियों और सलाद के लिए रखें
डायबिटीज प्रबंधन के लिए थाली को विशेष अनुपातों में बांटने का सुझाव दिया गया है. डॉ. सैनी का कहना है कि मरीज की भोजन की थाली का लगभग आधा हिस्सा हरी सब्जियों और ताजे सलाद से भरा रहना चाहिए. सलाद के रूप में खीरा, टमाटर, मूली और गाजर जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है. यह फाइबर से भरपूर हिस्सा पेट को भरा रखता है और शुगर के अवशोषण की गति को धीमा करता है.
प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का सही अनुपात
थाली के बाकी आधे हिस्से को दो बराबर भागों में बांटा जाना चाहिए. इसमें से लगभग एक-चौथाई हिस्सा प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के लिए निर्धारित करना चाहिए. प्रोटीन के लिए दाल, पनीर, टोफू, चिकन या फिश जैसे विकल्पों को आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है. दालों में चना दाल, मूंग दाल और अरहर दाल भोजन में शामिल की जा सकती हैं, जबकि राजमा का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है.
थाली का शेष एक-चौथाई हिस्सा कार्बोहाइड्रेट के लिए होना चाहिए. इसके लिए मल्टीग्रेन आटे से तैयार रोटी और नियंत्रित मात्रा में चावल का सेवन किया जा सकता है. कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह छोड़ने के बजाय इसकी संतुलित मात्रा लेना शरीर की ऊर्जा के लिए जरूरी है.
फलों का सेवन कैसे करें और जूस से क्यों बचें
डायबिटीज होने का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि मरीज को फलों से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए. यदि ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में है, तो सीमित मात्रा में ताजे फल खाए जा सकते हैं. ऐसे में सेब, अमरूद, संतरा अथवा छोटा केला आहार में लिया जा सकता है. हालांकि, फलों की मात्रा को लेकर सतर्क रहना अनिवार्य है. इसके अलावा, फलों का जूस पीने के स्थान पर हमेशा साबुत फल खाने को ही बेहतर माना गया है. जूस निकालने की प्रक्रिया में प्राकृतिक फाइबर नष्ट हो जाता है, जिससे फलों में मौजूद शर्करा सीधे और बहुत तेजी से रक्तप्रवाह में पहुंच जाती है. इसी वजह से मरीजों को पैक्ड या ताजे फलों के जूस से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है.
सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद और नियमित जांच
डॉ. सैनी ने स्पष्ट किया है कि मरीज अपनी दैनिक डाइट में दूध, दही, चना, बादाम और अखरोट जैसी पौष्टिक चीजों को भी उचित मात्रा में शामिल कर सकते हैं. डायबिटीज पर काबू पाने के लिए केवल किसी एक खास सब्जी या नुस्खे पर आश्रित रहने के बजाय पूरे आहार तंत्र और जीवनशैली की आदतों को संतुलित करना आवश्यक होता है. भोजन की मात्रा पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करते रहना चाहिए. हर व्यक्ति के शरीर की जरूरतें और शारीरिक स्थिति भिन्न होती हैं, इसलिए दवाओं की खुराक या भोजन की आदतों में कोई भी फेरबदल करने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए.



















