रातभर भरपूर और आरामदायक नींद लेने के बाद भी कई लोगों को सुबह जागते ही गर्दन में गंभीर दर्द, भारीपन या अकड़न की शिकायत रहती है। अक्सर लोग इसे केवल सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल में इस समस्या की सीधी जड़ उनके सिर के नीचे रखा तकिया हो सकती है। लोग अपनी निजी पसंद के अनुसार जरूरत से ज्यादा मोटा, बहुत ऊंचा या फिर अत्यधिक पतला तकिया चुन लेते हैं। गलत बनावट या गलत ऊंचाई वाला तकिया सोते समय गर्दन के कुदरती झुकाव को पूरी तरह बिगाड़ देता है, जिससे रातभर गर्दन की मांसपेशियों और नसों पर लगातार खिंचाव बना रहता है। जब यह स्थिति हर रात दोहराई जाती है, तो गर्दन का यह खिंचाव स्थाई दर्द और परेशानी में तब्दील हो जाता है।
रीढ़ की प्राकृतिक बनावट और सही तकिए का महत्व
सोते समय रीढ़ और गर्दन की हड्डियों का उचित तालमेल बना रहना शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। फरीदाबाद स्थित सर्वोदय अस्पताल के हड्डी एवं रीढ़ की सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. आशीष तोमर के अनुसार, सोते वक्त तकिए की ऊंचाई इस प्रकार संतुलित होनी चाहिए जिससे गर्दन का प्राकृतिक एलाइनमेंट कभी न बिगड़े। मानव शरीर में गर्दन के स्वाभाविक घुमावदार आकार को चिकित्सकीय भाषा में सर्वाइकल लॉर्डोसिस कहा जाता है। इस प्राकृतिक घुमाव को सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर हल्का और पतला तकिया प्रयोग करने का परामर्श दिया जाता है। सही मोटाई वाला पतला तकिया रखने से गर्दन का यह स्वाभाविक घुमाव बना रहता है, जिससे सिर न तो आगे की ओर जरूरत से ज्यादा झुकता है और न ही बिल्कुल सीधा या पीछे की तरफ खिंचता है।
मोटे और ऊंचे तकिए से होने वाला सर्वाइकल फ्लेक्शन
अत्यधिक मोटे या ऊंचे तकिए पर सिर रखकर सोने से शरीर के आंतरिक संतुलन पर सीधा असर पड़ता है। जब तकिया बहुत ऊंचा या मोटा होता है, तब पूरी रात सिर उठा रहता है और गर्दन आगे की दिशा में झुकी रहती है। इस शारीरिक अवस्था को मेडिकल शब्दावली में सर्वाइकल फ्लेक्शन का नाम दिया जाता है। जब कोई व्यक्ति घंटों तक इसी स्थिति में सोता है, तो गर्दन की सहायक मांसपेशियों पर निरंतर खिंचाव और तनाव पड़ता रहता है। मांसपेशियों पर पड़ने वाले इस अनवरत दबाव के कारण रातभर में तंतुओं में सूजन और दर्द उभर आता है, जिसके चलते सुबह सोकर उठते ही व्यक्ति को गर्दन हिलाने में तेज तकलीफ और जकड़न का सामना करना पड़ता है।
लिगामेंट्स और डिस्क पर लगातार खिंचाव का खतरा
न केवल अत्यधिक ऊंचा बल्कि बहुत ज्यादा पतला तकिया भी रोजाना इस्तेमाल करने पर गर्दन के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। हर दिन गलत ऊंचाई वाले तकिए पर सोने से गर्दन की मांसपेशियों के साथ-साथ वहां मौजूद नाजुक लिगामेंट्स और रीढ़ की हड्डियों के बीच स्थित डिस्क पर भी गहरा खिंचाव पड़ता है। इस लगातार बने रहने वाले खिंचाव से गर्दन में पुराना दर्द घर कर सकता है और मरीज को हर सुबह सोकर उठने पर तेज अकड़न महसूस होती है। यही वजह है कि सोते समय गर्दन को संतुलित और कुदरती स्थिति में रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
हर गर्दन दर्द को सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस समझना गलत
आमतौर पर गर्दन में होने वाले किसी भी दर्द को लोग तुरंत सर्वाइकल की गंभीर बीमारी मान बैठते हैं, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। डॉ. आशीष तोमर स्पष्ट करते हैं कि आम लोग जिसे आम बोलचाल में सर्वाइकल कहते हैं, वह अधिकांश मामलों में केवल मांसपेशियों की थकान, तनाव और खिंचाव से जुड़ा साधारण दर्द होता है। गलत तकिए के लगातार इस्तेमाल से मांसपेशियों में पैदा हुआ खिंचाव ठीक उसी तरह का दर्द उत्पन्न करता है, जिसे लोग सर्वाइकल समझ लेते हैं। ऐसी मांसपेशियों की समस्याओं से राहत पाने के लिए डॉक्टरों द्वारा नियमित शारीरिक व्यायाम और स्ट्रेचिंग की सलाह दी जाती है।
गंभीर और असहनीय दर्द में चिकित्सीय जांच की जरूरत
यदि सुबह उठने पर महसूस होने वाली गर्दन की जकड़न सामान्य स्तर की है, तो तकिया बदलकर या हल्की स्ट्रेचिंग से राहत मिल सकती है। इसके विपरीत, अगर दर्द असहनीय हो जाए या लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। चिकित्सीय परीक्षण के जरिए डॉक्टर यह स्पष्ट कर पाते हैं कि समस्या केवल मांसपेशियों के खिंचाव तक सीमित है या इसके पीछे रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर अंदरूनी खराबी है। रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार का संक्रमण अथवा किसी ट्यूमर का फैलाव भी असहनीय गर्दन दर्द का प्रमुख कारण हो सकता है। इसलिए गंभीर लक्षणों की अनदेखी किए बिना समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद आवश्यक है।
नियमित कसरत से मांसपेशियों की सक्रियता और बचाव
गर्दन की जकड़न और दर्द की समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए नियमित व्यायाम सबसे कारगर उपाय है। विशेषज्ञ के अनुसार, अपनी दिनचर्या में तीन से चार प्रकार के आसान व्यायाम शामिल करके मांसपेशियों को मजबूत रखा जा सकता है। इनमें अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर किया जाने वाला व्यायाम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज की आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश काम आगे झुककर या हाथों को नीचे रखकर किए जाते हैं, जिससे हाथों को ऊपर उठाने की जरूरत न के बराबर पड़ती है।
हाथ ऊपर उठाने वाले व्यायाम के लाभ
हाथों को ऊपर उठाकर स्ट्रेच करने से उन विशेष मांसपेशियों में खिंचाव और हलचल होती है, जो पूरे दिन के सामान्य कामकाज के दौरान निष्क्रिय पड़ी रहती हैं। चूंकि दिनभर की सामान्य गतिविधियों में इन पेशियों की सक्रियता न्यूनतम रहती है, इसलिए सुबह के समय समर्पित व्यायाम के जरिए इन निष्क्रिय मांसपेशियों को फिर से सक्रिय किया जा सकता है। प्रतिदिन सुबह थोड़ी देर गर्दन और हाथों का यह व्यायाम करने से गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और खिंचाव के जोखिम से दीर्घकालिक सुरक्षा प्राप्त होती है।
















