दक्षिण भारतीय सिनेमा की जानी-माने अभिनेत्री समांथा रुथ प्रभु इन दिनों अपनी गर्भावस्था के सफर को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने साझा किया कि इस अवधि के दौरान उनका वजन लगभग ग्यारह किलोग्राम तक बढ़ चुका है। अभिनेत्री का यह स्पष्ट कहना है कि इस समय उनका मुख्य उद्देश्य वजन को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि अपनी और अपने होने वाले शिशु की सेहत को प्राथमिकता देना है।
गर्भावस्था में वजन बढ़ने के मुख्य कारण
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनके कारण वजन का बढ़ना एक बेहद आम बात है। नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश गर्भवती महिलाओं का वजन पूरी गर्भावस्था के दौरान दस से साढ़े बारह किलोग्राम तक बढ़ सकता है। आमतौर पर इस बढ़े हुए वजन का एक बड़ा हिस्सा गर्भावस्था के बीसवें सप्ताह के बाद देखने को मिलता है। यह अतिरिक्त वजन केवल गर्भस्थ शिशु का नहीं होता, बल्कि इसके पीछे शरीर के भीतर हो रहे कई अन्य जैविक परिवर्तन भी जिम्मेदार होते हैं।
शारीरिक बदलाव और वजन का गणित
जब एक शिशु का जन्म होता है, तो अकेले उसका वजन लगभग तीन से साढ़े तीन किलोग्राम तक हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में बढ़ा हुआ कुल वजन कई अन्य घटकों को मिलाकर बनता है। इसमें स्तनों के आकार में वृद्धि होना, गर्भाशय का विस्तार होना, प्लेसेंटा का विकास होना, एमनियोटिक द्रव की मात्रा बढ़ना, शरीर में रक्त और अन्य तरल पदार्थों का स्तर बढ़ना तथा भविष्य में स्तनपान कराने के लिए शरीर द्वारा प्राकृतिक रूप से वसा यानी फैट का संचय करना शामिल है।
पहले ट्राइमेस्टर में कितना वजन बढ़ता है?
मेयो क्लीनिक के आंकड़ों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तेरह सप्ताह यानी पहले ट्राइमेस्टर के दौरान बहुत अधिक वजन बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। इस समयावधि में लगभग आधा किलो से लेकर पौने दो किलोग्राम तक वजन बढ़ना पूरी तरह से सामान्य माना जाता है। यदि किसी महिला को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अत्यधिक उल्टी आने की समस्या या मॉर्निंग सिकनेस का सामना करना पड़ता है, तो इस स्थिति में वजन में वृद्धि और भी कम हो सकती है, जो कि चिंता का विषय नहीं है।
दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर की जरूरतें
गर्भावस्था के चौदहवें सप्ताह से लेकर प्रसव तक का समय शिशु के तीव्र विकास का चरण होता है। इस अवस्था के दौरान सामान्य वजन वाली महिलाओं को आमतौर पर हर सप्ताह लगभग आधा किलोग्राम वजन बढ़ाने की सलाह दी जाती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दैनिक आहार में लगभग तीन सौ अतिरिक्त कैलोरी का सेवन पर्याप्त माना जाता है। यह अतिरिक्त ऊर्जा ताजे फल, दूध, साबुत अनाज, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक वसायुक्त खाद्य पदार्थों से आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
क्या ग्यारह किलो वजन बढ़ना सामान्य है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान कुल वजन में वृद्धि दस से साढ़े बारह किलोग्राम के दायरे में होती है, तो इसे चिकित्सा की दृष्टि से पूरी तरह सामान्य माना जाता है। हालांकि, प्रत्येक महिला की शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य की स्थिति अलग-अलग होती है। इसलिए गर्भकाल के दौरान वजन में होने वाले बदलावों को लेकर किसी भी प्रकार की शंका या चिंता होने की स्थिति में अपने चिकित्सक से परामर्श करना ही सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प होता है।


















