यूरोपीय यूनियन में शामिल होने पर आइसलैंड ने जनमत संग्रह में किया इनकारघर में कम जगह है तो गमलों से सजाएं आशियाना, हरियाली बढ़ाने के आसान तरीकेप्रतापगढ़ में तलवार से बर्थडे केक काटना और सड़क पर स्टंट करना पड़ा भारी, दो युवक गिरफ्तारघर पर ऐसे करें पेडीक्योर, पार्लर जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत और चमक उठेंगे पैरअलमारी में कपड़े रखने की नहीं होगी टेंशन, ₹1,000 से कम के ये 5 शानदार स्टोरेज प्रोडक्ट्स बचाएंगे जगहअसम का सीडब्ल्यूआरसी पूरा कर रहा है वन्यजीव संरक्षण के पच्चीस साल, दस हजार से अधिक जीवों को बचायाइंदौर में पुलिस ने पकड़ी 29 लाख की कोकीन, नाइजीरियाई महिला गिरफ्तारउत्तराखंड के इस सुदूर इलाके में दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार सड़क पहुंचने की जगी आसतमिलनाडु के दंपती ने साड़ी को बनाया लाइफलाइन, नेपाल में बचाई 21 श्रद्धालुओं की जानतानों को दरकिनार कर रमेश मंडल ने मिथिला पेंटिंग से बनाई खास पहचान, विदेशों तक फैली कला
पंजाबी इन्फ्लुएंसर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सात सप्ताह की गर्भवती होने की पुष्टिअपराध
30 अग॰ 2026, 4:05 pm (55 मिनट पहले)· 2

पंजाबी इन्फ्लुएंसर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सात सप्ताह की गर्भवती होने की पुष्टि

चंडीगढ़ की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चौंकाने वाला सच सामने आया है। मोरिंडा के जंगल में जिंदा जलाई गईं मंजीत मौत के वक्त सात हफ्ते की गर्भवती थीं, जबकि पुलिस जांच और लापरवाही के आरोपों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सोशल मीडिया जगत में अपनी पहचान बनाने वाली चंडीगढ़ की रहने वाली 28 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर मंजीत कौर की दर्दनाक मौत के मामले में रोज नए और गंभीर खुलासे हो रहे हैं। मोरिंडा के एक सुनसान जंगल में अगवा कर पेड़ से बांधने के बाद आग के हवाले की गई इस महिला इन्फ्लुएंसर ने कई हफ्तों तक अस्पताल में मौत से जंग लड़ने के बाद 26 अगस्त को पीजीआईएमईआर में दम तोड़ दिया था। इस सनसनीखेज वारदात की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है, जिसमें पुष्टि हुई है कि दुनिया छोड़ने से पहले वह लगभग सात सप्ताह के गर्भ से थीं। इस खुलासे के बाद पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए पुलिस की तफ्तीश तेज कर दी गई है और हत्या की विभिन्न कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा है।

घटना की शुरुआत और अपहरण का खौफनाक मंजर

पीड़िता की माता कांता देवी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह पूरी घटना 3 और 4 जुलाई की दरमियानी रात की है जब उनकी बेटी को योजनाबद्ध तरीके से चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में बुलाया गया था। परिवार का आरोप है कि वहां पहले से मौजूद शुबी और पिंडा नामक परिचितों ने उनके साथ मारपीट की और फिर बलपूर्वक एक वाहन में खींचकर बैठा लिया। इसके बाद हमलावर उसे मोरिंडा के पास स्थित एक निर्जन और जंगली इलाके में ले गए, जहां उसे एक पेड़ के साथ कसकर बांध दिया गया। आरोपियों ने वहां उसे कथित तौर पर जिंदा जला दिया और मौके से फरार हो गए, जिससे उसकी देह गंभीर रूप से झुलस गई। कुछ समय बाद वहां से गुजरने वाले एक अन्य परिचित ने पहुंचकर आग पर काबू पाया और कंबल की सहायता से लपटों को बुझाया, जिसके बाद उसे तुरंत उपचार के लिए मोरिंडा के स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया।

ये भी पढ़ें

अस्पताल में संघर्ष और उपचार के चरण

शुरुआती प्राथमिक उपचार के बाद घावों की गंभीरता को देखते हुए उसे फौरन मोहाली के मैक्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। स्थिति में सुधार न होने पर उसे बाद में चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां वह करीब दो महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही। इस दौरान जांच से जुड़े कई प्रशासनिक पहलू भी विवादों के घेरे में आ गए हैं क्योंकि सामने आया है कि उपचार के कुछ पलों में जब उसे होश आया था, तब वह अपना बयान पुलिस के समक्ष दर्ज कराना चाहती थी। प्राप्य जानकारियों के अनुसार, पीजीआईएमईआर पुलिस चौकी की तरफ से खरड़ सदर थाने को आधिकारिक रूप से यह सूचना भेज दी गई थी कि पीड़िता अब होश में आ चुकी है और बयान देने के पूरी तरह योग्य है। हालांकि, गंभीर रूप से झुलसी उस महिला के पास जांच अधिकारी के समय पर न पहुंचने के कारण उसका बयान दर्ज नहीं हो सका और इसी बीच 26 अगस्त को उसने दम तोड़ दिया।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस का पक्ष

मंजीत की मृत्यु के फौरन बाद पीजीआईएमईआर चौकी की ओर से दोबारा खरड़ पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे और माता कांता देवी को सेक्टर-34 थाने ले जाकर विस्तृत बयान दर्ज किए। इन बयानों के आधार पर 27 अगस्त को अपहरण और हत्या की गंभीर धाराओं के तहत औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें शुबी और पिंडा को नामजद किया गया है। पुलिस महकमे पर उठ रहे प्रशासनिक लापरवाही के सवालों के बीच पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चूंकि कथित अपहरण की मूल घटना चंडीगढ़ के क्षेत्र में घटी थी, इसलिए वहां की कार्रवाई का अधिकार क्षेत्र चंडीगढ़ पुलिस का था। पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि खरड़ थाने की टीम ने पीड़िता की मां को हर संभव सहायता मुहैया कराई और मुकदमा दर्ज कराने में पूरा सहयोग किया, हालांकि बयान न दर्ज हो पाने को लेकर बनी स्थिति पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया 28 अगस्त को पीजीआईएमईआर में ही पूरी की गई और कानूनी औपचारिकताएं संपन्न होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब पुलिस नामजद आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और इस पूरे हत्याकांड की असली वजह का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

सोशल मीडिया पर थी सक्रिय उपस्थिति

मृतक मंजीत कौर केवल इस आपराधिक मामले की पीड़िता ही नहीं थीं, बल्कि इंटरनेट की दुनिया में उनका एक स्थापित दायरा भी था जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता था। इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर उनके लगभग 1.46 लाख फॉलोअर्स जुड़े हुए थे, जिनके लिए वह नियमित रूप से कॉस्मेटिक उत्पादों का प्रमोशन, आकर्षक रील्स और लोकप्रिय पंजाबी तथा हरियाणवी गानों पर आधारित वीडियो साझा करती थीं। इसके अलावा यूट्यूब पर भी उनके लगभग 3,930 सब्सक्राइबर थे, जिनके साथ वह अपने परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े व्लॉग अपलोड किया करती थीं। उनका ऑनलाइन कंटेंट मुख्य रूप से लाइफ़स्टाइल, मनोरंजन और पारिवारिक गतिविधियों के इर्द-गिर्द घूमता था, जिससे उनकी एक अलग पहचान बनी हुई थी। अब अचानक हुई इस नृशंस हत्या ने उनके चाहने वालों को झकझोर कर रख दिया है और हर कोई इस बात की तह तक जाना चाहता है कि आखिर इस बेरहमी के पीछे की असली वजह क्या थी।

सवाल-जवाब

मंजीत कौर कौन थीं?
मंजीत कौर चंडीगढ़ की 28 वर्षीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर थीं, जिनके इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अच्छे-खासे फॉलोअर्स थे।
घटना कब और कहां हुई थी?
यह घटना 3 और 4 जुलाई की दरमियानी रात को हुई थी, जब उन्हें चंडीगढ़ से अगवा करके मोरिंडा के जंगल में ले जाया गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या मुख्य खुलासा हुआ है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि मौत के वक्त मंजीत कौर लगभग सात सप्ताह की गर्भवती थीं।
इस मामले में किन आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है?
परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शुबी और पिंडा नामक आरोपियों के खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया है।
मंजीत कौर की मृत्यु कब हुई थी?
लगभग दो महीने तक अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद 26 अगस्त को पीजीआईएमईआर में उनकी मौत हो गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR