भारतीय खानपान में घी का इस्तेमाल प्राचीन काल से होता आ रहा है। दाल, पराठे और रोटियों पर घी लगाकर खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। बुजुर्ग भी हमेशा सीमित मात्रा में शुद्ध घी खाने की सलाह देते आए हैं। हालांकि, आज के समय में बाजार में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों की भरमार है, जिससे शुद्ध घी की पहचान करना काफी मुश्किल हो चुका है। ऐसे में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने बताया है कि बाजार से घी खरीदते समय डिब्बे पर लगे लेबल में कौन सी बातें जरूर देखनी चाहिए और सेहत के लिए सबसे बेहतर घी कौन सा माना जाता है।
घर का बना पारंपरिक घी है सबसे उत्तम विकल्प
डॉक्टर आलोक चोपड़ा का कहना है कि घी शरीर के लिए तभी फायदेमंद साबित होता है जब उसे सही विधि से तैयार किया गया हो। महज डिब्बे के ऊपर लिखे दावे या लेबल यह साबित नहीं करते कि खरीदा गया घी पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक है। उनके मुताबिक, यदि सबसे बेहतरीन घी की बात की जाए, तो वह वही है जिसे पारंपरिक तरीके से घर पर तैयार किया जाता है। हमारी दादी और नानी जिस प्रक्रिया से घर में घी बनाती थीं, वही तरीका आज भी गुणवत्ता का सर्वोच्च मानक माना जाता है।
घर में शुद्ध घी बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। इसके लिए सबसे पहले दूध से दही जमाया जाता है। इसके बाद जमाए गए दही को पारंपरिक तरीके से हाथों से मथकर सफेद मक्खन निकाला जाता है। फिर उस मक्खन को धीमी आंच पर पकाकर घी तैयार किया जाता है। इस संपूर्ण विधि से तैयार किया गया घी ही असली और सर्वोत्तम होता है। लेकिन जिन लोगों के पास समय की कमी है और वे घर पर घी तैयार नहीं कर सकते, उनके लिए बाजार में मिलने वाला पैक्ड घी भी एक विकल्प हो सकता है, बशर्ते उसे खरीदते समय कुछ खास पैमानों पर जांचा जाए।
पैक्ड घी खरीदते समय A2 टैग की जांच करें
यदि आप बाजार से डिब्बाबंद घी खरीद रहे हैं, तो सबसे पहले उसके लेबल पर यह देखें कि दूध A2 श्रेणी का है या नहीं। A2 शब्द असल में घी की नहीं, बल्कि उस दूध की गुणवत्ता और नस्ल को दर्शाता है जिससे वह घी तैयार हुआ है। देशी गायों के दूध में A2 प्रोटीन पाया जाता है, जिसे पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए अधिक बेहतर माना जाता है। इसलिए पैक्ड घी लेते समय दूध का प्रकार जांचना पहला महत्वपूर्ण कदम है।
प्रक्रिया समझें: 'बिलोना' और 'कल्चर्ड' शब्द का महत्व
दूध की गुणवत्ता जांचने के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू घी बनाने की प्रक्रिया है। पैक्ड घी के डिब्बे पर 'बिलोना' या 'कल्चर्ड' लिखा हुआ देखना जरूरी है। बिलोना या कल्चर्ड लिखे होने का सीधा मतलब यह होता है कि घी को सीधे दूध की मलाई से नहीं निकाला गया है, बल्कि पहले दूध से दही जमाया गया और फिर उसे मथकर घी बनाया गया है।
इसके साथ ही यह भी देखना चाहिए कि ब्रांड ने लेबल पर पारंपरिक रूप से हाथों से मथने का उल्लेख किया है या नहीं। पुराने समय में बुजुर्ग सफेद मक्खन से घी पकाने से पहले उसे पारंपरिक मथानी से मथते थे। यह प्रक्रिया घी के पोषक तत्वों को बरकरार रखने में मदद करती है।
मलाई से सीधे बना घी बनाम बिलोना घी
आजकल बाजार में उपलब्ध अधिकतर घी ब्रांड्स, जिनमें कई महंगे और प्रीमियम A2 घी भी शामिल हैं, सीधे दूध की मलाई से बनाए जाते हैं। कंपनियां मलाई से सीधे घी इसलिए बनाती हैं क्योंकि यह तरीका काफी तेज और कम लागत वाला होता है। मलाई से सीधे बना घी खराब नहीं होता और उसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन वह पारंपरिक बिलोना विधि से बने घी के बराबर पौष्टिक नहीं होता।
A2 आपको दूध की नस्ल और गुणवत्ता बताता है, जबकि बिलोना शब्द उसे तैयार करने की पारंपरिक विधि को दर्शाता है। सेहत के लिहाज से घी चुनते समय ये दोनों ही बातें समान रूप से मायने रखती हैं। यदि आपके आसपास कोई ऐसा स्थानीय या देशी ब्रांड मौजूद है जो पारंपरिक बिलोना विधि से असली A2 घी तैयार करता है, तो वहां से घी खरीदना सबसे बेहतर विकल्प है।



















