मानव शरीर के नाखून सिर्फ सुंदरता या सुरक्षा का साधन नहीं हैं, बल्कि ये अंदरूनी सेहत का दर्पण भी माने जाते हैं। उंगलियों के सिरे पर मौजूद नाखून केराटिन नाम के नाइट्रोजन युक्त प्रोटीन से बने होते हैं। क्योंकि ये सतह के ठीक नीचे रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब स्थित होते हैं, इसलिए शरीर में ऑक्सीजन, आयरन, प्रोटीन या हार्मोन के स्तर में होने वाला कोई भी उतार-चढ़ाव सबसे पहले नाखूनों पर दिखाई देता है। नाखूनों के रंग, टेक्सचर या शेप में आए बदलाव को समय रहते पहचानकर कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सकता है।
रंगों में बदलाव और उनसे जुड़े स्वास्थ्य संकेत
सामान्य तौर पर स्वस्थ नाखून हल्के गुलाबी नजर आते हैं। यदि इनके रंग में कोई बदलाव आता है, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या की ओर इशारा करता है। उदाहरण के लिए, नाखूनों का पीला पड़ना अक्सर फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है। हालांकि, कई बार यह फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस या अत्यधिक धूम्रपान के असर के कारण भी हो सकता है। दूसरी तरफ, यदि नाखून का अधिकांश हिस्सा सफेद हो जाए और सिर्फ ऊपरी हिस्से पर पतली गुलाबी पट्टी बचे, तो यह लिवर सिरोसिस, किडनी फेल्योर या हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर स्थितियों से जुड़ा हो सकता है।
यदि नाखूनों का प्राकृतिक गुलाबीपन कम हो जाए और वे फीके दिखाई देने लगें, तो यह शरीर में एनीमिया यानी खून की कमी, या फिर आयरन और प्रोटीन की कमी का संकेत माना जाता है। इसी तरह, नीले पड़े नाखून इस बात की ओर इशारा करते हैं कि खून में ऑक्सीजन का स्तर कम है, जो सांस या दिल की बीमारी की वजह से हो सकता है। बहुत अधिक ठंड के मौसम में खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण भी नाखून नीले पड़ सकते हैं। इसके अलावा, नाखून के निचले हिस्से में बने आधे चांद यानी ल्यूनूला का रंग अगर लाल हो जाए, तो यह ल्यूपस या रुमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों का संकेत हो सकता है।
नाखूनों की बनावट, आकार और लकीरों का मतलब
नाखूनों के रंग के साथ-साथ उनका आकार और सतह की बनावट भी सेहत के बारे में बहुत कुछ बताती है। यदि नाखून के बीच में चम्मच जैसा गड्ढा बनने लगे, तो यह मुख्य रूप से आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया या गंभीर पोषण की कमी को दर्शाता है। वहीं, अगर नाखून गोल और बाहर की तरफ उभरे हुए दिखने लगें और उंगलियों के सिरे मोटे हो जाएं, तो इस स्थिति को क्लबिंग कहा जाता है। यह फेफड़ों, दिल या लिवर की पुरानी और गंभीर बीमारियों की तरफ इशारा करता है।
नाखूनों पर दिखने वाली लकीरों का भी अलग-अलग मतलब होता है। नाखूनों पर ऊपर से नीचे की तरफ सीधी खड़ी लकीरें नजर आना उम्र बढ़ने की एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन यदि नाखूनों पर आड़ी यानी हॉरिजॉन्टल लकीरें बन जाएं, तो इसका मतलब है कि किसी गंभीर बीमारी, तेज बुखार या बहुत अधिक शारीरिक व मानसिक तनाव के कारण कुछ समय के लिए नाखून का विकास रुक गया था। इसके अतिरिक्त, यदि नाखून बहुत अधिक भुरभुरे, मोटे या आसानी से टूटने वाले हो जाएं, तो यह थायरॉइड की समस्या, सोरायसिस या फंगल संक्रमण का नतीजा हो सकता है।
गंभीर चेतावनी: कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। यदि किसी एक या सभी नाखूनों पर अचानक काली या भूरी सीधी लंबी लकीर दिखाई दे और वह धीरे-धीरे चौड़ी या लंबी होने लगे, तो यह नेल मेलेनोमा यानी एक प्रकार के त्वचा कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
इसके अलावा, यदि नाखूनों का रंग अचानक से बहुत गहरा पीला, नीला या काला पड़ जाए, नाखून के आसपास बार-बार सूजन या संक्रमण होने लगे, या फिर नाखून अत्यधिक भुरभुरे होकर चम्मच के आकार में मुड़ने लगें, तो डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य हो जाता है। समय पर की गई जांच किसी बड़ी बीमारी को शुरुआत में ही रोकने में मदद कर सकती है।
सामान्य बदलाव और चिकित्सीय परामर्श का फर्क
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि नाखूनों में आने वाला हर बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार किसी हल्की चोट, रासायनिक नेल पॉलिश का इस्तेमाल करने या सामान्य स्थानीय संक्रमण के कारण भी नाखून का रंग या रूप बदल सकता है। ऐसे मामूली बदलाव आमतौर पर अपने आप या थोड़े समय में ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, यदि नाखूनों में आए बदलाव लंबे समय तक बने रहते हैं, एक साथ कई नाखूनों को प्रभावित करते हैं, या फिर उनके साथ शरीर में अन्य लक्षण जैसे बहुत ज्यादा थकान, सांस लेने में तकलीफ, या अचानक वजन घटने की समस्या भी दिखाई देती है, तो संपूर्ण चिकित्सीय जांच करवाना ही सबसे सही कदम होता है।



















