नेशनल सीलिएक अवेयरनेस डे पर जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय जहां साधारण रोटी भी बन जाती है सेहत की दुश्मनसरकारी सहायता से वंचित कोटा के मलखंभ कलाकारों ने बिखेरी चमक, टीवी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचेड्रेसिंग रूम लीक मामला: पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक से साइबर क्राइम एजेंसी ने की 4 घंटे पूछताछमूलांक 2 राशिफल 12 सितंबर 2026 को संवेदनशीलता पर रखें काबू और जानें अपना करियर सेहत तथा आर्थिक भविष्यफलमीन राशिफल 12 सितंबर: पार्टनर का मिलेगा सहयोग, करियर और आर्थिक मोर्चे पर होगा फायदाजयपुर बांदीकुई एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंधित बाइकर्स का हुड़दंग, रोकने पर टोलकर्मी को टक्कर मार हुए फराररांची की कंचन का नया कमाल: 'वृक्षा' ब्रांड के तहत AI से फेस स्कैन कर तैयार हो रहे पर्सनल ब्यूटी प्रोडक्ट्स, हर ग्राहक के नाम पर लगेगा एक पेड़पूर्व सहयोगी पर ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा कदम, कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफाबेहोशी, बर्बर यातना और बदली हुई पहचान: इज़राइल के सबसे खतरनाक खुफिया एजेंट एली कोहेन के जासूस बनने की अनसुनी दास्तानखैबर की पहाड़ियों से निकलकर रजाउल्लाह खान ने टेस्ट क्रिकेट में मचाया तहलका, डेब्यू मैच में ही बने हीरो
सोते समय ईयरबड्स लगाने की आदत डाल सकती है भारी, डॉक्टर ने दी चेतावनीस्वास्थ्य
8 सित॰ 2026, 8:04 am (4 दिन पहले)· 3

सोते समय ईयरबड्स लगाने की आदत डाल सकती है भारी, डॉक्टर ने दी चेतावनी

रात भर कान में ईयरबड्स लगाकर सोना सुनने की क्षमता को हमेशा के लिए कमजोर कर सकता है। फरीदाबाद की विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा महाजन ने अत्यधिक आवाज से होने वाले नुकसान और बचाव के तरीकों के बारे में बताया है।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मनोरंजन और काम के लिए कानों में ईयरबड्स या हेडफोन लगाए रखना बेहद आम हो चुका है। लोग सफर के दौरान, जिम में कसरत करते वक्त या काम के बीच में लगातार घंटों तक इनका इस्तेमाल करते रहते हैं। कई लोग तो सोते समय भी इन्हें उतारना भूल जाते हैं और रात भर संगीत या ऑडियो सुनते रहते हैं। शुरुआत में यह दिनचर्या काफी सामान्य और हानिरहित लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत कानों की सुनने की प्राकृतिक क्षमता पर गंभीर असर डालती है। कानों में सीटी बजना, किसी प्रकार की आवाज का गूंजना या घंटी जैसी आवाज सुनाई देना ऐसे शुरुआती लक्षण हैं जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर बच्चों और युवाओं में यह समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और उनके भविष्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

कानों पर पड़ता है स्थायी और गहरा असर

फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा महाजन ने कानों के स्वास्थ्य और लगातार बढ़ते ईयरबड्स के इस्तेमाल को लेकर कई जरूरी बातें साझा की हैं। उनका कहना है कि ईयरबड्स, इयरफोन या हेडफोन के अत्यधिक उपयोग से जो सुनने की क्षमता में कमी आती है, वह हमेशा के लिए होती है और धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। शुरुआत में इस नुकसान का अहसास आसानी से नहीं होता है, लेकिन समय बीतने के साथ बहरापन स्थायी रूप से घर कर जाता है। इसलिए समय रहते जरूरी सावधानियां बरतना और शुरुआती संकेत मिलते ही किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहद आवश्यक हो जाता है।

ये भी पढ़ें

सुरक्षित सुनने के नियम और वॉल्यूम की सीमा

विशेषज्ञ का यह भी स्पष्ट कहना है कि यदि मोबाइल फोन का पूरा सौ प्रतिशत वॉल्यूम स्पीकर मोड पर रखा जाए और फोन थोड़ी दूरी पर हो, तो कानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। लेकिन जैसे ही कान के बेहद करीब हेडफोन, इयरफोन या ईयरबड्स का उपयोग शुरू होता है, जोखिम काफी बढ़ जाता है। ईयरबड्स पर सौ प्रतिशत वॉल्यूम या सौ डेसिबल तक की तेज आवाज सुनना सुनने की क्षमता को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है। इस खतरे से बचने के लिए साठ और साठ के नियम का पालन करना चाहिए, जिसके तहत साठ डेसिबल तक की आवाज और लगातार साठ मिनट से ज्यादा इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार एक घंटे तक सुन रहा है, तो उसे बीच में दस से पंद्रह मिनट का अनिवार्य अंतराल या ब्रेक अवश्य लेना चाहिए।

कान में सीटी बजने के लक्षणों को पहचानें

चिकित्सकीय भाषा में कान के भीतर सीटी जैसी आवाज आने या लगातार गूंजने की स्थिति को टिनिटस कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को ऐसी अजीब आवाजें सुनाई देने लगें, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि कानों के भीतर अंदरूनी नुकसान शुरू हो चुका है। यदि आपके कानों में लगातार सीटी जैसी आवाज बनी हुई है और एक से दो घंटे बीत चुके हैं, तो बिना देर किए अपने कानों की मेडिकल जांच करवानी चाहिए और तुरंत किसी ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

रात को सोते समय ईयरबड्स का इस्तेमाल है खतरनाक

डॉक्टर अपर्णा महाजन के अनुसार, रात को सोते वक्त कानों में ईयरबड्स लगाकर सोना एक बेहद खतरनाक और नुकसानदायक आदत है। सोते समय ईयरबड्स लगे रहने की वजह से कान के अंदर प्राकृतिक रूप से बनने वाला मैल यानी वैक्स बाहर नहीं निकल पाता है और भीतर ही इकट्ठा होने लगता है। इसके अलावा, इस स्थिति में कानों को बहुत लंबी अवधि तक लगातार तेज आवाज या नॉइस एक्सपोजर का सामना करना पड़ता है। नींद में होने के कारण व्यक्ति को यह पता ही नहीं चल पाता कि कितनी तेज आवाज चल रही थी और वह कितनी देर तक उसका सेवन करता रहा, जिससे कानों को हमेशा के लिए गंभीर क्षति पहुंच सकती है.

बच्चों के लिए हेडफोन और ऑनलाइन कक्षाओं का खतरा

कोरोना महामारी के दौर में ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान बच्चों द्वारा हेडफोन के अत्यधिक इस्तेमाल से कई गंभीर मामले सामने आए थे। उस समयावधि में कई ऐसे बच्चे अस्पतालों में पहुंचे जिनके कानों में घंटियां बजने की शिकायत थी और उनकी सुनने की शक्ति भी कमजोर होने लगी थी। विशेषज्ञों ने इस संबंध में अभिभावकों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर यह अपील की थी कि बच्चों को ईयरफोन, ईयरबड्स या हेडफोन बिल्कुल न दिए जाएं। यदि बच्चे फोन के स्पीकर मोड पर आवाज सुनेंगे, तो वह उनके स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर होगा। यदि बचपन में ही इन उपकरणों की लत लग जाए, तो वयस्क होने पर सुनने से जुड़ी परेशानियां और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती हैं। इसलिए बच्चों को इन चीजों से दूर रखना चाहिए, आवाज हमेशा साठ से कम रखनी चाहिए और सीमित समय तक ही इनका उपयोग करना चाहिए।

सवाल-जवाब

ईयरबड्स के लगातार इस्तेमाल से किस तरह का नुकसान होता है?
ईयरबड्स के अत्यधिक और तेज इस्तेमाल से सुनने की क्षमता में होने वाला नुकसान स्थायी और प्रगतिशील होता है।
कान में सीटी बजने की आवाज आने पर क्या करना चाहिए?
कान में सीटी या घंटी बजने जैसी आवाज आने पर तुरंत किसी ईएनटी विशेषज्ञ से मिलकर जांच करवानी चाहिए।
सुरक्षित सुनने के लिए कौन सा नियम अपनाना चाहिए?
हियरिंग लॉस से बचने के लिए साठ डेसिबल तक की आवाज और साठ मिनट से अधिक समय तक लगातार न सुनने का नियम अपनाना चाहिए।
सोते समय ईयरबड्स क्यों नहीं लगाने चाहिए?
सोते समय ईयरबड्स लगाने से कान का मैल अंदर जमा हो जाता है और लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से स्थायी क्षति हो सकती है।
बच्चों को ऑनलाइन क्लास के दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?
बच्चों को हेडफोन या ईयरबड्स देने के बजाय फोन के स्पीकर मोड पर आवाज सुननी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR