अनानास अपने खट्टे-मीठे स्वाद और ताजगी भरे गुणों के कारण दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है। खास तौर पर गर्मी और मानसून के मौसम में लोग सेहत को बेहतर बनाने के लिए इसका सेवन बड़े चाव से करते हैं। हालांकि, घर पर इसे काटते समय लगभग हर व्यक्ति इसके बीच वाले सख्त और कड़े हिस्से जिसे कोर कहा जाता है, को काटकर सीधे कूड़ेदान में फेंक देता है। लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह सख्त भाग सेहत के लिए नुकसानदेह या जहरीला होता है, या फिर इसे केवल इसके कड़ेपन और बेस्वाद होने के कारण फेंक दिया जाता है। पोषण विशेषज्ञों के शोध बताते हैं कि जिसे हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, वह वास्तव में सेहत का एक बेहतरीन खजाना है।
जहरीला होने का भ्रम और कड़ेपन की असली वजह
अनानास के बीच वाले कड़े हिस्से को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। सच्चाई यह है कि यह हिस्सा बिल्कुल भी जहरीला नहीं होता और खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।इसे फेंकने की एकमात्र वजह इसका स्वाद और रेशेदार बनावट है। फल के बाहरी रसीले और मीठे गूदे की तुलना में यह मध्य भाग काफी सख्त होता है, इसमें मिठास कम होती है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है। अत्यधिक रेशेदार और कड़ा होने की वजह से इसे सीधे चबाकर खाना थोड़ा कठिन लगता है, इसलिए अधिकांश लोग इसे काट कर अलग कर देते हैं।
पोषक तत्वों और एंजाइम का अनूठा भंडार
खाद्य एवं पोषण विशेषज्ञों तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के शोध अध्ययनों के अनुसार, अनानास का यह सख्त कोर स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इस कड़े भाग में ब्रोमेलेन नाम का एक शक्तिशाली एंजाइम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। रोचक बात यह है कि फल के मुख्य मीठे गूदे की तुलना में इस सख्त हिस्से में ब्रोमेलेन की सांद्रता अधिक होती है। यह ब्रोमेलेन एंजाइम शरीर में जाकर जटिल प्रोटीन को पचाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में आई सूजन को कम करने में असरदार भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के पोषण आंकड़ों से पता चलता है कि अनानास के कोर में अघुलनशील फाइबर यानी इनसोल्युबल फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। यह अघुलनशील फाइबर हमारी आंतों की सफाई करने, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और कब्ज जैसी पुरानी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है। साथ ही, इस हिस्से में विटामिन C की भी भरपूर मात्रा मौजूद होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और त्वचा को प्राकृतिक चमक प्रदान करने में सहायता करती है।
अनानास के कड़े हिस्से के मुख्य स्वास्थ्य लाभ
अनानास के सख्त मध्य भाग को अपनी खुराक में शामिल करने से शरीर को कई प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं
- पाचन में विशेष मदद: इसमें मौजूद ब्रोमेलेन एंजाइम पेट में जाने वाले भारी भोजन और प्रोटीन को तेजी से तोड़ने और पचाने में सहायता करता है, जिससे पेट भारी होने की समस्या दूर होती है।
- जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत: अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह गठिया, जोड़ों के दर्द और शरीर की सूजन से पीड़ित लोगों को प्राकृतिक रूप से राहत पहुंचाता है।
- वजन नियंत्रित करने में सहायक: इस हिस्से में कैलोरी की मात्रा बेहद कम और फाइबर बहुत अधिक होता है। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और अनावश्यक खाने की इच्छा नियंत्रित रहती है।
कड़े हिस्से को आहार में शामिल करने के आसान तरीके
यदि आपको अनानास के सख्त भाग को सीधा चबाकर खाने में कठिनाई होती है, तो आप इसे आसान और स्वादिष्ट तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं
- पौष्टिक स्मूदी और जूस: अनानास के कोर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अन्य फलों के साथ ब्लेंडर में पीस लें और एक गाढ़ी स्मूदी या ताजा जूस तैयार करें।
- सूप, स्ट्यू और हर्बल टी: सूप, स्ट्यू या हर्बल चाय बनाते समय इसके टुकड़ों को पानी में अच्छी तरह उबाल लें, जिससे इसके सभी पोषक तत्व और अर्क पानी में आ जाएं।
- सलाद और रायता: इस सख्त भाग को बारीक कद्दूकस कर लें और फिर इसे फ्रूट सलाद, सब्जियों के सलाद या दही वाले रायते में मिलाकर खाएं।
सेवन की सही मात्रा, सावधानियां और जरूरी दिशा-निर्देश
अनानास का कोर भले ही गुणों से भरपूर हो, लेकिन इसका संतुलित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, एक दिन में आधा कप से लेकर एक कप तक बारीक कटा या ब्लेंड किया हुआ कोर खाना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन करता है, तो पेट में ऐंठन, दस्त या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कुछ विशेष परिस्थितियों में इसके सेवन को लेकर सावधानी बरतना आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं को, विशेष रूप से गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में, इसका अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। इसमें मौजूद ब्रोमेलेन एंजाइम गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स को समय से पहले नरम कर सकता है, इसलिए डॉक्टर शुरुआती दिनों में इससे परहेज की सलाह देते हैं। इसके अलावा, छोटे बच्चों को यह सख्त हिस्सा सीधा चबाने के लिए न दें, क्योंकि इसके कठोर रेशे गले में अटकने का खतरा पैदा कर सकते हैं। बच्चों को यह हमेशा ब्लेंड करके जूस या स्मूदी के रूप में ही दिया जाना चाहिए। जब इसे सीमित मात्रा में लिया जाता है, तो इसका ब्रोमेलेन और फाइबर मेटाबॉलिज्म को तेज करके फैट बर्न करने में भी मदद करता है।



















