600 और पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत लाने की पहल, रायपुर के शदाणी दरबार ने गृह मंत्रालय से मांगी विशेष वीजा राहतरिकॉर्ड शॉर्ट स्क्वीज़ के बाद इथेरियम 2,400 डॉलर के पार मजबूत, स्पॉट खरीदारी से बाजार को मिला सहाराभाई बहन के रिश्ते में घोले मिठास, रक्षाबंधन 2026 पर साझा करें 10 बेहद खास शुभकामना संदेशनर्सरी से लाया पौधा घर में गमले में लगाते ही क्यों सूखने लगता है? बिहार के विशेषज्ञ सत्येंद्र नारायण सिंह ने बताए जरूरी नियमजाजमऊ के सरैया चौराहे पर अचानक धंसी सड़क, 18 फीट गहरे गड्ढे से वीआईपी रूट बाधित और 9 मकानों पर खतराकुरुक्षेत्र में पत्नी ने पति का पेट चीरकर निकाले अंग, तंत्र-मंत्र के शक में पुलिस जांच शुरूकच्चे तेल की गिरावट और मजबूत डॉलर के बीच भारतीय रुपया रहा स्थिर, जैक्सन होल में केविन वॉरश के भाषण पर बाजार की नजरजलगांव में ट्रेन के आगे कूदा भील परिवार, 4 लोगों की मौत; महाराष्ट्र में सामने आईं खुदकुशी की अन्य घटनाएंराजस्थान में पशुपालकों को 400 चूजे और क्रेडिट कार्ड लोन दे रही सरकार, जानिए आवेदन का तरीकापलनाडू हाईवे पर प्राइवेट बस और ऑटो की जोरदार टक्कर, 6 महिलाओं सहित 7 लोगों की मौत और 8 घायल
अंबाला छावनी के आयुर्वेदाचार्य की चेतावनी, त्योहारों में मिलावटी मिठाइयों से दूर रहने के नियमस्वास्थ्य
27 अग॰ 2026, 10:05 am (1 घंटे पहले)· 3

अंबाला छावनी के आयुर्वेदाचार्य की चेतावनी, त्योहारों में मिलावटी मिठाइयों से दूर रहने के नियम

त्योहारी सीजन में मिलावटी खोया, नकली पनीर और घातक रासायनिक रंगों वाली मिठाइयों से सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। अंबाला छावनी अस्पताल के डॉक्टर ने मौसम बदलाव और त्योहारों के दौरान खान-पान की खास सावधानियों पर सलाह दी है।

त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में तरह-तरह की रंग-बिरंगी और आकर्षक मिठाइयों की दुकानें सज जाती हैं। मिठाइयों की यह चमक लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित करती है, लेकिन इस बाहरी सुंदरता के पीछे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी छिपा हो सकता है। नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र वर्मा ने त्योहारी सीजन में खान-पान को लेकर लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। उनके अनुसार, बाजार में मिलने वाला मिलावटी खोया, नकली पनीर और अत्यधिक केमिकल वाले रंगों से तैयार की गई मिठाइयां खुशियों के माहौल को अचानक बीमारी में बदल सकती हैं।

मौसम परिवर्तन और ऋतु संधि का शरीर पर प्रभाव

मौसम के बदलाव का मानव शरीर और पाचन तंत्र पर सीधा असर पड़ता है। वर्षा ऋतु के दौरान तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। कभी तेज बारिश तो कभी अचानक गर्मी और उमस के कारण शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इस तरह के मौसम में वायरल इंफेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। आयुर्वेद शास्त्र में मौसम परिवर्तन की इस समयावधि को ऋतु संधि के नाम से जाना जाता है। ऋतु संधि का अर्थ दो ऋतुओं के मिलने का समय होता है। किसी भी नए मौसम की शुरुआत होने के 15 दिन पहले और पुरानी ऋतु समाप्त होने के 15 दिन बाद तक खान-पान में विशेष परहेज और सावधानी रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

ये भी पढ़ें

चटक रंगों वाली मिठाइयों के खतरे और प्राकृतिक विकल्प

त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में लाल, पीली, हरी और अन्य गहरे चटक रंगों वाली मिठाइयों की मांग अचानक काफी बढ़ जाती है। देखने में ये मिठाइयां भले ही बहुत सुंदर लगें, लेकिन इनमें इस्तेमाल किए जाने वाले कृत्रिम और रासायनिक रंग सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। इन कृत्रिम रंगों के अधिक सेवन से बचने के लिए बाजार की मिठाइयों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। यदि संभव हो तो त्योहारों पर बाजार के बजाय घर पर ही शुद्ध सामग्रियों से मिठाइयां तैयार करना सबसे उत्तम मार्ग है। अगर घर में मिठाई बनाते समय रंग देना अनिवार्य लगे, तो कृत्रिम केमिकल रंगों के स्थान पर केसर का उपयोग करना चाहिए। केसर के प्रयोग से मिठाई को सुंदर प्राकृतिक रंग मिलने के साथ-साथ उसका स्वाद और पौष्टिकता भी बढ़ जाती है।

बाजार से मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच और खोये से बचाव

यदि घर पर मिठाई बनाना संभव न हो और बाजार से ही खरीदारी करनी पड़े, तो पेठा अन्य मिठाइयों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर और सुपाच्य विकल्प माना जा सकता है। हालांकि, पेठा खरीदते समय भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उसमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम रंग न मिलाया गया हो। मिठाई का चयन करते समय उसकी चमक या गहरे रंग से प्रभावित होने के बजाय हमेशा उसकी वास्तविक गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी चाहिए। त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए बाजार में नकली और अत्यधिक सफेद खोये की आपूर्ति बढ़ जाती है। बहुत ज्यादा सफेद दिखने वाले खोये में मिलावट की प्रबल आशंका रहती है। इसलिए खोया या खोये से बनी मिठाइयां केवल भरोसेमंद और विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदनी चाहिए।

डायबिटीज मरीजों के लिए खान-पान के विशेष निर्देश

डायबिटीज अथवा मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के लिए त्योहारों का समय अतिरिक्त सावधानी का होता है। ऐसे मरीजों को बाजार की अत्यधिक मीठी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर मिठाइयों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। यदि त्योहार के अवसर पर मिठाई खाने की तीव्र इच्छा हो, तो घर पर तैयार किए गए बिना चीनी वाले विकल्पों को चुनना चाहिए। घर पर तैयार किया गया फीका खोया या बिना चीनी मिलाकर बनाई गई दूध की बर्फी बाजार की अत्यधिक मीठी मिठाइयों की तुलना में स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है। फिर भी, डायबिटीज के मरीजों को अपनी व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही किसी खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

त्योहारों के बाद अस्पताल ओपीडी में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं

त्योहारों की समाप्ति के तुरंत बाद अस्पतालों की ओपीडी में पेट से संबंधित विकारों और पाचन संबंधी शिकायतों के मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जाता है। त्योहार के उत्साह और उमंग में लोग अक्सर अपने खान-पान पर नियंत्रण खो देते हैं, जिसका सीधा असर पाचन क्रिया पर पड़ता है। बाहर के तैयार भोजन का सेवन सीमित करना, बासी भोजन से बचना और ताजा बना खाना खाना इस मौसम में बेहद जरूरी है। इसके साथ ही मिठाइयों की मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए। थोड़ा सा संयम और सावधानी बरतकर त्योहार की खुशियों को बीमारी के खतरे से बचाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

त्योहारों में किन मिठाइयों से दूर रहने की सलाह दी गई है?
अत्यधिक चटक रंगों (लाल, पीली, हरी) वाली मिठाइयों, अत्यधिक सफेद दिखने वाले संदिग्ध खोये और मिलावटी पनीर से बनी मिठाइयों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
आयुर्वेद में ऋतु संधि क्या है और इस दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?
दो मौसमों के बदलने के संधि काल को ऋतु संधि कहते हैं। इस दौरान मौसम की शुरुआत और समाप्ति के 15-15 दिन खान-पान में विशेष परहेज रखना चाहिए।
बाजार से मिठाई खरीदते समय सबसे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?
बिना कृत्रिम रंग वाला पेठा बाजार की अन्य मिठाइयों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है।
डायबिटीज के मरीज त्योहारों पर मिठाई की जगह क्या खा सकते हैं?
डायबिटीज के मरीज घर पर बनी फीकी खोया या बिना चीनी वाली दूध की बर्फी का सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR