पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक कस्बे कलानौर के पास पंचायत जैलदारां के पूर्व सरपंच स्वर्गीय सुरिंदर विज के स्मरणोत्सव को उनके परिवार ने बेहद अनूठे तरीके से मनाया। सामान्य तौर पर लोग अपने पुरखों के वार्षिक श्राद्ध या बरसी पर केवल पारिवारिक पूजा अर्चना अथवा लंगर का आयोजन करते हैं। इसके विपरीत, उनके समाजसेवी पुत्र नरेंद्र विज निती सारा ने अपने पिता के महापरिनिर्वाण के दसवें वर्ष को यादगार बनाने के उद्देश्य से पूरे सिनेमा हॉल को आरक्षित कर दिया। इस विशिष्ट आयोजन में दो सौ से ज्यादा श्रद्धालु एकत्र हुए, जिन्हें भक्ति प्रधान चलचित्र 'हनुमान अंश' का विशेष प्रदर्शन दिखाया गया।
सिनेमाघर के भीतर गूंजे भजन और सीता राम के जयकारे
थियेटर परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण किसी सामान्य फिल्म शो जैसा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धाम जैसा प्रतीत हो रहा था। बड़े पर्दे पर चलचित्र की कथा चलने के समानांतर ही सभागार में निरंतर प्रभु स्मरण और भजन गायन चलता रहा। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर 'सीता-राम, सीता-राम' का संकीर्तन किया, जिससे संपूर्ण हॉल गूंजायमान हो गया। संगीतमय भजन मंडलियों ने भक्ति संगीत की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं, जिसने दर्शकों को गहरे आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।
इस आध्यात्मिक सम्मलेन में कई प्रमुख साधु संतों और धार्मिक हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें मुख्य रूप से छोटे देवा कलानौर और बाबा रमा शामिल हुए। आयोजन समिति की ओर से पधारे हुए राम भक्तों को पारंपरिक मर्यादा के अनुरूप सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वहां एकत्र हुई पूरी संगत के लिए सुव्यवस्थित लंगर और प्रसाद वितरण का भी व्यापक प्रबंध किया गया था।
पिता की स्मृति में लंबे समय से जारी है परोपकार की परंपरा
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य वक्ताओं ने स्वर्गीय सुरिंदर विज के ग्राम विकास और जनसेवा के कार्यों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सभा को संबोधित करते हुए अशोक कोहली ने उनके द्वारा समाज कल्याण में दिए गए उल्लेखनीय योगदान और जीवन मूल्यों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि किस प्रकार स्वर्गीय विज ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोपरि रखा और गांव के विकास के लिए निष्ठापूर्वक कार्य किया।
नरेंद्र विज ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि परिवार कई वर्षों से अपने पूज्य पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए निरंतर जनकल्याणकारी उपक्रमों में संलग्न है। परिवार द्वारा समय समय पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, चिकित्सा सहायता वितरण और निर्धन स्कूली विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने जैसे पुनीत कार्य किए जाते रहे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना वैश्विक संकट के कठिन दौर में भी बेसहारा और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक राशन व राहत पहुंचाने का काम निरंतर किया गया। नरेंद्र विज का कहना था कि वे पिता के इस स्मृति दिवस को केवल औपचारिक रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रखना चाहते थे, बल्कि इसे युवा पीढ़ी और समाज के आध्यात्मिक जागरण से जोड़ना चाहते थे।
युवा पीढ़ी को सनातन विरासत से जोड़ने की सार्थक पहल
सिनेमाघर में चलचित्र देखने आए विभिन्न प्रभु भक्तों ने इस नवाचार की मुक्तकंठ से सराहना की। उपस्थित श्रद्धालुओं का कहना था कि आधुनिक भागदौड़ और तकनीकी चकाचौंध के इस युग में बालकों व युवाओं को अपनी सनातन संस्कृति तथा पारंपरिक संस्कारों से जोड़े रखना परम आवश्यक हो चुका है। बुजुर्गों के संस्मरण पर ऐसी धर्मनिष्ठ व प्रेरक फिल्मों का दर्शन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली जड़ों और नैतिक मर्यादाओं से परिचित कराने का अत्यंत प्रभावी माध्यम सिद्ध होता है।
इस स्मृति समारोह में जनक राज खुल्लर, सोनी महाजन, अंकुश सोही और राजकुमार सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों व भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। सामूहिक कीर्तन, लंगर सेवा और 'हनुमान अंश' के इस सामूहिक प्रदर्शन ने पूरे आयोजन को सामाजिक समरसता और श्रद्धा का एक अनुपम उदाहरण बना दिया।

















