उम्र का बढ़ना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। हालांकि, दैनिक दिनचर्या में सही आदतों को शामिल करके और अपनी त्वचा की देखभाल पर ध्यान देकर उम्र ढलने के संकेतों को काफी धीमा किया जा सकता है। एमडी-डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आंचल पंथ ने स्पष्ट किया है कि केवल महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से ही त्वचा युवा नहीं रहती, बल्कि शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य और बाहरी केयर का संतुलन बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा बताए गए किन मुख्य आदतों को अपनाकर आप अपनी त्वचा और शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रख सकते हैं।
डाइट में पर्याप्त प्रोटीन और संतुलित पोषण
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों में टूट-फूट होती रहती है। त्वचा को कसाव देने और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए रोजाना की डाइट में भरपूर मात्रा में प्रोटीन शामिल करना अनिवार्य है। प्रोटीन शरीर को आवश्यक अमीनो एसिड प्रदान करता है, जो टिश्यू रिपेयर और मसल मास को बनाए रखने में मदद करते हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह है कि किसी एक भोजन या सुपरफूड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी प्लेट में विविधता लाएं। अपनी रोजाना की खुराक में ताजी हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, हेल्दी फैट और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें। यह कॉम्बिनेशन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और त्वचा की प्राकृतिक चमक को अंदर से पोषित करता है।
मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में प्राकृतिक रूप से मांसपेशियों का नुकसान होने लगता है। इस समस्या से निपटने के लिए नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रेसिस्टेंस एक्सरसाइज करना जरूरी है। हफ्ते में कुछ दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से मांसपेशियों की ताकत बनी रहती है और हड्डियों का घनत्व मजबूत होता है। इसके अलावा, यह शरीर की गतिशीलता, संतुलन और मेटाबोलिक हेल्थ को दुरुस्त रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे त्वचा की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचती है और उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी हो जाती है।
कोलेजन निर्माण और स्किन रिकवरी के लिए 7 से 8 घंटे की नींद
त्वचा की सेहत और रिकवरी के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद आवश्यक है। लगातार नींद की कमी होने से शरीर की मेटाबोलिक, कार्डियोवैस्कुलर और दिमागी सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। जब आप 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेते हैं, तो शरीर में कोलेजन का निर्माण सुचारू रूप से होता है। नींद पूरी न होने की स्थिति में त्वचा में कोलेजन का स्तर गिरने लगता है, जिससे चेहरे पर असमय झुर्रियां, फाइन लाइन्स और आंखों के नीचे काले घेरे उभरने लगते हैं। इसलिए, त्वचा की प्राकृतिक चमक और लोच को बरकरार रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद जरूर लें।
UV किरणों से बचाव और सनस्क्रीन का नियमित उपयोग
त्वचा के समय से पहले बूढ़े होने का सबसे बड़ा कारण सूर्य की हानिकारक UV किरणें हैं। सूरज की धूप सीधे संपर्क में आने पर स्किन के कोलेजन और इलास्टिन फाइबर्स को नुकसान पहुंचाती है। इससे बचने के लिए हर मौसम में रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी है। अगर आपको तेज धूप में बाहर जाना पड़े, तो केवल सनस्क्रीन पर ही निर्भर न रहें। बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन की एक अतिरिक्त परत लगाएं, आंखों को सुरक्षा देने के लिए चश्मा पहनें और सिर को ढकने के लिए हैट का इस्तेमाल करें। धूप से सीधा बचाव करने पर त्वचा पर पिगमेंटेशन और धूप से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
नाइट केयर रूटीन में मॉइस्चराइज़र और रेटिनॉइड का सही इस्तेमाल
त्वचा की बाहरी परत को मजबूत बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइज़र और रेटिनॉइड्स का कॉम्बिनेशन बहुत प्रभावी माना जाता है। मॉइस्चराइज़र त्वचा की बैरियर लेयर को मजबूत करता है और नमी को लॉक करके सूखापन रोकता है। दूसरी तरफ, रेटिनॉइड्स बारीक रेखाओं, झुर्रियों और पिगमेंटेशन को ठीक करने में मददगार होते हैं। हालांकि, रेटिनॉइड का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसे हमेशा रात के समय ही लगाएं। रेटिनॉइड्स त्वचा को सूर्य के प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं, इसलिए दिन के समय इनका उपयोग करने से बचना चाहिए। रात में सही तरीके से मॉइस्चराइज़र और रेटिनॉइड का इस्तेमाल करने से त्वचा रात भर रिपेयर होती है और सुबह खिली-खिली नज़र आती है।



















