हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन आज के समय में एक ऐसा अदृश्य खतरा बन चुका है जो बिना किसी बड़े शुरुआती लक्षण के शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता रहता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 22 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। जब धमनियों में रक्त का दबाव लगातार सामान्य सीमा से अधिक रहता है, तो हृदय को शरीर के अन्य हिस्सों तक खून पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक जोर लगाना पड़ता है। इसके कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी खराब होने और आंखों की रोशनी कम होने जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई न देने की वजह से अधिकांश लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति काफी बिगड़ जाती है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए नियमित और सटीक जांच बेहद जरूरी है। सी के बिड़ला अस्पताल में मेटाबोलिक डिसॉर्डर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल के अनुसार, बीपी नापने के तरीके में की गई छोटी-सी चूक भी गलत रीडिंग दे सकती है, जिससे इलाज की दिशा प्रभावित हो सकती है।
हाइपरटेंशन के खतरे और सटीक जांच की जरूरत
जब शरीर की धमनियों में रक्त का दबाव लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है, तो रक्त वाहिकाओं की दीवारें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। हृदय को लगातार अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है और आगे चलकर हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, किडनी और आंखों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं भी इस दबाव को सहन नहीं कर पातीं। भारत में 22 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से जूझ रहे हैं, लेकिन सही जानकारी और नियमित निगरानी के अभाव में यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है। यदि बीपी की जांच ही गलत तरीके से की जाए, तो मरीज को अपनी वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता। गलत रीडिंग के आधार पर दवा की खुराक कम या ज्यादा हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
बीपी नापते समय लोग अक्सर करते हैं ये बड़ी गलतियां
डॉ. पारस अग्रवाल के अनुसार, ब्लड प्रेशर नापते समय लोग कई ऐसी छोटी-छोटी लापरवाही कर बैठते हैं, जो रीडिंग को बदल देती हैं। सबसे आम गलती यह है कि लोग पैदल चलने, सीढ़ियां चढ़ने, चाय या कॉफी पीने अथवा स्मोकिंग करने के तुरंत बाद बीपी नापने लगते हैं। शारीरिक गतिविधि या कैफीन और निकोटीन के सेवन के तुरंत बाद शरीर का ब्लड प्रेशर अस्थाई रूप से बढ़ जाता है। इसलिए बीपी जांचने से पहले कम से कम 5 मिनट तक शांत वातावरण में आराम से बैठना बेहद आवश्यक है।
जांच के दौरान बैठने की मुद्रा का भी बड़ा योगदान होता है। कुर्सी पर बैठते समय पीठ को सहारा न देना, पैरों को एक-दूसरे पर चढ़ाकर बैठना, अथवा बीपी नापते समय बात करना या हंसना रीडिंग को 10 से 15 पॉइंट तक बढ़ा सकता है। इसके अलावा, बांह की स्थिति का सही न होना भी एक प्रमुख गलती है। बीपी नापने वाले हाथ को मेज पर रखकर दिल के स्तर पर रखना चाहिए। हाथ को नीचे लटकाना या बहुत ऊपर उठाना रीडिंग को गलत कर देता है। कफ का आकार भी मायने रखता है। यदि कफ बहुत छोटा या बहुत बड़ा है, उसे कपड़ों के ऊपर बांधा गया है, अथवा बहुत ज्यादा कसा या ढीला बांधा गया है, तो रीडिंग सही नहीं आएगी। पेट बहुत ज्यादा भरा होना या पेशाब रोके रखने की स्थिति में भी सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रीडिंग में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
रक्तचाप की सटीक रीडिंग लेने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
ब्लड प्रेशर की बिल्कुल सटीक रीडिंग पाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। सबसे पहले किसी शांत कमरे में कम से कम 5 मिनट आराम से बैठें ताकि शरीर और मन स्थिर हो सके। यदि किसी कारणवश घबराहट या मानसिक तनाव महसूस हो रहा हो, तो पहले सांसों को सामान्य करें और खुद को सहज महसूस कराएं।
इसके बाद किसी आरामदायक कुर्सी पर इस तरह बैठें कि आपकी पीठ को पूरा सहारा मिले और दोनों पैर फर्श पर सपाट टिके हों। पैरों को आपस में क्रॉस बिल्कुल न करें। अब बीपी मशीन के कफ को अपनी नंगी बांह पर लपेटें। ध्यान रहे कि कफ कपड़े के ऊपर न बंधा हो और त्वचा पर सही तरीके से सेट हो। कफ न तो बहुत टाइट होना चाहिए और न ही बहुत ढीला। जिस बांह में कफ बंधा है, उस हाथ को सामने मेज पर इस तरह टिकाएं कि कफ का हिस्सा आपके हृदय के ठीक सामने और एक ही ऊंचाई पर रहे।
कफ सही तरीके से बंध जाने के बाद ऑटोमेटिक बीपी मॉनिटर का स्टार्ट बटन दबाएं। मॉनिटर चालू होते ही कफ में हवा भरेगी और फिर धीरे-धीरे हवा बाहर निकलेगी। इस दौरान एकदम शांत रहें, न बोलें और न ही शरीर को हिलाएं। डिजिटल स्क्रीन पर दो आंकड़े दिखाई देंगे। ऊपर वाला आंकड़ा सिस्टोलिक रीडिंग और नीचे वाला आंकड़ा डायस्टोलिक रीडिंग दर्शाता है। दोनों अंकों को बिना किसी बदलाव के ध्यानपूर्वक नोट कर लें।
सटीक नतीजे के लिए क्यों जरूरी है दो बार जांच का नियम
केवल एक बार रीडिंग लेकर बीपी का सही अंदाजा लगाना एक बड़ी भूल है, जो अक्सर लोग घर पर करते हैं। हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर हर मिनट थोड़ा-बहुत बदलता रहता है। किसी क्षण मामूली हलचल या सांस लेने के तरीके से भी आंकड़ों में थोड़ा अंतर आ सकता है।
इसलिए विशेषज्ञ पहली रीडिंग नोट करने के बाद कुछ देर विश्राम की मुद्रा में ही बैठने की सलाह देते हैं। 1 से 2 मिनट रुकने के बाद उसी बांह पर पूरी प्रक्रिया को दोबारा दोहराएं और दूसरी रीडिंग प्राप्त करें। इसके बाद दोनों बार आई सिस्टोलिक रीडिंग और दोनों बार आई डायस्टोलिक रीडिंग का औसत निकाल लें। यह औसत मान ही आपका वास्तविक और सटीक ब्लड प्रेशर माना जाएगा, जिसके आधार पर डॉक्टर सही डॉक्टरी सलाह दे सकेंगे।



















