भारतीय शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक नई स्मार्ट दवा विकसित की है, जो शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. आसीस बाला और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के डॉ. केपी भाबक के नेतृत्व में यह शोध पूरा किया गया है। वैज्ञानिकों की इस टीम ने आरके-251 (RK-251) नामक एक विशेष मॉलिक्यूल तैयार किया है। यह नई खोज पारंपरिक कीमोथेरेपी का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकती है, क्योंकि कीमोथेरेपी के दौरान अक्सर शरीर के स्वस्थ ऊतकों को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
मानव शरीर में कैंसर कोशिकाओं का व्यवहार और उनकी चालाकी
मानव शरीर में कई लाख अरब कोशिकाएं मौजूद होती हैं, जो सामान्य स्थिति में एकसमान, सुंदर और व्यवस्थित आकार में कार्य करती हैं। हालांकि, जब कोई सामान्य कोशिका कैंसरग्रस्त कोशिका में बदलने लगती है, तो उसका डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसके कारण कोशिका का आकार बेहद अटपटा, अनियमित और टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है। सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाएं बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ाती हैं और देखते ही देखते ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। ये खतरनाक कोशिकाएं शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं का पोषण और भोजन छीनने लगती हैं, जिससे स्वस्थ कोशिकाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। इसके अलावा, कैंसर कोशिकाएं अत्यधिक चालाक होती हैं, वे दवाओं के प्रभाव से बचने के लिए तेजी से अपना रूप बदल लेती हैं और शरीर के भीतर खुद को छुपा लेती हैं।
पारंपरिक कीमोथेरेपी की सीमाएं और टारगेटेड थेरेपी की जरूरत
कैंसर के उपचार के लिए लंबे समय से कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन इसकी एक बड़ी सीमा यह है कि यह विभेदीकरण नहीं कर पाती। कीमोथेरेपी की दवाएं कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के प्रयास में आसपास मौजूद महत्वपूर्ण और स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट कर देती हैं। इस प्रक्रिया में शरीर के स्वस्थ ऊतकों को पहुंचने वाली क्षति के कारण मरीजों को गंभीर प्रतिकूल प्रभावों और साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के रूप में टारगेटेड थेरेपी की आवश्यकता महसूस की गई। ऐसी पद्धतियों का मुख्य उद्देश्य ऐसी दवाएं तैयार करना है जो सामान्य शरीर और स्वस्थ ऊतकों में पूरी तरह निष्क्रिय रहें, लेकिन जैसे ही ट्यूमर या कैंसर कोशिका के भीतर पहुंचें, तुरंत सक्रिय होकर अपना काम शुरू कर दें।
स्मार्ट दवा RK-251 की कार्यप्रणाली और रासायनिक तंत्र
भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई नई स्मार्ट दवा RK-251 इसी सिद्धांत पर काम करती है। कैंसर कोशिकाओं में अक्सर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) का स्तर काफी अधिक होता है, जो अत्यंत हानिकारक रासायनिक मॉलिक्यूल होते हैं। RK-251 की बनावट इस तरह की गई है कि जैसे ही यह कैंसर कोशिका में प्रवेश करती है, वहां मौजूद ROS का उच्च स्तर इस दवा को ट्रिगर कर देता है। दवा के ट्रिगर होते ही इससे एनबीडीएचईएक्स (NBDHEX) नामक एक शक्तिशाली कैंसर-रोधी कंपाउंड निकलता है। यह कंपाउंड उन लक्षित प्रोटीनों के स्राव और कार्य को रोक देता है, जिनकी मदद से कैंसर कोशिकाएं पोषण प्राप्त करती हैं और जीवित रहती हैं। आवश्यक प्रोटीनों के रुकते ही कैंसर कोशिकाएं भीतर से कमजोर होकर नष्ट होने लगती हैं।
प्रयोगशाला परीक्षण, जेब्राफिश स्टडी और आगे का रास्ता
नैदानिक और प्रयोगशाला अध्ययनों के दौरान RK-251 ने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर की कोशिकाओं के खिलाफ अत्यंत प्रभावी परिणाम दिखाए हैं। इस दौरान स्वस्थ कोशिकाओं पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर नहीं देखा गया। इस दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता जांचने के लिए जेब्राफिश पर भी परीक्षण किए गए। परीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की टॉक्सिसिटी या विषैले प्रभाव के संकेत नहीं मिले और ROS की मौजूदगी में दवा ने अपेक्षित फ्लोरेसेंस प्रदर्शित किया। इससे यह साबित होता है कि दवा लक्षित स्थान पर ही सक्रिय होती है। वैज्ञानिकों का यह महत्वपूर्ण अध्ययन जर्नल ऑफ मेडिसिन एंड केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मानव रोगियों पर इस तकनीक का परीक्षण करने से पहले अभी और अधिक व्यापक अध्ययनों तथा सत्यापन की आवश्यकता होगी।



















