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मानसून में मवेशियों की जान बचाएगा नि:शुल्क टीका, पाली जिले में लंपी और गलघोंटू के खिलाफ बड़ा अभियानस्वास्थ्य
20 अग॰ 2026, 4:19 pm (68 दिन पहले)· 0

मानसून में मवेशियों की जान बचाएगा नि:शुल्क टीका, पाली जिले में लंपी और गलघोंटू के खिलाफ बड़ा अभियान

मानसून के दौरान पाली जिले में लंपी, लंगड़ा बुखार और गलघोंटू रोग के बढ़ते जोखिम को देखते हुए पशुपालन विभाग ने नि:शुल्क टीकाकरण और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।

मानसून के आगमन और बदलते मौसम के साथ ही राजस्थान के पाली जिले में मवेशियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। बारिश के इस दौर में गौवंश और भैंसों में संक्रामक बीमारियों के तेजी से फैलने की आशंका बनी रहती है। पिछले वर्ष पाली जिले में लंगड़ा बुखार के कई मामले दर्ज किए गए थे, जिसे ध्यान में रखते हुए इस बार पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग की ओर से मवेशियों को लंपी स्किन डिजीज, लंगड़ा बुखार और गलघोंटू जैसी तीन जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए पूरे जिले में नि:शुल्क टीकाकरण और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

30 से 40 पशुपालकों के जत्थों को जोधपुर में दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

पशुओं को मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखना पशुपालन विभाग की पहली प्राथमिकता है। पशुपालन विभाग के एडिशनल डायरेक्टर मनमोहन नागौरी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि मानसून के जोखिम भरे समय में पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग की ओर से रोजाना के आधार पर टीकाकरण और जागरूकता अभियानों की प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है।

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पशुपालकों को आधुनिक रोग प्रबंधन की जानकारी देने के लिए बैठकों का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। राजस्थान सरकार द्वारा जोधपुर में स्थापित किए गए विशेष ट्रेनिंग सेंटर के जरिए पाली सहित पूरे जोधपुर संभाग के पशुपालकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस योजना के तहत 30 से 40 पशुपालकों के अलग-अलग जत्थों को बुलाकर पशुओं के सही रखरखाव, स्वच्छता तथा बीमारियों के शुरुआती संकेतों को पहचानने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

तीन मुख्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर रही नि:शुल्क वैक्सीन

पशुपालकों को अपने मवेशियों का समय पर टीकाकरण करवाने की सलाह देते हुए एडिशनल डायरेक्टर मनमोहन नागौरी ने कहा कि संक्रामक और घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर टीका लगवाना ही सबसे कारगर हथियार है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मुख्य रूप से तीन प्रकार के रोगों के खिलाफ फ्री वैक्सीन लगाई जा रही है।

1. लंपी स्किन डिजीज: यह गौवंश में फैलने वाला एक अत्यंत संक्रामक रोग है। बीते समय में इस बीमारी ने महामारी का रूप धारण कर लिया था। हालांकि, व्यापक स्तर पर चलाए गए वैक्सीनेशन की वजह से अब इस पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। इस बार पशुओं की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए उन्हें बूस्टर खुराक दी जा रही है।

2. गलघोंटू रोग: यह मुख्य रूप से भैंसों को शिकार बनाने वाली अति घातक बीमारी है। इसमें पशु के गले में भारी सूजन आ जाती है और उसे सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होती है। इलाज में थोड़ी सी भी देरी पशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। विभाग इसके प्रसार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर टीके लगा रहा है।

3. लंगड़ा बुखार: यह बीमारी विशेष रूप से गौवंश को प्रभावित करती है। इसमें पशु को तेज बुखार के साथ पैर में दर्द होता है, जिससे वह लंगड़ाकर चलने लगता है। पिछले साल पाली जिले में इसके मामले सामने आने के कारण इस बार इसके खिलाफ विशेष टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है।

पशुपालकों के लिए विभागीय सावधानियां और स्वच्छता निर्देश

संक्रामक रोगों के जीवाणुओं को पनपने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल टीकाकरण ही नहीं, बल्कि पशुओं के आसपास की सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

  • जलभराव वाले स्थानों से दूरी: मवेशियों को किसी भी स्थिति में पानी भरे स्थानों या कीचड़ वाले इलाकों में न बांधें और न ही वहां जाने दें। नमी और दूषित पानी में वायरस तथा बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं।
  • बाड़े की नियमित सफाई: पशुओं के बाड़े या शेड में गोबर और मूत्र का उचित निस्तारण रोजाना होना चाहिए। पशुओं के बैठने और खड़े होने की जगह को हमेशा साफ और सूखा बनाए रखें।
  • नजदीकी केंद्र से संपर्क: अपने आसपास के पशु चिकित्सा केंद्र में तुरंत संपर्क करके अपने सभी गौवंश और भैंसों का संपूर्ण टीकाकरण समय पर करवाएं।
  • लक्षण दिखते ही चिकित्सा सलाह: यदि किसी पशु में तेज बुखार, खाना-पीना छोड़ना, लंगड़ाकर चलना या गले में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना कोई समय गंवाए नजदीकी पशु चिकित्सक से परामर्श लें।

सवाल-जवाब

पाली जिले में पशुओं को किन तीन प्रमुख बीमारियों से बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है?
पाली जिले में लंपी स्किन डिजीज, लंगड़ा बुखार और भैंसों में होने वाले गलघोंटू रोग से बचाव के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम कहां और कैसे आयोजित किया जा रहा है?
जोधपुर में स्थापित विशेष ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से पाली और जोधपुर संभाग के 30 से 40 पशुपालकों के जत्थों को रोग प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मानसून के मौसम में पशुओं के बाड़े के लिए क्या सावधानियां बताई गई हैं?
बाड़े में जलभराव न होने दें, गोबर व मूत्र का सही निस्तारण करें और पशुओं के बैठने की जगह को हमेशा साफ और सूखा रखें।
पशुओं में बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं और दिखने पर क्या करना चाहिए?
तेज बुखार, लंगड़ाकर चलना, खाना-पीना छोड़ना या गले में सूजन दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
क्या इन बीमारियों से बचाव के टीकों के लिए पशुपालकों को शुल्क देना होगा?
नहीं, राजस्थान सरकार का पशुपालन विभाग इन सभी तीनों बीमारियों के लिए नि:शुल्क टीके लगा रहा है।
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