फिटनेस की दुनिया में नए-नए ट्रेंड आते-जाते रहते हैं, पर कुछ ऐसे होते हैं जिनके पीछे असली विज्ञान छिपा होता है। पीछे की ओर चलना, जिसे अंग्रेजी में Retro Walking या बैकवर्ड वॉकिंग कहते हैं, ऐसा ही एक तरीका है। दावा किया जा रहा है कि अगर आप रोज सुबह महज 30 सेकंड के लिए उल्टा चलें, तो शरीर और दिमाग दोनों को इसका भरपूर लाभ मिल सकता है।
आम तौर पर मॉर्निंग वॉक में हम आगे की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। लेकिन जैसे ही आप उसी राह पर पीछे की तरफ चलना शुरू करते हैं, आपका शरीर और मस्तिष्क एक बिल्कुल नई चुनौती से रूबरू होते हैं। पहली बार में यह अजीब और थोड़ा कठिन जरूर लगेगा, मगर यही असहजता दरअसल इस कसरत की ताकत है।
शरीर का यांत्रिकी बदल जाता है
डॉक्टरों का मानना है कि उल्टा चलने पर शरीर के बायोमैकेनिक्स (biomechanics) बदल जाते हैं, और इसी बदलाव से सेहत को कई असरदार फायदे मिलते हैं। यही वजह है कि पीठ दर्द, घुटनों की तकलीफ या गठिया (Arthritis) से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह अभ्यास राहत भरा साबित हो सकता है।
संतुलन और स्थिरता में निखार
जब कदम पीछे की ओर पड़ते हैं तो शरीर को खुद को संभालने के लिए कहीं ज्यादा नियंत्रण की जरूरत पड़ती है। इसका सीधा असर आपके पोस्चर पर पड़ता है और शरीर का संतुलन बेहतर होता जाता है। बढ़ती उम्र में गिरने या लड़खड़ाने का जो खतरा रहता है, उसे कम करने के लिहाज से यह एक बेहद कारगर एक्सरसाइज मानी जाती है।
उन मांसपेशियों की कसरत जो अक्सर सोई रहती हैं
रोजाना सीधे चलते रहने से शरीर की चंद गिनी-चुनी मांसपेशियां ही सक्रिय रहती हैं। इसके उलट, पीछे की ओर चलने पर पिंडलियों (काफ्स), हैमस्ट्रिंग, क्वाड्रिसेप्स और कोर मसल्स पर ज्यादा दबाव पड़ता है। नतीजा यह कि पैरों की ताकत बढ़ती है और मांसपेशियों में जो असंतुलन रहता है, वह भी दुरुस्त होने लगता है।
घुटनों और जोड़ों के लिए राहत
यह कोई संयोग नहीं कि फिजियोथेरेपी में घुटनों के दर्द से परेशान लोगों को अक्सर उल्टा चलने की सलाह दी जाती है। सीधे चलने के मुकाबले इसमें घुटनों पर बेहद कम दबाव पड़ता है। यानी अगर आपके घुटनों या जोड़ों में दिक्कत है, तो बिना किसी नुकसान के यह आपकी गतिशीलता (मोबिलिटी) को सुधार सकता है।
कम समय में ज्यादा कैलोरी की खपत
यह जानकर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन सीधे चलने की तुलना में उल्टा चलने में शरीर को कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही अतिरिक्त मेहनत आपकी हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन को तेज कर देती है, जिससे कम वक्त में ही ज्यादा कैलोरी बर्न हो जाती हैं।
दिमाग के लिए दमदार वर्कआउट
उल्टा चलना सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि आपके मस्तिष्क की भी जबरदस्त एक्सरसाइज है। चूंकि यह एक असामान्य गतिविधि है, इसलिए संतुलन और दिशा बनाए रखने के लिए दिमाग को कहीं ज्यादा सक्रिय रहना पड़ता है। रिसर्च बताती है कि इससे याददाश्त (Memory), फोकस और रिएक्शन टाइम बेहतर होता है। सुबह-सुबह यह आपके न्यूरल पाथवेज को जगाकर पूरे दिन के लिए दिमाग को चुस्त कर देता है।
झुकी हुई पीठ को मिलती है सीध
दिनभर कंप्यूटर के आगे बैठना, गाड़ी चलाना या फोन में डूबे रहना — ये आदतें हमारी पीठ को धीरे-धीरे झुका देती हैं। उल्टा चलने से ग्लूटल मसल्स, क्वाड्रिसेप्स और हिप फ्लेक्सर्स सक्रिय हो उठते हैं, जिससे आप ज्यादा सीधे खड़े होने लगते हैं और रीढ़ की हड्डी का पोस्चर सुधरता है।
आखिर सिर्फ 30 सेकंड ही क्यों काफी हैं?
एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि इसके फायदे बटोरने के लिए आपको घंटों उल्टा चलने की कोई जरूरत नहीं। सुबह के वक्त की महज 30 सेकंड की रेट्रो वॉकिंग भी दिमाग को जगाने, मांसपेशियों को सक्रिय करने और ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त है। भागदौड़ भरी सुबह के लिए यह एक शानदार 'माइक्रो-हैबिट' है। तो फिर देर किस बात की — कल सुबह उठिए और अपनी सेहत को एक 'रिवर्स गियर' का तोहफा दीजिए।













