सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ कई श्रद्धालु पूरे महीने अथवा प्रत्येक सोमवार को उपवास रखते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह समय शारीरिक सेहत और खानपान की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक बेहतरीन मौका होता है। हालांकि, उपवास के दौरान लंबे समय तक कुछ न खाने या फिर जरूरत से ज्यादा तली-भुनी चीजों का सेवन करने से अक्सर शरीर में भारी थकान, कमजोरी, सुस्ती और सिरदर्द जैसी परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं। इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए व्रत के खानपान में सही और संतुलित पोषक तत्वों का समावेश करना अत्यंत आवश्यक है। आहार विशेषज्ञ अंजलि उपाध्याय का मानना है कि यदि उपवास के समय पौष्टिक और सुपाच्य व्यंजनों का चुनाव किया जाए, तो शरीर को दिनभर के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है और पाचन तंत्र भी सुचारू रूप से कार्य करता है। उन्होंने चार ऐसी खास और आसान रेसिपीज साझा की हैं जो स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ शरीर को पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती हैं।
व्रत में संतुलित और पोषक आहार की आवश्यकता
अक्सर देखा जाता है कि उपवास के दौरान लोग मुख्य रूप से आलू, साबूदाना और तेल या घी में तली हुई चीजों का अधिक सेवन करने लगते हैं। इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट कुछ समय के लिए भले ही भरा हुआ महसूस हो, लेकिन शरीर को आवश्यक मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाते हैं। इसके परिणामस्वरूप थोड़ी ही देर में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे थकान, सुस्ती और बार-बार भूख लगने की शिकायत होने लगती है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार उपवास के दौरान अपने भोजन में समक के चावल, मखाना, सिंघाड़े का आटा, शकरकंद, मेवे और ताजा दही जैसी पौष्टिक सामग्रियों को शामिल करना चाहिए। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा का संचार करते हैं, जिससे लंबे समय तक भूख का अहसास नहीं होता और रक्त शर्करा का स्तर भी नियंत्रित बना रहता है।
समक के चावल और मूंगफली की पौष्टिक खिचड़ी
उपवास के दिनों में हल्का, सुपाच्य और पेट को तृप्त करने वाला भोजन तलाश रहे लोगों के लिए समक के चावल की खिचड़ी एक बेहतरीन विकल्प है। इसे तैयार करने के लिए भुनी हुई मूंगफली, उबले या कटे आलू, जीरा, हरी मिर्च और सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। समक का चावल जटिल कार्बोहाइड्रेट का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है, जो पचने में थोड़ा समय लेता है और शरीर को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता रहता है। वहीं इसमें मिलाई जाने वाली मूंगफली से शरीर को स्वस्थ वसा और वनस्पति आधारित प्रोटीन प्राप्त होता है। जब इस खिचड़ी का सेवन ताजा दही के साथ किया जाता है, तो यह आहार न केवल और अधिक संतुलित बन जाता है बल्कि पाचन क्रिया को भी मजबूती प्रदान करता है।
मखाना और शकरकंद की शैलो फ्राई टिक्की
शाम के समय जब हल्की भूख सताने लगे, तब गहरा तला हुआ नाश्ता करने के बजाय मखाना और शकरकंद की टिक्की एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प साबित हो सकती है। इसे बनाने के लिए उबले हुए शकरकंद में पिसा हुआ मखाना, मूंगफली का पाउडर, कद्दूकस किया अदरक और ताजा धनिया पत्ती मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण से गोल टिक्कियां बनाकर बहुत कम घी में शैलो फ्राई किया जाता है। शकरकंद में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है और यह विटामिन ए के साथ-साथ धीमी गति से ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख जरिया है। दूसरी ओर, मखाना कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से समृद्ध होता है, जो हड्डियों की मजबूती और शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लौकी और सिंघाड़े के आटे का सुपाच्य चीला
यदि उपवास के दौरान पारंपरिक व्यंजनों से हटकर कुछ अलग और पौष्टिक खाने का मन हो, तो लौकी और सिंघाड़े के आटे से बना चीला एक उत्तम चुनाव है। इस व्यंजन को बनाने के लिए कद्दूकस की हुई लौकी में सिंघाड़े का आटा, जीरा, हरा धनिया और सेंधा नमक मिलाकर हल्का बैटर तैयार किया जाता है और नाममात्र के घी में तवे पर पकाया जाता है। लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और पाचन को बेहतर बनाने में सहायक होती है। वहीं सिंघाड़े का आटा पूरी तरह से ग्लूटेन-मुक्त होता है और इसका सेवन करने से पेट काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है।
खजूर और मखाने के प्राकृतिक मिठास वाले लड्डू
उपवास के दौरान यदि मीठा खाने की इच्छा हो, तो रिफाइंड चीनी से बनी मिठाइयों के बजाय खजूर से बने ड्राई फ्रूट और मखाना लड्डू एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प हैं। इन्हें बनाने के लिए भुने हुए मखाने, बादाम, अखरोट, सूखे नारियल के बुरे, इलायची पाउडर और खजूर को एक साथ मिलाकर बिना चीनी के लड्डू तैयार किए जाते हैं। खजूर से मिलने वाली प्राकृतिक मिठास स्वाद को बढ़ाती है, जबकि मेवों में मौजूद हेल्दी फैट, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स शरीर को तुरंत और लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं। जो लोग उपवास के दौरान यात्रा कर रहे हैं या दफ्तर में काम कर रहे हैं, उनके लिए यह लड्डू एक बेहद सुविधाजनक और पौष्टिक स्नैक साबित होता है।
सावन उपवास के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
उपवास के दिनों में केवल सही भोजन का चुनाव ही नहीं, बल्कि दिनचर्या की कुछ आदतों पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। अपने दिन की शुरुआत हमेशा गुनगुने पानी या ताजा नारियल पानी से करें, ताकि रातभर के बाद शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड हो सके। दिन के मुख्य भोजन में दही, छाछ या दूध को अवश्य शामिल करें, जिससे शरीर में प्रोटीन और कैल्शियम की कमी न हो। भोजन पकाते समय अत्यधिक तेल या घी में तलने के बजाय भूनने, उबालने या शैलो फ्राई करने की तकनीक अपनाएं। दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए ताजे फलों जैसे पपीता, सेब, अनार, केला और नाशपाती का सेवन करें। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में जल पीते रहें और बाजार में मिलने वाले पैकेजबंद उपवास वाले स्नैक्स, अत्यधिक चीनी व भारी मिठाइयों से परहेज करें।


















