शरीर का वजन नियंत्रित करने की कोशिश में सबसे बड़ी चुनौती समय-असमय लगने वाली भूख को संभालना होता है। जब भी काम के बीच में या शाम के समय भूख सताती है, तो ज्यादातर लोग बिना अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाए पेट भरने वाले सेहतमंद विकल्पों की तलाश करते हैं। भारतीय घरों में ऐसी स्थिति में मूंगफली और मखाना सबसे पसंदीदा स्नैक्स माने जाते हैं। ये दोनों ही चीजें आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन वजन घटाने के अलग-अलग लक्ष्यों के हिसाब से इनके प्रभाव में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
कैलोरी की मात्रा और पोर्शन साइज का अंतर
यदि आप अपनी दैनिक डाइट में कैलोरी की गिनती को लेकर काफी सख्त हैं, तो मखाना आपके लिए अधिक उपयुक्त विकल्प साबित होता है। एक पूरे कप भुने हुए मखाने में कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है। इसकी तुलना अगर एक छोटी मुट्ठी भुनी हुई मूंगफली से की जाए, तो मूंगफली में कैलोरी का घनत्व बहुत अधिक होता है। कम कैलोरी होने के कारण आप मखाने को थोड़ी अधिक मात्रा में भी खा सकते हैं, जिससे बिना वजन बढ़ने के डर के पेट भरने का अहसास होता है। वहीं मूंगफली खाते समय मात्रा पर विशेष नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अनजाने में थोड़ी सी अधिक मूंगफली खाने से भी शरीर में कैलोरी की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है।
संतुष्टि और पाचन की गति का विज्ञान
भूख को लंबे समय तक शांत रखने के मामले में मूंगफली मखाने से आगे निकल जाती है। मूंगफली के अंदर प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक फैट और फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। ये सभी तत्व धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे रक्त में ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और काफी देर तक दोबारा कुछ खाने की इच्छा नहीं होती। इसके विपरीत, मखाना खाने पर तुरंत पेट भरने की अनुभूति तो होती है, लेकिन इसमें फैट और प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होने की वजह से यह जल्दी पच जाता है। परिणाम स्वरूप मखाना खाने के कुछ ही समय बाद दोबारा हल्की भूख महसूस हो सकती है।
अपनी जीवनशैली के अनुसार सही विकल्प का चयन
स्नैक का चुनाव हर व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों और शारीरिक जरूरतों पर निर्भर करता है। जो लोग नियमित रूप से वर्कआउट या जिम करते हैं, या फिर जिनके दो भोजन के बीच लंबा अंतराल रहता है, उनके लिए सीमित मात्रा में मूंगफली खाना बेहतर रहता है। मूंगफली से मिलने वाला प्रोटीन और हेल्दी फैट शरीर को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है। दूसरी ओर, यदि आपको केवल शाम की चाय के साथ कुछ हल्का खाना है या देर रात अचानक भूख लगने की आदत है, तो बिना तेल या घी में भुना हुआ मखाना खाना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
डाइट में दोनों को शामिल करने का सही तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वजन घटाने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय दोनों का सही संतुलन बनाना चाहिए। आप दिन के समय या वर्कआउट के आसपास एक छोटी मुट्ठी भुनी हुई मूंगफली का सेवन कर सकते हैं। इसके बाद शाम या रात के समय जब हल्की भूख लगे, तब बिना ज्यादा मक्खन, घी या तेज मसालों के सेका गया मखाना खाया जा सकता है। ध्यान रहे कि मखाने को ज्यादा तेल या भारी मसालों में पकाने से उसकी लो-कैलोरी गुणवत्ता खत्म हो जाती है। किसी भी स्वास्थ्य योजना या डाइट बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श लेना उचित रहता है।



















