हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विजयदशमी यानी दशहरा पर्व को लेकर सभी औपचारिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के प्रसिद्ध और ऊंचाई पर स्थित जाखू मंदिर परिसर में 20 अक्तूबर यानी मंगलवार की शाम को रावण दहन का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष समारोह में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और वह एक रिमोट कंट्रोल सिस्टम के जरिए रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन करेंगे। स्वच्छ भारत अभियान के तहत पर्यावरण स्वच्छता का संदेश देने के उद्देश्य से इस बार पुतलों के आकार को पहले के मुकाबले सीमित रखा गया है। इससे पहले के वर्षों में यहां 55 फीट से भी अधिक ऊंचे पुतले जलाए जाते रहे हैं, जबकि इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई 40 फीट रखी गई है, जिसे कारीगरों के विवरण अनुसार 45 फीट के रूप में तैयार किया गया है।
विशेष तकनीकी आतिशबाजी और पानी के फव्वारे का नजारा
जाखू में आयोजित होने वाले इस दहन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक तकनीकी प्रभाव तथा विशेष आतिशबाजी मुख्य केंद्र रहेंगे। रावण के पुतले को विशेष तौर पर एक योद्धा की युद्ध पोशाक में सजाया गया है। दहन की प्रक्रिया के दौरान पुतले के सिर से आग की लपटें निकलेंगी, आंखों से आंसुओं की धारा बहेगी और फटे हुए सिर के हिस्से से रंग-बिरंगी आतिशबाजी फूटेगी। इसके साथ ही पुतले के पिछले हिस्से से पानी का एक फव्वारा भी छूटता हुआ दिखाई देगा, जो वहां उपस्थित जनसमूह के लिए एक अनूठा दृश्य प्रस्तुत करेगा। वहीं दूसरी ओर, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों को 35-35 फीट की ऊंचाई का आकार दिया गया है।
नाभा से जाखू तक झांकी, देवनृत्य और दिनभर भंडारा
शाम के समय पुतला दहन से पहले पारंपरिक रामलीला की भव्य झांकियां निकाली जाएंगी। यह सांस्कृतिक शोभायात्रा नाभा क्षेत्र से शुरू होकर पहाड़ी रास्तों से गुजरती हुई सीधे जाखू मंदिर परिसर पहुंचेगी। मंदिर प्रांगण में पूरे दिन पारंपरिक देवनृत्य की प्रस्तुतियां होंगी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय रहेगा। इसके अतिरिक्त, जाखू पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा के लिए सुबह नौ बजे से लेकर शाम छह बजे तक लगातार भंडारे का प्रबंध किया गया है। स्थानीय जिला प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुगम आवाजाही बनाए रखने के लिए पूरे शिमला शहर में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए हैं। जाखू के अलावा शिमला के नाभा, बालूगंज, संकट मोचन, न्यू शिमला और समरहिल मैदानों में भी दशहरे का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एचआरटीसी की 11 अतिरिक्त टैक्सियां
पहाड़ी पर स्थित जाखू मंदिर तक भक्तों के आसान आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अहम कदम उठाया है। विभाग ने 20 अक्तूबर के दिन विशेष तौर पर 11 अतिरिक्त टैक्सियों के संचालन का आधिकारिक आदेश जारी किया है। इन टैक्सियों में से सात टैक्सियां शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से संचालित होंगी, जबकि चार टैक्सियां नवबहार से जाखू के लिए उपलब्ध रहेंगी। इस प्रबंध से मंदिर आने वाले और दर्शन कर लौटने वाले स्थानीय नागरिकों तथा सैलानियों दोनों को यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी।
मेरठ के 20 कारीगरों ने 20 दिन की लगातार मेहनत से बनाए पुतले
इन विशालकाय पुतलों के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से विशेष शिल्पकार शिमला पहुंचे थे। कुल 20 कारीगरों के दल ने लगातार 20 दिनों तक दिन-रात मेहनत करके इन तीनों पुतलों को तैयार किया है। पुतलों का निर्माण करने वाले मुख्य कारीगर मोहम्मद अजीम ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम पिछले 20 दिनों से इस कार्य में जुटी थी और उन्होंने 45 फुट ऊंचा रावण तथा 35-35 फुट के कुंभकरण और मेघनाद के पुतले तैयार किए हैं। इन सभी पुतलों को मंगलवार सुबह 7 बजे तक जाखू मैदान में पूरी तरह खड़ा कर दिया गया था। जाखू मंदिर के प्रबंधक सुनील ने जानकारी दी कि परिसर में पहुंचने वाले तमाम श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए सभी जरूरी प्रबंध दुरुस्त कर लिए गए हैं।
पवित्र जाखू हनुमान मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित जाखू मंदिर भगवान बजरंगबली हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और पौराणिक तीर्थ स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल में जब लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में द्रोणागिरी पर्वत की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने आकाश मार्ग से उतरकर इसी जाखू पहाड़ी पर कुछ समय के लिए विश्राम किया था। आज यह स्थान न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, बल्कि पूरे देश से शिमला घूमने आने वाले सैलानियों के लिए भी प्रमुख आकर्षण स्थल बना हुआ है।


















