हाड़ौती क्षेत्र के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शुमार कोटा के दशहरा मैदान में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 को लेकर रौनक बढ़ने लगी है। नगर निगम और स्थानीय मेला प्रशासन इस पूरे आयोजन को भव्य रूप देने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं जुटाने में लगे हैं। मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, परिवारों और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक विशाल झूला परिसर विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है, जिसमें 70 से अधिक अलग-अलग श्रेणियों के रोमांचक और सामान्य झूले स्थापित किए जा रहे हैं।
विशालकाय नाव और तकनीकी कारीगरों का काम अंतिम चरण में
झूला प्रांगण में भारी क्रेनों की मदद से बड़े ढांचों को खड़ा किया जा रहा है। कुशल तकनीकी कारीगरों का दल इन झूलों की असेंबलिंग, सुरक्षा जांच और रंग-रोगन के काम को अंतिम रूप देने में जुटा है। इस बार दर्शकों के बीच सबसे बड़ा कौतूहल 145 फीट की एक विशालकाय नाव को लेकर है। इस विशाल झूले की क्षमता इतनी है कि एक ही चक्कर में 100 से लेकर 125 लोग एक साथ बैठकर झूलने का लुत्फ उठा सकेंगे। वर्षों और पीढ़ियों से इस मेले में झूले लगाने वाले संचालकों का कहना है कि वे पारंपरिक रूप से यहां अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।
मौत का कुआं, ड्रैगन ट्रेन और रोमांचक राइड्स
साहसिक और रोमांचक खेलों के शौकीनों के लिए मैदान में कई तरह की विशेष राइड्स तैयार की जा रही हैं। इनमें सुनामी, जाइंट व्हील और मिक्सर जैसे भारी झूले शामिल हैं। इसके अलावा 26 और 28 सीटों वाले मध्यम आकार के झूले भी कतार में खड़े किए जा रहे हैं। बच्चों के लिए विशेष ड्रैगन ट्रेन और टॉय ट्रेन का ट्रैक बिछाया जा रहा है, जबकि पारंपरिक स्टंट देखने वालों के लिए मौत का कुआं भी मेले का अहम हिस्सा बनेगा।
दशकों पुराने स्वाद: फालूदा, नसीराबाद का कचौरा और दूध-जलेबी
मनोरंजन के साथ-साथ इस बार का फूड बाजार भी पारंपरिक जायकों से महकने लगा है। राजस्थान समेत पड़ोसी राज्यों के प्रसिद्ध खान-पान प्रतिष्ठान यहां अपनी दुकानें सजा रहे हैं। शेरे पंजाब आइसक्रीम के संचालक सरदार तरनपाल सिंह ने बताया,
"हम पिछले 40-45 वर्षों से मेले में आ रहे हैं और कोटावासी हमारे स्पेशल फालूदा का सालभर इंतजार करते हैं।"
साल 1995 से लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे नसीराबाद के जाने-माने अग्रवाल कचौरा भंडार का स्वाद भी इस बार आगंतुकों को मिलेगा। इसके साथ ही रामपुरा की 70 साल पुरानी शम्भू जी की दुकान से ताजा दूध-जलेबी और खास लस्सी का प्रबंध भी किया गया है।
खिलौनों से लेकर बर्तनों तक के सजे विशाल बाजार
इस पूरे आयोजन को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखकर एक मुकम्मल शॉपिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में हलवाई बाजार के अलावा परिधानों का कपड़ा बाजार, बच्चों के खिलौनों की दुकानें और घरेलू बर्तनों का बहुत बड़ा बाजार लगाया जा रहा है। पूरे हाड़ौती अंचल, समूचे राजस्थान और निकटवर्ती राज्यों से हर दिन हजारों की तादाद में खरीदार और दर्शक इस ऐतिहासिक मेले में पहुंचेंगे।
























