हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर में आयोजित नवरात्रि मेले के दौरान एक दुखद सड़क दुर्घटना में कर्तव्य पर तैनात ऊना पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की जान चली गई। भरवाईं क्षेत्र में लगे भारी ट्रैफिक जाम को खुलवाने के प्रयास में वे दो बड़ी यात्री बसों के बीच आ गए, जिससे वे गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे। अस्पताल ले जाए जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। रविवार को उनके पैतृक गांव अमलेला में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
तंग रास्ते पर ट्रैफिक सुचारू कराते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा
यह दुखद घटना 17 अक्तूबर की रात की है, जब भरवाईं के एक बेहद संकरे सड़क मार्ग पर वाहनों का भारी दबाव बन गया था। माता चिंतपूर्णी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण लगे जाम को हटाने के लिए सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार स्वयं सड़क के बीच खड़े होकर वाहनों को नियंत्रित कर रहे थे। वे एक तरफ से आ रही हरियाणा रोडवेज की बस और दूसरी यात्री बस को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने का इशारा कर रहे थे। इसी दौरान दोनों वाहनों की आवाजाही के बीच अचानक वे दोनों बसों के मध्य में बुरी तरह दब गए। दुर्घटना होते ही एक बस का चालक अपना वाहन छोड़कर मौके से भाग निकला। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरियाणा रोडवेज और दूसरी निजी यात्री बस, दोनों के चालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
उपचार के दौरान तोड़ा दम
हादसे के फौरन बाद घायल अधिकारी को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिंतपूर्णी पहुंचाया गया। उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा रेफर करने का निर्णय लिया। हालांकि, रास्ते में उनकी शारीरिक हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में उन्हें दोबारा चिंतपूर्णी अस्पताल वापस लाना पड़ा। वहां उपस्थित चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
तिरंगे में लिपटी देह देख परिजनों में मचा कोहराम
कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां स्थित अमलेला गांव में रविवार के दिन जब सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी हुई पहुंची, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। घर पर मौजूद पत्नी मधु बाला, वृद्ध माता-पिता और परिजनों का विलाप देखकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें भर आईं। राजेश कुमार अपने बुजुर्ग माता-पिता, पिता रत्न चंद और माता कांता देवी के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थे, जो बेटे के वियोग में पूरी तरह बदहवास हो गए। दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही उनकी बेटी तन्वी जब पिता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची, तो तिरंगे में लिपटे पिता को देखकर वह बेसुध हो गई। स्थानीय लोग और रिश्तेदार शोक संतप्त पत्नी मधु बाला को ढांडस बंधाने का प्रयास करते रहे।
पुलिस टुकड़ी ने दी अंतिम सलामी, बेटे ने दी मुखाग्नि
अमलेला गांव के स्थानीय श्मशानघाट में रविवार को उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके बेटे गोलू ने नम आंखों और भारी मन से पिता की चिता को मुखाग्नि दी। पुलिस जिला नूरपुर की एक सशस्त्र टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर और शोक धुन बजाकर अपने जांबाज साथी को अंतिम विदाई दी। इस दुखद घड़ी में अमलेला सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी तादाद में ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी दिवंगत सब-इंस्पेक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे।



















