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हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के एंटी जैमर ड्रोन प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय से 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान मिलाहिमाचल प्रदेश
23 सित॰ 2026, 9:01 am (44 मिनट पहले)· 0

हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के एंटी जैमर ड्रोन प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय से 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान मिला

हिमाचल प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को सेना के लिए राडार और जैमर से बचने वाला ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.50 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय मंजूरी मिली है।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) के एक होनहार छात्र ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में अध्ययनरत सर्वेश शर्मा ने भारतीय थल सेना के सामने आने वाली सीमा निगरानी की जटिल चुनौतियों को हल करने के उद्देश्य से एक विशेष तकनीक पर आधारित ड्रोन डिजाइन किया है। इस मानवरहित विमान की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि यह विरोधी पक्ष के राडार की निगरानी प्रणाली से ओझल रहने में सक्षम है और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जैमर के जरिए इसके संचार तंत्र को बाधित नहीं किया जा सकता।

रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत किए 3.50 करोड़ रुपये

इस आधुनिक रक्षा समाधान को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडैक्स) की ओर से 3.50 करोड़ रुपये का विशाल अनुदान आधिकारिक रूप से मंजूर किया गया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश माहौर ने इस बजट आवंटन को अपनी औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले सर्वेश के इस रक्षा प्रोजेक्ट को मिली वित्तीय स्वीकृति ने उनके शिक्षण संस्थान और पूरे राज्य का मान बढ़ाया है।

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प्रतियोगिता के मंच से मिली समाधान खोजने की प्रेरणा

सर्वेश शर्मा की इस तकनीकी यात्रा की औपचारिक शुरुआत आईआईटी जोधपुर और भारतीय सेना की कोणार्क कोर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ओपन कार्डबोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता से हुई थी। उस प्रतिष्ठित तकनीकी आयोजन में देशभर के अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थानों से आई 50 टीमों ने भाग लिया था और अपनी नवीन अवधारणाएं प्रस्तुत की थीं। उसी मंच पर सैन्य अधिकारियों द्वारा सीमाओं पर निगरानी व्यवस्था में आने वाली तकनीकी बाधाओं और जैमिंग से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ था।

उस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वेश की टीम ने चौथा स्थान हासिल करते हुए 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार अपने नाम किया था। वहां से मिले प्रोत्साहन के बाद सर्वेश ने सीमा सुरक्षा की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना शोध कार्य शुरू किया। उन्होंने मात्र 87 हजार रुपये की बेहद सीमित लागत में प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार कर अपनी तकनीकी समझ का लोहा मनवाया।

रुद्रा एज टी-1 स्पेक्ट्रा ड्रोन की खूबियां और आईआईटी रुड़की में इनक्यूबेशन

प्रारंभिक परीक्षणों में उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद सर्वेश ने डीआईओ और आईडैक्स पहल के तहत स्टार्टअप के रूप में वित्तीय सहयोग के लिए आवेदन जमा किया था। केंद्र सरकार से औपचारिक सहमति मिलने के बाद अब वह सेना के लिए रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) नामक ड्रोन का पूर्ण विकास करेंगे। यह सैन्य उपकरण संवेदनशील सीमाओं पर गुप्त निगरानी और निगरानी डाटा एकत्र करने में निर्णायक साबित होगा, क्योंकि जैमिंग और राडार डिटेक्शन से बचाव के चलते यह सुरक्षित रूप से मिशन को अंजाम दे सकता है।

रक्षा मंत्रालय ने परियोजना से संबंधित सभी वैधानिक और तकनीकी दस्तावेज पूरे करने के लिए 20 दिन की समयसीमा निर्धारित की है। इस पूरे शोध और निर्माण कार्य के लिए देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी रुड़की में विशेष इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित किया गया है। सर्वेश आईआईटी रुड़की की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में काम करेंगे, जहां इस परियोजना को अगले 20 महीनों की अवधि में पूरा करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है।

साधारण पृष्ठभूमि और संस्थान का गौरव

सर्वेश शर्मा एक बेहद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता संजीव शर्मा आजीविका के लिए दैनिक दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। पारिवारिक विषमताओं के बावजूद सर्वेश ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर की स्कूली शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाहनवीं से पूरी की और उसके बाद हमीरपुर में तकनीकी डिप्लोमा की राह चुनी।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख समीर भारती और संस्थान के सभी प्राध्यापकों ने छात्र को बधाई दी है। शिक्षकों ने विश्वास व्यक्त किया है कि आधुनिक रक्षा नवाचार के जरिए सर्वेश भारतीय सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सवाल-जवाब

सर्वेश शर्मा कौन हैं और वे कहां पढ़ाई कर रहे हैं?
सर्वेश शर्मा हिमाचल प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं।
रक्षा मंत्रालय ने किस प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं?
यह वित्तीय सहायता भारतीय सेना के लिए राडार और जैमर से बचने वाले 'रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' नामक निगरानी ड्रोन को विकसित करने के लिए दी गई है।
इस तकनीकी परियोजना का इनक्यूबेशन कहां किया जाएगा?
इस पूरे प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर आईआईटी रुड़की की प्रयोगशाला में बनाया गया है।
ड्रोन के निर्माण और प्रोजेक्ट को पूरा करने की समयसीमा क्या तय की गई है?
प्रोजेक्ट की औपचारिकताएं 20 दिनों में पूरी होनी हैं और इसे 20 महीनों की अवधि में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
सर्वेश को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा कहां से मिली थी?
उन्हें यह प्रेरणा आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर की संयुक्त राष्ट्रीय ड्रोन प्रतियोगिता के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़ी चर्चा से मिली थी।
प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार करने में कितना खर्च आया था?
सर्वेश ने इस प्रोजेक्ट का पहला प्रोटोटाइप केवल 87 हजार रुपये की लागत में तैयार किया था।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·9 मिनट पहले

छोटे शहर के एक छात्र ने साबित कर दिया कि असली टैलेंट संसाधनों का मोहताज नहीं होता। रक्षा मंत्रालय से मिला यह फंड इस ड्रोन प्रोजेक्ट को वाकई अगले स्तर पर ले जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 मिनट पहले

रविकेश भाई, बात बिल्कुल सही है कि टैलेंट संसाधनों का मोहताज नहीं होता, पर सवाल यह है कि 87 हज़ार से सीधा साढ़े तीन करोड़ पर पहुँचने के बाद कॉलेज के छात्र के लिए इस बड़े बजट को संभालना और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना कितना आसान होगा?

Rohan Verma@rohan-verma·30 मिनट पहले

बड़ू पॉलीटेक्निक के दिनों की याद ताजा हो गई जब हम लोग छोटे-मोटे प्रोजेक्ट के लिए सर्किट जोड़ते थे। सर्वेश ने तो कमाल कर दिया, साढ़े तीन करोड़ का फंड मिलना मामूली बात नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

रोहन भाई, सर्किट जोड़ने से लेकर साढ़े तीन करोड़ के फंड तक का यह सफर वाकई बहुत बड़ी छलांग है।

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