हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान राज्य के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी का मुद्दा बेहद प्रमुखता से गूंजा। शून्यकाल की कार्रवाई के दौरान भारतीय जनता पार्टी की विधायक रीना कश्यप ने अपने विधानसभा क्षेत्र पच्छाद का मुद्दा उठाते हुए सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की दयनीय स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सदन को बताया कि दूरदराज के कई इलाकों में स्कूल बिना किसी अध्यापक के संचालित हो रहे हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके क्षेत्र के खाली पड़े पदों पर जल्द से जल्द योग्य शिक्षकों की तैनाती की जाए।
पच्छाद क्षेत्र का हाल: अभिभावक अपनी जेब से दे रहे शिक्षकों का वेतन
विधानसभा में पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए विधायक रीना कश्यप ने बताया कि उनके इलाके के 12 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई ऐसे स्कूल भी शामिल हैं जहां 40 से अधिक छात्र नामांकित हैं और नियमित पढ़ाई के लिए आते हैं। अध्यापकों के अभाव के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए स्थानीय अभिभावक स्वयं चंदा इकट्ठा करके निजी स्तर पर शिक्षकों की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि नारग क्षेत्र के छह स्कूलों और सराहन क्षेत्र के पांच स्कूलों में कोई भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके अतिरिक्त, कई वरिष्ठ माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्यों तथा प्रवक्ताओं के पद भी लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
पूरे राज्य में 150 स्कूल शिक्षक विहीन, 3500 में केवल एक अध्यापक
विधानसभा की इस चर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षकों की तैनाती से जुड़े आंकड़े सामने आए। वर्तमान में राज्य के 150 सरकारी स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन स्थिति में चल रहे हैं। इसके अलावा, 3,500 स्कूल ऐसे पाए गए हैं जहां पूरा दारोमदार केवल एक शिक्षक के कंधों पर टिका हुआ है। राज्य में स्कूली ढांचे का एक अन्य पहलू यह भी है कि 2,500 ऐसे स्कूल मौजूद हैं जहां कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या 15 से भी कम दर्ज की गई है।
शिक्षा मंत्री का स्पष्टीकरण: 1:10 का PTR और 6,500 नई नियुक्तियों का वादा
विधायक द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सदन को अवगत कराया कि हिमाचल प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) पूरे देश में सबसे बेहतर स्थिति में है। राज्य में हर 10 विद्यार्थियों पर औसतन एक शिक्षक नियुक्त है, जो 1:10 का अनुपात दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य के दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में अब भी अध्यापकों और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार युक्तिकरण प्रक्रिया के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने माना कि अध्यापकों की तैनाती के समय विभिन्न प्रकार के प्रशासनिक व अन्य दबाव आते हैं, जिसके कारण कभी-कभी तबादला और नियुक्ति आदेशों में बदलाव करना पड़ता है। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने दावा किया कि मौजूदा कार्यकाल में अब तक रिकॉर्ड 9,000 शिक्षकों के पद भरे जा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले 6,500 और शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का हस्तक्षेप और नई नीति की तैयारी
सदन में जारी इस चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एकल शिक्षक वाले स्कूलों में स्थायी अध्यापकों की नियुक्ति के लिए एक व्यापक नीति तैयार कर रही है ताकि शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल सके। मुख्यमंत्री ने सिरमौर जिले का जिक्र करते हुए कहा कि यद्यपि केंद्र सरकार ने इसे 'आकांक्षी जिला' की श्रेणी में रखा है, फिर भी यहां के प्रतिभावान छात्र राज्य की लिखित भर्ती परीक्षाओं में लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।



















