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हिमाचल प्रदेश में बंद होगी नर्सों की आउटसोर्स भर्ती, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया ऐलानहिमाचल प्रदेश
26 अग॰ 2026, 12:00 pm (3 घंटे पहले)· 1

हिमाचल प्रदेश में बंद होगी नर्सों की आउटसोर्स भर्ती, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया ऐलान

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पांचवें दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में अब नर्सों की भर्ती आउटसोर्स पर नहीं होगी। सरकार अब लिखित परीक्षा के आधार पर नियमित नियुक्तियां करेगी।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पांचवें दिन सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के साथ प्रारंभ हुई। कार्यवाही के दौरान राज्य में आउटसोर्स भर्तियों का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। इस महत्वपूर्ण चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा नीतिगत फैसला सुनाया। उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब नर्सों की भर्ती आउटसोर्सिंग के माध्यम से नहीं की जाएगी। इसके स्थान पर अभ्यर्थियों की योग्यता जांचने के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी और चयनित उम्मीदवारों को नियमित सरकारी सेवाएं दी जाएंगी।

नर्सिंग भर्ती में पारदर्शिता और नियमितीकरण पर निर्णय

सदन में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला उठाया गया। इसके साथ ही कोविड महामारी के समय सेवाएं देने वाले उन कर्मचारियों की स्थिति पर भी सवाल पूछे गए, जिन्हें बाद में काम से हटा दिया गया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संबंध में अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य में आउटसोर्स प्रणाली के तहत ठेका आधारित नियुक्तियां पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल से जारी हैं। इन भर्तियों में निजी कंपनियों और एजेंसियों के जरिए कर्मचारियों को सेवाएं देने के लिए रखा जाता है। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राज्य सरकार अब आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक समग्र और स्थाई नीति तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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विधायकों के सवाल और सरकार का स्पष्टीकरण

करसोग क्षेत्र से बीजेपी विधायक दीप राज ने उद्योग मंत्री के उस बयान को लेकर सवाल पूछा था जिसमें आउटसोर्स नियुक्तियों में सिफारिशों की बात कही गई थी। इसका उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में पदों को विज्ञापित किया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय बनाई गई एम्पैनलमेंट प्रणाली में वर्तमान प्रशासन ने केवल कुछ आवश्यक परिवर्तन किए हैं। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड काल के बाद जिन कर्मचारियों को सेवाओं से पृथक कर दिया गया था, उन्हें भी आउटसोर्स आधार पर पुन: नियुक्ति प्रदान की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसे मामलों में राजनीतिक पृष्ठभूमि या विचारधारा को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

संवैधानिक मर्यादा और मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया

चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक हंसराज ने आउटसोर्स भर्तियों की कानूनी और संवैधानिक वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि आउटसोर्स आधार पर नौकरियां देना भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है और यह नागरिकों को मिलने वाले समानता के मौलिक अधिकार का हनन करता है। हंसराज ने यह सवाल भी उठाया कि क्या इस प्रकार की अस्थायी भर्तियों में संवैधानिक आरक्षण नियमों को लागू किया जाना संभव है। इन तर्कों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि नई भर्तियों में किसी भी प्रकार की सिफारिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे मंत्री हों या विधानसभा अध्यक्ष, किसी की भी अनुशंसा पर नौकरी नहीं मिलेगी और सरकार केवल मेरिट के आधार पर ही पारदर्शी चयन सुनिश्चित करेगी।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश में नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि अब राज्य में नर्सों की आउटसोर्स भर्ती बंद होगी और लिखित परीक्षा के आधार पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने किस पूर्व नीति का उल्लेख किया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि आउटसोर्स भर्ती की नीति पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय से चली आ रही है और कर्मचारी निजी कंपनियों के जरिए लगाए जाते हैं।
बीजेपी विधायक हंसराज ने आउटसोर्स भर्तियों को लेकर क्या संवैधानिक तर्क दिया?
बीजेपी विधायक हंसराज ने कहा कि आउटसोर्स भर्ती संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है और इसमें आरक्षण लागू करना संभव नहीं है।
सरकारी भर्तियों में सिफारिशों को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या रुख अपनाया?
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि नियुक्तियों में मंत्री या विधानसभा अध्यक्ष की सिफारिश भी काम नहीं करेगी और नौकरियां केवल मैरिट के आधार पर ही दी जाएंगी।
कोविड काल के बाद हटाए गए कर्मचारियों के संबंध में क्या फैसला लिया गया है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के बाद निकाले गए कर्मचारियों को भी आउटसोर्स के आधार पर पुन: नियुक्ति प्रदान की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र में संविदात्मक अनिश्चितता को समाप्त करने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम है। आउटसोर्सिंग के बजाय लिखित परीक्षा से नियमित नियुक्तियां होने से न केवल चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि इससे समानता के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के दायरे को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि, कोविड काल के प्रभावित कर्मियों और पूर्ववर्ती नीतियों के बीच संतुलन बनाते हुए एक स्थाई नीति का क्रियान्वयन आगामी समय में सरकार के लिए सबसे बड़ी प्रशासनिक परीक्षा होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

सहकर्मी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना कानूनी और प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस बदलाव को लागू करते समय मौजूदा आउटसोर्स कर्मियों के लिए कैसी स्थाई नीति लाती है। जब भर्तियां एजेंसियों के माध्यम से होती हैं, तो अक्सर संवैधानिक आरक्षण के नियमों और श्रम कानूनों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जैसा कि सदन में भी उठाया गया। लिखित परीक्षा आधारित नियमित प्रणाली से इन कानूनी कमियों को दूर करने का अवसर मिलेगा, बशर्ते नई नीति पारदर्शी कानूनी कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरे।

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