ऑक्यूपाइड वेस्ट बैंक के मदामा गांव में एक इज़राइली सांसद द्वारा फ़िलिस्तीनी स्मारक को हथौड़े से तोड़े जाने के बाद बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। सुदूर-दक्षिणपंथी रिलिजियस ज़ायनिज़्म पार्टी के इज़राइली सांसद ज़्वी सुकोत ने सैन्य सुरक्षा के बीच इस ऐतिहासिक पत्थर के स्मारक को निशाना बनाया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद फ़िलिस्तीनी प्रशासन के साथ-साथ इज़राइल के भीतर भी विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
स्मारक को नुकसान पहुंचाने का घटनाक्रम और सेना की भूमिका
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ज़्वी सुकोत और उनके कुछ साथी मदामा गांव में स्थित पत्थर के स्मारक पर भारी हथौड़े से प्रहार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान सुकोत ने कैमरे के सामने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली किसी भी संरचना को खड़ा नहीं रहने दिया जा सकता और ऐसी जगहों को हटाया जाना अनिवार्य है।
इस पूरे मामले में इज़राइली सेना (आईडीएफ) की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सेना ने पुष्टि की है कि सांसद के दौरे के दौरान सैनिक सुरक्षा प्रदान कर रहे थे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सुकोत को इलाके के स्मारकों के दौरे की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने और उनके साथियों ने बिना किसी अनुमति के धोखे से इस घटना को अंजाम दिया। बाद में सैनिकों ने सुकोत को रोका, अपने कमांडरों को सूचित किया और पूरे समूह को मदामा गांव से बाहर निकाला।
मदामा स्मारक का इतिहास और महत्व
मदामा गांव परिषद के प्रमुख रमी नासर ने इस स्मारक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पत्थर की यादगार संरचना का निर्माण साल 2008 में कराया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य इज़राइल के साथ हुए संघर्षों में जान गंवाने वाले फ़िलिस्तीनियों की याद को संजोना था।
नासर के मुताबिक, यह स्मारक 1968 की प्रसिद्ध करामेह लड़ाई में मारे गए लोगों को समर्पित था, जो इज़राइली सेना, पीएलओ और जॉर्डन के बलों के बीच एक दिन तक चला भीषण सैन्य मुकाबला था। इसके अलावा, इसमें पहले और दूसरे इंतिफादा के दौरान अपनी जान गंवाने वाले फ़िलिस्तीनियों को भी याद किया गया था। गांव परिषद प्रमुख ने स्पष्ट किया कि यह स्मारक किसी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर संघर्ष में मारे गए सभी लोगों की याद में बनाया गया था।
इज़राइली राजनीति में बवंडर और बयानों की जंग
इस घटना ने इज़राइल के राजनीतिक गलियारों में भारी तल्खी पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर ज़्वी सुकोत के आचरण की आलोचना की है। बयान में कहा गया कि कानून को अपने हाथ में लेना, विशेषकर जन प्रतिनिधियों द्वारा, एक अनुचित आचरण है जो सेना को आतंकवाद और हिंसा से निपटने के मूल मिशन से भटकाता है।
आगामी आम चुनाव में नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइजनकोट ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की। आइजनकोट ने कहा कि जनता का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी नेता के लिए ऐसा व्यवहार शर्मनाक है। उन्होंने नेतन्याहू पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ज़्वी सुकोत जैसे अराजक तत्वों को मनमानी करने की छूट दे रही है, जिससे बस्तियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
दूसरी ओर, रिलिजियस ज़ायनिज़्म पार्टी के प्रमुख और वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने सुकोत का बचाव किया। स्मोट्रिच ने वामपंथी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी नेता आतंकवाद की निंदा करने के बजाय अपने ही सांसद की आलोचना करने में जल्दबाजी दिखा रहे हैं।
वेस्ट बैंक में बढ़ता तनाव और सैन्य नेतृत्व की चेतावनी
मदामा में हुई यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वेस्ट बैंक में तनाव चरम पर है। पिछले कुछ महीनों में फ़िलिस्तीनी इलाकों पर बसने वालों के हमलों में तेजी आई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है। मदामा गांव को भी पहले कई बार ऐसे हमलों का सामना करना पड़ा है।
क्षेत्रीय स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सैन्य नेतृत्व ने चिंता जताई है। इज़राइली मीडिया के अनुसार, वेस्ट बैंक में तैनात वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अवी बलूत ने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई एक गोपनीय बैठक में चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा की बढ़ती घटनाएं क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव को जन्म दे सकती हैं।



















