वाराणसी में चेतावनी बिंदु के करीब पहुंची गंगा नदी के जलस्तर में अब हल्की गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद तटीय इलाकों और घाटों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पवित्र नगरी काशी के सभी 84 घाट पानी में डूबे हुए हैं। सबसे अधिक असर उन गंगा पुत्रों पर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी नदी में नाव चलाने पर निर्भर है। पिछले 11 दिनों से नौका संचालन पूरी तरह बंद होने के कारण नाविकों और उनके परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
नावों के पहिए थमने से 40 हजार नाविकों की बढ़ी चिंता
अस्सी घाट पर नाव का संचालन करने वाले गोरखनाथ माझी के अनुसार, काशी के घाटों पर हर दिन नाव चलाकर करीब 40 हजार नाविक अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं। जल पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद से नाविक अपनी नावों को घाट के किनारों पर बांधकर दिन-रात उनकी सुरक्षा में लगे हैं। नौका संचालन पर अचानक लगी रोक के कारण इन परिवारों की दैनिक कमाई पूरी तरह से बंद हो गई है। 11 दिन बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि नदियां सामान्य कब होंगी और नावें दोबारा कब से चल सकेंगी।
14 अगस्त से शुरू हुआ था नदी का उफान
वाराणसी में गंगा नदी के रौद्र रूप की शुरुआत 14 अगस्त से देखने को मिली थी। मानसून के दौरान ऊपरी इलाकों से आए पानी के कारण महज दो दिनों के भीतर जलस्तर 64 मीटर के आंकड़े को पार कर गया था। नदी में बहते तेज प्रवाह और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस ने 16 अगस्त को सभी प्रकार की छोटी और बड़ी नावों के संचालन पर अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। तभी से नाविक समाज के लोग पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं।
67.68 मीटर पर स्थिर हुई गंगा, दोबारा बढ़ोतरी का भी डर
केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को बुधवार सुबह तक वाराणसी में गंगा का जलस्तर 67.68 मीटर दर्ज किया गया। वर्तमान समय में नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। वाराणसी के अलावा प्रयागराज और मिर्जापुर में भी गंगा के पानी की रफ्तार थमी है और वहां भी स्थिति स्थिर दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम के मिजाज को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में एक बार फिर इजाफा हो सकता है। नाविक राजेश साहनी का कहना है कि अगर बंद का दौर लंबे समय तक जारी रहता है, तो नाविक समाज के सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।



















