हिमाचल प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से लगातार जारी शुष्क मौसम और तेज धूप के दौर पर जल्द ही ब्रेक लगने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में मॉनसून की औपचारिक विदाई से ठीक पहले मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। आगामी दिनों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश, उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली तूफानी हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित मौसमी उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग की ओर से अलग-अलग जिलों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और जिलेवार अलर्ट
मौसम पूर्वानुमान आंकड़ों के अनुसार 24 और 26 सितंबर को प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की स्थितियां बन रही हैं। हालांकि 26 सितंबर के लिए विभाग ने विशेष रूप से येलो अलर्ट जारी किया है, जिसके तहत शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। राज्य के शेष 9 जिलों में बिना किसी औपचारिक अलर्ट के भी छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 27 सितंबर को मौसमी गतिविधियां अधिक तीव्र होने की उम्मीद है। इस दिन के लिए केवल सिरमौर जिले में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि हमीरपुर, चंबा और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। वहीं 28 सितंबर को भी सोलन, शिमला और सिरमौर जिलों में येलो अलर्ट के बीच बारिश की गतिविधि जारी रहने की संभावना है।
तापमान में दर्ज होगी भारी गिरावट
मौसम में आ रहे इस बदलाव का सीधा असर राज्य के तापमान पर भी देखने को मिलेगा। आगामी 48 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान स्थिर बना रहेगा। इसके उपरांत अगले 2 से 3 दिनों के भीतर न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट आ सकती है। दूसरी ओर, दिन के पारे में अधिक असर दिखाई देगा जहाँ अगले 4 से 5 दिनों में अधिकतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर सकता है, जिससे पूरे प्रदेश में ठंड का अहसास बढ़ जाएगा।
लाहौल स्पीति में जमने लगी बर्फ और पिछला मौसमी रिकॉर्ड
पहाड़ी इलाकों में ठंड का असर दिखने लगा है, जहाँ गुरुवार को लाहौल स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान गिरकर 4.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके विपरीत ऊना जिले में अधिकतम पारा 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक था। इससे पूर्व 17 सितंबर को कांगड़ा, चंबा, किन्नौर, कुल्लू और लाहौल स्पीति की ऊंची चोटियों पर हिमपात की पहली झलक देखी गई थी, जिसमें रोहतांग पास भी शामिल था। उस दौरान लाहौल के ड्रिलबुरी पर्वत पर बर्फबारी के कारण बढ़ी ठंड और फिसलन की चपेट में आने से दो महिलाओं की असमय जान चली गई थी।























