समुद्र में सिस्टम की स्थिति और दिशा
भारतीय मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में मौजूद डिप्रेशन बहुत जल्द एक डीप डिप्रेशन का रूप ले सकता है. यह सिस्टम पश्चिम दिशा की ओर 18 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ा है. 22 सितंबर 2026 को सुबह 8:30 बजे दर्ज आंकड़ों के आधार पर यह अक्षांश 17.9 डिग्री उत्तर और देशांतर 86.0 डिग्री पूर्व के निकट केंद्रित था.
स्थानिक दूरी के लिहाज से यह क्षेत्र ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में मौजूद है. इसके अतिरिक्त, यह आंध्र प्रदेश के कालिंगपट्टनम से 200 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, ओडिशा के पुरी से 210 किलोमीटर दक्षिण और विशाखापट्टनम से 290 किलोमीटर पूर्व की दूरी पर समुद्र में आगे बढ़ रहा है. निजी मौसम विश्लेषक एजेंसी स्काईमेट ने भी अनुमान व्यक्त किया है कि बुधवार तक यह दबाव और अधिक सघन होकर गहरे दबाव में बदल जाएगा.
तट से टकराने का समय और प्रभावित क्षेत्र
वैज्ञानिक गणनाओं के मुताबिक, यह मौसमी सिस्टम 23 सितंबर को तटीय रेखा को पार कर सकता है. अगर यह प्रक्रिया चक्रवात का रूप लेती है, तो सबसे व्यापक क्षति उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा की तटवर्ती पट्टियों में होने का अंदेशा है. इस प्रभाव का फैलाव पश्चिम बंगाल के समुद्री किनारों तक दर्ज किया जा सकता है. सिस्टम के सशक्त होने से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अत्यधिक मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है, जबकि समुद्र तटीय इलाकों में लगातार घने बादलों का डेरा रहेगा.
तटीय इलाकों में लैंडफॉल के बाद 27 सितंबर तक का समय काफी नाजुक माना जा रहा है. इस दौरान तेलंगाना, दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में निरंतर तेज बारिश के कारण जलभराव और सैलाब जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका है.
मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों पर असर
खाड़ी के इस विक्षोभ ने पहले ही देश के मैदानी और पठारी इलाकों में मानसूनी सक्रियता बढ़ा दी है. सोमवार से ही महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश के कई अंचलों में वर्षा का दौर आरंभ हो चुका है. मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि मध्य प्रदेश के पूर्वी भूभाग, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में भी भारी पानी बरस सकता है. कुछ संवेदनशील मैदानी इलाकों में स्थानीय बाढ़ आने का संकट खड़ा हो गया है.
ओडिशा में व्यापक सतर्कता के निर्देश
ओडिशा के तटीय प्रशासन को पहले से ही अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं. भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 18 सितंबर को ही सूचित कर दिया था कि समुद्र का निम्न दबाव धीरे-धीरे तीव्र होकर दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश की ओर अग्रसर होगा. 22 सितंबर से ही दक्षिणी ओडिशा के जिलों में वर्षा का जोर बढ़ने लगा है, और 25 सितंबर तक राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट प्रभावी रहेगा.























