अंबाला की बिम्पी रेखी की अनूठी पहल, चॉकलेट और साबुन के कारोबार की कमाई से संवार रहीं सैकड़ों बच्चों का भविष्यगुजरात में कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की अनोखी पहल, तीसरे बच्चे पर माता-पिता को 50,000 रुपये की एफडी और सम्मानरिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की बैठक से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ी संभावनावैश्विक युद्धों के बीच वार्ता ही समाधान, सुरक्षा परिषद के वीटो पर उठे सवालजापानी येन और वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और ट्रंप-शी बैठक पर टिकी नजरेंबैंक ऑफ इंग्लैंड की क्लेयर लोम्बार्डेली ने दी सख्त मौद्रिक नीति की चेतावनी, ऊर्जा कीमतों और मजदूरी दबाव पर नजरसंयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ के भाषण से पहले पाकिस्तान ने फिर उठाया सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दास्विस नेशनल बैंक ने नीतिगत ब्याज दर शून्य प्रतिशत पर रखी बरकरार, मुद्रा बाजार में जरूरत पड़ने पर दखल देने का रुख दोहरायाएक्सआरपी में हालिया उछाल के बाद दिखा तकनीकी सुधार, बड़े निवेशकों की लगातार खरीदारी से तेजी की उम्मीद बरकरारमजदूरी छोड़ बकरी पालन से बदली किस्मत, बिहार की चंपा देवी ने खड़ा किया खुद का कारोबार
गुजरात में कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की अनोखी पहल, तीसरे बच्चे पर माता-पिता को 50,000 रुपये की एफडी और सम्मानगुजरात
24 सित॰ 2026, 2:54 pm (1 घंटे पहले)· 2

गुजरात में कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की अनोखी पहल, तीसरे बच्चे पर माता-पिता को 50,000 रुपये की एफडी और सम्मान

दक्षिण गुजरात में घटती जनसंख्या से चिंतित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज ने तीसरा बच्चा होने पर दंपतियों को 50,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और सार्वजनिक सम्मान देने की घोषणा की है.

भारत में लंबे समय तक बढ़ती आबादी एक प्रमुख चर्चा का विषय रही और दशकों तक 'हम दो, हमारे दो' का संदेश दिया जाता रहा, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में कई परिवारों का रुझान केवल एक बच्चे तक सीमित हो गया है. इसी बीच गुजरात के एक प्रमुख समाज ने अपने समुदाय की सिकुड़ती संख्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. कच्छ कड़वा पाटीदार समाज (केकेपीएस) ने अपनी गिरती जनसंख्या दर को थामने के उद्देश्य से एक विशेष प्रोत्साहन योजना पेश की है, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर माता-पिता को 50,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी सौंपी जाएगी और उन्हें सार्वजनिक तौर पर सम्मानित भी किया जाएगा.

आबादी में गिरावट को लेकर जोनल बैठक में बनी रणनीति

यह महत्वपूर्ण निर्णय हाल ही में आयोजित दक्षिण गुजरात की जोनल बैठक के दौरान सामने आया. बैठक में मौजूद समुदाय के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने इस बात पर गंभीर मंथन किया कि नई पीढ़ी के कई युवा दंपती या तो बच्चे पैदा ही नहीं कर रहे हैं अथवा केवल एक बच्चे तक ही सीमित रह रहे हैं. समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि यही रुझान आगे भी जारी रहा, तो भविष्य में समुदाय का आकार बेहद छोटा हो जाएगा. इसी जनसांख्यिकीय संकट को टालने के लिए बड़े परिवारों को बढ़ावा देने का यह रास्ता चुना गया है.

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संतुलन बनाए रखने और युवा दंपतियों को जोड़ने की कोशिश

समुदाय के नेतृत्व का कहना है कि इस अनूठी योजना का व्यापक उद्देश्य जाति, धर्म और आयु संरचना के आधार पर पैदा हो रहे जनसांख्यिकीय असंतुलन को संतुलित करना है. केकेपीएस दक्षिण गुजरात जोन के उपाध्यक्ष जवेरीलाल रमणी ने इस पहल के पीछे की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा, “यह विचार इसलिए आया क्योंकि हमने देखा कि समुदाय के युवा या तो बच्चे पैदा नहीं कर रहे या सिर्फ एक बच्चा पैदा कर रहे हैं. एफडी के जरिए हम उन्हें ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.”

दक्षिण गुजरात में 17,000 सदस्यों की संख्या को बढ़ाने पर ध्यान

आंकड़ों के अनुसार दक्षिण गुजरात क्षेत्र में कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की मौजूदा आबादी लगभग 17,000 दर्ज की गई है, जिसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है. समुदाय के आयोजकों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर अपनी सामाजिक ताकत और पारिवारिक मजबूती को बनाए रखना है. संगठन ने उम्मीद जताई है कि 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता और सम्मान समारोह की यह व्यवस्था युवा जोड़ों को एक से अधिक बच्चे पैदा करने की दिशा में प्रेरित करेगी.

सवाल-जवाब

कच्छ कड़वा पाटीदार समाज ने क्या घोषणा की है?
समुदाय ने घोषणा की है कि तीसरा बच्चा पैदा करने वाले माता-पिता को 50,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और सार्वजनिक सम्मान दिया जाएगा.
इस योजना को शुरू करने का मुख्य कारण क्या है?
युवा दंपतियों में बच्चे न पैदा करने या केवल एक बच्चे तक सीमित रहने की प्रवृत्ति के चलते घटती आबादी को थामने के लिए यह योजना लाई गई है.
दक्षिण गुजरात में समुदाय की वर्तमान आबादी कितनी है?
समुदाय के नेताओं के अनुसार दक्षिण गुजरात क्षेत्र में कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की आबादी लगभग 17,000 है.
इस पहल की जानकारी किस बैठक में सामने आई?
यह योजना हाल ही में आयोजित दक्षिण गुजरात की जोनल बैठक में चर्चा के दौरान आधिकारिक तौर पर सामने आई.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

पचास हज़ार की एफडी से कौन बच्चा पैदा करने लगेगा भला, महंगाई ही इतनी है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात सही है कि महंगाई बहुत है, पर ऐसे कदमों से कम से कम सोच तो बदलेगी समाज की।

Rohan Verma@rohan-verma·33 मिनट पहले

कल ही हमारे पड़ोस में एक युवा जोड़ा कह रहा था कि एक बच्चा ही बहुत है, महंगाई इतनी है। गुजरात के इस समाज ने तो एकदम से उलट रास्ता पकड़ लिया है, पचास हजार की एफडी का लालच दे रहे हैं तीसरे बच्चे पर।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 मिनट पहले

रोहन भाई, बात तो सही है महंगाई बहुत है, लेकिन 50 हजार की एफडी से क्या ही खर्च निकलेगा आज के समय में!

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