हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित सरकारी बहुतकनीकी संस्थान बडू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में पढ़ने वाले छात्र सर्वेश शर्मा एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बन गए हैं। इस पूरे प्रकरण में संस्थान के अधिकारियों और जिला स्तर के प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जिन्होंने दावों की बुनियादी पड़ताल किए बिना छात्र का सम्मान तक करवा दिया था। छात्र को यह झांसा दिया गया था कि रक्षा नवाचार पहल के तहत उनके ड्रोन मॉडल के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस फर्जी स्वीकृति पत्र के बाद मामला उस वक्त पूरी तरह पलट गया जब संबंधित रक्षा संगठन ने ऐसे किसी भी अनुदान को सिरे से नकार दिया। इसी बीच छात्र अपने हॉस्टल भवन से संदिग्ध हालत में नीचे गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गए और उनका इलाज चंडीगढ़ स्थित अस्पताल में जारी है।
फर्जी दस्तावेजों और रक्षा मुहर से रची गई साजिश
जांच में यह बात सामने आई है कि जालसाजों ने बेहद शातिर तरीके से छात्र को अपने जाल में फंसाया। छात्र को डिजिटल माध्यमों से ऐसे कागजात भेजे गए जिन पर सेना के आधिकारिक चिह्न और मुहरें लगी हुई थीं। इन पत्रों में दावा किया गया था कि सेना के उपयोग हेतु विकसित किए जा रहे ड्रोन प्रोजेक्ट को रक्षा नवाचार संगठन से जुड़ी योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये का बड़ा फंड आवंटित हुआ है। जब यह दस्तावेज रक्षा नवाचार संगठन के संज्ञान में आए तो अधिकारियों ने तुरंत संस्थान से संपर्क साधा और स्पष्ट किया कि उनकी तरफ से ऐसी कोई वित्तीय मंजूरी कभी जारी ही नहीं हुई। अब जांच एजेंसियां इस बात की कड़ियां जोड़ रही हैं कि यह फर्जी संदेश किस गिरोह ने तैयार किए और छात्र तक कैसे पहुंचाए। इसके अलावा छात्र को पूर्व में आईआईटी रुड़की से मिले नकद पुरस्कार के पैसों के दुरुपयोग के कोण को भी खंगाला जा रहा है।
सत्यापन के बिना जश्न और राज्यपाल से सम्मान
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू संस्थान के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया रहा। बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या विभाग से सीधे पुष्टि किए, 23 सितंबर को संस्थान ने सार्वजनिक सूचना जारी कर दी। इसमें संस्थान के मुखिया और अध्यापकों के साथ छात्र की तस्वीरें प्रचारित की गईं। हद तो तब हो गई जब हमीरपुर के उपायुक्त कार्यालय और प्रशासनिक तंत्र ने भी दस्तावेजों की सत्यता जांचने की जहमत नहीं उठाई और छात्र को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता के हाथों औपचारिक तौर पर सम्मानित तक करवा दिया गया। एक सामान्य ईमेल या पत्र की पुष्टि किए बिना इतने बड़े मंच पर पुरस्कार दिलवाने की चूक ने अब कई अधिकारियों को जवाबदेही के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
हॉस्टल से संदिग्ध पतन और अस्पताल में उपचार
फर्जीवाड़े का सच सामने आने के बाद छात्र हॉस्टल की तीसरी मंजिल से रहस्यमयी परिस्थितियों में नीचे गिर पड़े, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गए। स्थानीय हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में प्राथमिक देखभाल के पश्चात उन्हें बुधवार 27 अक्तूबर को बेहतर चिकित्सा के लिए पीजीआई चंडीगढ़ स्थानांतरित किया गया। वहां उनके जबड़े की गंभीर चोट का ऑपरेशन निर्धारित है। इस बीच इंटरनेट मीडिया पर छात्र के संबंध में भ्रामक और दुखद अफवाहें भी तैरने लगी थीं। हमीरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार उपाध्याय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आमजन से अपील की कि वे भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें और झूठे दावे साझा न करें। पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि छात्र जीवित हैं और उपचाराधीन हैं, साथ ही प्रारंभिक आकलन में यह मामला विशुद्ध रूप से साइबर धोखाधड़ी का प्रतीत होता है।
कानूनी कार्रवाई और सामाजिक मदद
कानून प्रवर्तन एजेंसी ने इस षड्यंत्र को लेकर औपचारिक अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच दल उस कमरे की भी पड़ताल कर चुके हैं जहां छात्र रहते थे, ताकि घटनाक्रम के हर पहलू का वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाया जा सके। दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए जनप्रतिनिधि भी आगे आए हैं। भोरंज क्षेत्र के विधायक सुरेश कुमार ने अस्पताल पहुंचकर छात्र का हाल जाना और परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सौंपी। इसी क्रम में सरकाघाट क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्र शर्मा ने भी चिकित्सा केंद्र पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और सहयोग का भरोसा दिया।



















