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मंडी के गुमनाम चायवाले का कमाल, बेकार लकड़ियों से तराश रहे ऐतिहासिक इमारतों के अद्भुत मॉडलहिमाचल प्रदेश
29 अक्तू॰ 2026, 11:21 pm (1 घंटे पहले)· 1

मंडी के गुमनाम चायवाले का कमाल, बेकार लकड़ियों से तराश रहे ऐतिहासिक इमारतों के अद्भुत मॉडल

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में चाय बेचने वाले हरजिंदर सिंह अपनी कला के जरिए बेकार लकड़ियों से ऐतिहासिक इमारतों के शानदार मॉडल तैयार कर रहे हैं। पिछले 15 सालों से बिना किसी पहचान के काम कर रहे हरजिंदर को एक मॉडल बनाने में पूरा एक साल तक का समय लग जाता है।

लोग अक्सर लकड़ी के टुकड़ों और बेकार सामग्री को कचरा समझकर जला देते हैं या फेंक देते हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक चाय बेचने वाले शख्स ने इस बेकार सामग्री को अपनी बेहतरीन कलाकारी का जरिया बना लिया है। छोटी काशी के नाम से मशहूर इस शहर की पहचान अब एक अनोखे कलाकार की वजह से भी बन रही है, जो लकड़ी के वेस्ट मटेरियल से अद्भुत और बारीक मॉडल तैयार कर रहे हैं।

चाय की दुकान से कला का सफर

मंडी के जेल रोड के रहने वाले 50 वर्षीय हरजिंदर सिंह अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चाय की दुकान चलाते हैं। कई सालों से वह इसी दुकान के जरिए अपनी आजीविका कमाते आ रहे हैं। हालांकि, जब लोग उनकी इस कलाकारी के बारे में जानते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं। हरजिंदर बेकार लकड़ियों का इस्तेमाल करके ऐसी आकृतियां और मॉडल बनाते हैं, जिनकी कल्पना करना भी आम इंसान के लिए आसान नहीं होता है।

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बचपन के शौक से मिली प्रेरणा

हरजिंदर सिंह ने बताया कि उन्हें बचपन से ही कला और पेंटिंग का बहुत शौक था। हालांकि, घर की आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह अपने इस शौक को उस समय आगे नहीं बढ़ा सके। करीब 15 साल पहले उन्होंने एक वाकया देखा जब एक दोस्त के पिता को उपहार के तौर पर एक मॉडल मिला। उस मॉडल को देखने के बाद हरजिंदर के मन में उससे भी बेहतर और शानदार मॉडल बनाने की इच्छा जागी। उसी दिन से उन्होंने अपने भीतर के हुनर को तराशना और बाहर लाना शुरू कर दिया।

तैयार किए कई ऐतिहासिक मॉडल

अपनी कला की शुरुआत करते हुए हरजिंदर ने सबसे पहले अपने ही शहर मंडी के ऐतिहासिक घंटाघर का मॉडल बनाया। इसके बाद उन्होंने न सिर्फ घंटाघर बल्कि उसके आसपास की पूरी मार्केट को भी लकड़ी से हूबहू उकेर डाला। इसके अलावा वह पराशर ऋषि मंदिर, स्वर्ण मंदिर और हाल ही में जालपा माता मंदिर समेत लगभग आधा दर्जन खूबसूरत मॉडल तैयार कर चुके हैं। उनके बनाए इन मॉडलों की खासियत यह है कि वे देखने में बिल्कुल असली इमारतों जैसे प्रतीत होते हैं।

एक मॉडल को तैयार करने में लगता है एक साल

लकड़ी के इन मॉडलों को तैयार करना कोई आसान काम नहीं है। हरजिंदर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस कला में बहुत अधिक मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है। उनके अनुसार, एक सिंगल मॉडल को पूरी तरह से तैयार करने में कम से कम 6 महीने से लेकर एक साल तक का समय लग जाता है। वह अपनी चाय की दुकान पर काम करने के दौरान मिलने वाले खाली समय या दुकान बंद होने के बाद इस रचनात्मक कार्य को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते रहते हैं।

मंच और प्रोत्साहन की दरकार

पिछले 15 सालों से गुमनामी की जिंदगी जी रहे हरजिंदर को इस बात का मलाल जरूर है कि उन्हें अपने इस नायाब हुनर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करने के लिए आज तक कोई उपयुक्त मंच नहीं मिला है। उनका मानना है कि यदि उन्हें सरकार या प्रशासन की तरफ से थोड़ा भी समर्थन और प्रोत्साहन मिल जाए, तो वह अपनी इस कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की क्षमता रखते हैं।

बारीकी और सटीकता पर जोर

अगर कोई व्यक्ति हरजिंदर सिंह के बनाए गए मॉडलों को गौर से देखे, तो यह साफ नजर आता है कि वह केवल एक साधारण ढांचा खड़ा नहीं कर रहे हैं, बल्कि हर एक चीज पर बेहद बारीकी से काम करते हैं। वह किसी भी इमारत की हूबहू कॉपी तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। छोटी-छोटी डिजाइन को लकड़ी पर उकेरना और उन्हें सही आकार देना उनकी कला का मुख्य हिस्सा है। ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों को आज के समय में प्रोत्साहन की सख्त जरूरत है, ताकि वे अपनी इस कला के जरिए न सिर्फ अपनी पहचान बना सकें बल्कि अपने क्षेत्र का नाम भी पूरी दुनिया में रोशन कर सकें।

सवाल-जवाब

हरजिंदर सिंह कौन हैं?
हरजिंदर सिंह हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जेल रोड के रहने वाले 50 वर्षीय चाय विक्रेता हैं जो लकड़ी के वेस्ट मटेरियल से अद्भुत मॉडल बनाते हैं।
वह किस प्रकार की सामग्री का उपयोग करते हैं?
वह कलाकृतियां बनाने के लिए बेकार और फेंकी गई लकड़ियों (वेस्ट मटेरियल) का उपयोग करते हैं।
उन्होंने कला की शुरुआत कब और कैसे की?
बचपन से कला के शौकीन हरजिंदर ने करीब 15 साल पहले एक दोस्त के पिता को मिले उपहार मॉडल को देखकर खुद कलाकृतियां बनाने की प्रेरणा ली।
उन्होंने अब तक कौन-कौन से मुख्य मॉडल बनाए हैं?
उन्होंने मंडी का ऐतिहासिक घंटाघर और उसके आसपास की मार्केट, पराशर ऋषि मंदिर, स्वर्ण मंदिर और जालपा माता मंदिर के मॉडल बनाए हैं।
एक मॉडल को बनाने में कितना समय लगता है?
एक मॉडल को पूरी तरह से तैयार करने में कम से कम 6 महीने से एक साल तक का समय लग जाता है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

15 साल से बना रहे हैं, एक मॉडल में पूरा साल लगा देते हैं — और अभी तक कोई मंच नहीं मिला। हुनर की कमी नहीं है, बस पहचान दिलाने वाला कोई नहीं। सरकारी प्रदर्शनियाँ ऐसे ही कलाकारों के लिए होनी चाहिए, न कि सिर्फ़ बड़े नामों के लिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 मिनट पहले

Rohan भाई, बात सही है — पर सरकारी प्रदर्शनियाँ होती हैं, बस इन तक खबर पहुँचती नहीं। जिम्मेदारी थोड़ी हमारी भी है जो कवर नहीं करते।

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