पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के निवासियों और सैलानियों के लिए एक सुखद मोड़ सामने आया है, जब कांगड़ा घाटी के ऐतिहासिक नैरोगेज रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही दोबारा शुरू कर दी गई। पहले नवरात्र के पावन अवसर पर रविवार से इस ट्रैक पर पहियों की गड़गड़ाहट लौट आई। चार वर्षों से बंद पड़े इस मार्ग पर रेल तंत्र ने संरक्षा संबंधी सभी पैमानों की बारीकी से जांच की। जब ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित और संचालन के अनुकूल प्रमाणित हो गया, तब इस अस्थायी रूप से रुकी हुई जीवनरेखा को फिर से चालू करने की हरी झंडी दी गई।
हजारों मुसाफिरों और सैलानियों को सीधी कनेक्टिविटी
जम्मू मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के क्षेत्राधिकार में आने वाला यह रेलमार्ग पंजाब के पठानकोट से शुरू होकर कांगड़ा घाटी के मनमोहक नजारों के बीच मंडी जिले के जोगिंदर नगर तक पहुंचता है। ट्रेनों के दोबारा पटरी पर उतरने से स्थानीय बाशिंदों के जीवन में भारी सुगमता आ गई है। बैजनाथ, ज्वालामुखी रोड, कांगड़ा, पठानकोट और जोगिंदर नगर क्षेत्र के रोजमर्रा सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले घुमक्कड़ों को अब सीधी और किफायती यात्रा का विकल्प मिलने लगा है।
ट्रेनों का समय और चलने वाले फेरों की रूपरेखा
यातायात को व्यवस्थित ढंग से शुरू करने के लिए रेलवे ने अलग-अलग हिस्सों में कई जोड़ी गाड़ियां चलाई हैं। पठानकोट से बैजनाथ पपरोला के मध्य दो जोड़ी ट्रेनों का परिचालन तय किया गया है, जिनके नंबर 52465/52470 और 52467/52474 रखे गए हैं। प्रसिद्ध शक्तिपीठ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैजनाथ पपरोला से ज्वालामुखी रोड के बीच ट्रेन संख्या 52464/52469 का संचालन शुरू हुआ है। इसके अतिरिक्त अंतिम छोर तक निर्बाध संपर्क जोड़ने के लिए बैजनाथ पपरोला और जोगिंदर नगर के बीच गाड़ी संख्या 52473/52472 चलाई जा रही है।
बैजनाथ-पपरोला स्टेशन से प्रस्थान के समय की बात करें तो जोगेंद्रनगर जाने वाली पहली गाड़ी सुबह आठ बजे रवाना होगी। इसके उपरांत ज्वालामुखी रोड की दिशा में सुबह 10 बजे ट्रेन छूटेगी। वहीं पठानकोट की तरफ यात्रा करने वालों के लिए दोपहर के समय दो गाड़ियां उपलब्ध रहेंगी, जिनमें पहली दोपहर 2:15 बजे और दूसरी दोपहर 3:40 बजे अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करेगी।
प्रशासन की हिदायत और सुरक्षा प्राथमिकता
रेल परिचालन को व्यवस्थित रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने स्टेशनों पर पुख्ता प्रबंध किए हैं। जम्मू मंडल के जन संपर्क निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि यात्रियों की सहूलियत और संरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने मुसाफिरों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले 139 हेल्पलाइन, नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम ऐप या स्टेशन काउंटर से समय सारिणी का मिलान अवश्य कर लें ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।
चार साल तक क्यों ठप पड़ा रहा यह रूट
इस मार्ग के इतने लंबे समय तक बंद रहने की मुख्य वजह प्राकृतिक आपदा बनी थी। वर्ष 2022 के मानसूनी मौसम में हुई मूसलाधार बारिश के चलते इंदौरा क्षेत्र में स्थित चक्की नदी का महत्वपूर्ण रेल पुल बह गया था। पुल के ध्वस्त होने के बाद घाटी में रेलगाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए थे। रेल इंजीनियरों ने अथक प्रयासों और करीब 70 करोड़ रुपये के भारी बजट से इस पुल का पुनर्निर्माण पूरा किया, जिसके बाद ही पूरी लाइन पर गाड़ियों का आवागमन संभव हो पाया।
औपनिवेशिक दौर का बेजोड़ इंजीनियरिंग ढांचा और नाममात्र का किराया
पठानकोट से जोगेंद्रनगर तक फैला यह नैरोगेज नेटवर्क कुल 164 किलोमीटर लंबा है, जिसे पहाड़ी क्षेत्र की समृद्ध विरासत माना जाता है। ब्रिटिश काल के दौरान अस्तित्व में आई इस लाइन को तैयार करने में तीन साल का वक्त लगा था और उस दौर में करीब एक करोड़ 13 लाख रुपये की लागत आई थी। इस पूरे घुमावदार पहाड़ी रास्ते पर दो सुरंगे बनाई गई हैं और 950 छोटे और बड़े पुल पानी के तेज बहाव और खड्डों के ऊपर से गुजरते हैं। सबसे खास बात इस सफर का खर्च है, जहां 164 किलोमीटर की दूरी के लिए न्यूनतम किराया 10 रुपये और अधिकतम महज 35 रुपये तय है। इतने सस्ते टिकट में हिमालय की वादियों के बीच ट्रेन का सफर अब एक बार फिर हर वर्ग की पहुंच में आ गया है।




















