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कंगना रनौत के बयान पर हिमाचल में सियासी पारा चढ़ा, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने मांगा इस्तीफाहिमाचल प्रदेश
12 अक्तू॰ 2026, 8:41 am (1 घंटे पहले)· 0

कंगना रनौत के बयान पर हिमाचल में सियासी पारा चढ़ा, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने मांगा इस्तीफा

हिमाचल प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत की टिप्पणी पर तीखा पलटवार करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही नेगी ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पोस्टर विवाद और विशेष गहन पुनरीक्षण पर भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।

हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मंडी संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत के एक ताजा बयान के बाद वाकयुद्ध तेज हो गया है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने सांसद के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए सीधे तौर पर उनके इस्तीफे की मांग उठाई है। शिमला में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने सवाल किया कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को अपना ही गृह राज्य बोझ प्रतीत होता है, तो फिर संसद में उसी क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करने का कोई नैतिक आधार नहीं बचता। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मंडी लोकसभा क्षेत्र के मतदाता अब अपने चुनावी निर्णय पर अफसोस जाहिर कर रहे हैं और असलियत में खुद सांसद की बयानबाजी राज्य की गरिमा पर भारी पड़ रही है।

मंडी सांसद के रुख पर मंत्री का सीधा सवाल और इस्तीफे की मांग

जगत सिंह नेगी ने कंगना रनौत की टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जो सांसद अपने ही राज्य के प्रति इस तरह की नकारात्मक धारणा रखती हैं, उन्हें तुरंत अपने संवैधानिक पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। कैबिनेट मंत्री ने आशंका जताई कि इस प्रकार के बयानों के पीछे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कोई निर्देश हो सकता है, यद्यपि इस आरोप को लेकर उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं किए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तीखे पलटवार के बाद पहाड़ी राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच सियासी तनाव और गहरा सकता है। इस विवाद में सांसद की तरफ से औपचारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।

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रोहड़ू कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान पर स्पष्टीकरण

कंगना रनौत पर प्रहार करने के अलावा कैबिनेट मंत्री ने रोहड़ू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उठे पोस्टर विवाद पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। दरअसल, उस आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का चित्र अथवा पोस्टर न लगाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे थे। इस पर जगत सिंह नेगी ने दो टूक कहा कि वीरभद्र सिंह जैसी कद्दावर राजनीतिक शख्सियत किसी पोस्टर या प्रचार सामग्री की मोहताज नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में वीरभद्र सिंह ने राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए अनगिनत ऐतिहासिक कार्य किए हैं।

नेगी ने प्रदेश के विकास की मजबूत नींव रखने वाले संस्थापकों का स्मरण करते हुए कहा कि हिमाचल के निर्माण और प्रगति में प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का असाधारण योगदान रहा है। इन दोनों दिग्गज नेताओं ने मिलकर पहाड़ी राज्य के विकास की ठोस दिशा तय की थी। मंत्री के अनुसार, ऐसे जननेताओं की विशाल राजनीतिक विरासत और जनसेवा का आकलन किसी दीवार पर लगे पोस्टर या तस्वीर के आधार पर कभी नहीं किया जा सकता।

विशेष गहन पुनरीक्षण और केंद्र की रणनीति पर कड़ा ऐतराज

प्रेस वार्ता के दौरान जगत सिंह नेगी ने राष्ट्रीय स्तर के चुनावी और प्रशासनिक मुद्दों पर भी केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को सीधे निशाने पर लिया। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान विपक्षी नेताओं को रोके जाने की प्रशासनिक कार्रवाई को उन्होंने अघोषित आपातकाल की संज्ञा दी। कैबिनेट मंत्री ने गंभीर आरोप लगाया कि देश की राजधानी दिल्ली को एक छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया है, जहां केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ सेना के जवानों की भी तैनाती की गई है।

नेगी ने दावा किया कि केंद्र सरकार वास्तव में युवाओं के बढ़ते आक्रोश और विपक्षी एकजुटता के विरोध से भयभीत है, जिसके चलते इस प्रकार के दमनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह राजनीतिक आरोप भी मढ़ा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ लेकर पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों के चुनावों को प्रभावित करने और उन्हें जीतने की योजना तैयार की गई।

संवैधानिक मर्यादा और देश की एकता पर जताई चिंता

केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर हमला जारी रखते हुए कैबिनेट मंत्री ने अमृत काल की शब्दावली पर भी तंज कसा। जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में जिसे अमृत काल कहा जा रहा है, उसके भीतर संविधान की बुनियादी भावना को कमजोर करने का निरंतर प्रयास हो रहा है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आगाह किया कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रावधानों को इसी तरह दरकिनार किया जाता रहा, तो इससे भविष्य में देश की अखंडता और एकता पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ सकता है। राज्य के राजनीतिक मंचों पर सांसद के बयान, वीरभद्र सिंह की विरासत और राष्ट्रीय चुनावी प्रक्रिया को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में और मुखर होने की संभावना है।

सवाल-जवाब

कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने किस भाजपा सांसद के इस्तीफे की मांग की है?
जगत सिंह नेगी ने मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत के बयान पर नाराजगी जताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
कंगना रनौत के किस बयान पर विवाद खड़ा हुआ है?
कंगना रनौत द्वारा हिमाचल प्रदेश को कथित रूप से बोझ बताए जाने वाले बयान को लेकर यह राजनीतिक विवाद शुरू हुआ है।
रोहड़ू कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पोस्टर को लेकर मंत्री ने क्या कहा?
नेगी ने कहा कि वीरभद्र सिंह को किसी पोस्टर की आवश्यकता नहीं है क्योंकि राज्य के विकास में उनका योगदान किसी प्रचार सामग्री से परे है।
जगत सिंह नेगी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने विपक्षी नेताओं को रोके जाने की कार्रवाई को अघोषित आपातकाल बताया और दिल्ली को छावनी में तब्दील करने का आरोप लगाया।
नेगी ने हिमाचल के विकास में किन दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान का उल्लेख किया?
मंत्री ने डॉ. यशवंत सिंह परमार और वीरभद्र सिंह के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ने राज्य के विकास की दिशा तय की।
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टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·24 मिनट पहले

जनप्रतिनिधि को अपना ही राज्य बोझ लगने लगे तो फिर जनता ने उन्हें संसद में भेजने की गलती मान ही ली होगी। ऐसे बयानों से राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·47 मिनट पहले

कंगना पर मंत्री जी का गुस्सा तो ठीक है, पर जनता को पछतावा है या नहीं यह तो अगला चुनाव ही बताएगा। वैसे वीरभद्र सिंह के पोस्टर वाला विवाद अचानक क्यों तूल पकड़ लिया?

Arjun Mehta@arjun-mehta·47 मिनट पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं शिमला गया था, तो वहां के लोगों को वीरभद्र सिंह की बातें आज भी याद करते देखा था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

जनप्रतिनिधि अगर अपने ही राज्य को बोझ बताने लगें तो जनता का भरोसा कैसे बचेगा? क्या कंगना इस पर कोई सफाई देंगी या मामला ऐसे ही बढ़ता रहेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बात सही है आपकी, लेकिन नेगी जी ने सीधे केंद्रीय नेतृत्व पर जो बिना सबूत के आरोप लगाए हैं, वो थोड़े जल्दबाज़ी वाले लगते हैं।

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