राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को घर से बाहर निकलने वाले आम नागरिकों के लिए आवागमन की स्थिति दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। भूमिगत और उपनगरीय परिवहन नेटवर्क पर निर्भर रहने वाले मुसाफिरों को बड़ी राहत मिल गई है, क्योंकि समूची दिल्ली मेट्रो प्रणाली पर लगी बंदिशें समाप्त कर दी गई हैं। शुक्रवार देर शाम से जिन 45 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों पर कड़ा पहरा लगाकर ताले लटके हुए थे, वे अब यात्रियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी के साथ भारतीय रेल ने भी यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सप्ताहांत पर रेलगाड़ियों का संचालन अपने नियमित समय चक्र के अनुसार ही किया जाएगा। हालांकि, जिन लोगों को निजी वाहनों, टैक्सियों या बसों के सहारे नई दिल्ली अथवा मध्य दिल्ली के जमीनी रास्तों से होकर गुजरना है, उन्हें भारी जाम और नाकेबंदी की चुनौती झेलनी पड़ेगी।
भूमिगत नेटवर्क पर सामान्य हुई आवाजाही, इंटरचेंज सुविधाएं भी चालू
सार्वजनिक आवागमन के मुख्य साधन दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी डीएमआरसी ने शनिवार की रात करीब 10 बजे एक सार्वजनिक घोषणा के जरिए पूरे तंत्र को सामान्य करने की जानकारी साझा की। इस कदम के बाद नेटवर्क के सभी स्टेशनों पर यात्रियों के आने-जाने के दरवाजे सुचारू रूप से खोल दिए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन प्रमुख जंक्शनों पर एक लाइन से दूसरी लाइन में जाने की सुविधा रोक दी गई थी, वहां इंटरचेंज कॉरिडोर भी बहाल कर दिए गए हैं। सुरक्षा इंतजामों के मद्देनजर शुक्रवार रात 9 बजे से यह रोक अमल में लाई गई थी, जिससे दैनिक यात्रियों को बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था।
शुरुआती योजना के तहत दिल्ली के कुल 57 स्टेशनों पर ताले जड़ने का फैसला लिया गया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस व्यापक नाकेबंदी पर की गई सख्त टिप्पणी के पश्चात प्रशासन ने बैकफुट पर आते हुए प्रभावित स्टेशनों का दायरा घटाकर 45 तक सीमित किया था। बंद किए गए प्रमुख ठिकानों में राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ, आईटीओ, मंडी हाउस, कश्मीरी गेट तथा नई दिल्ली जैसे सबसे व्यस्त स्टेशन शामिल थे। कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को यह अंदेशा था कि प्रस्तावित जमावड़े में शामिल होने वाले लोग भूमिगत ट्रेनों का सहारा लेकर अति-संवेदनशील इलाकों की ओर कूच कर सकते हैं। अब इन सभी परिसरों को पूरी तरह खोल दिए जाने से दैनिक यात्रियों ने बड़ी राहत महसूस की है।
भारतीय रेल का आवागमन भी तय समय सारिणी के मुताबिक
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले और विभिन्न राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले रेल यात्रियों के लिए भी स्थिति अब अनुकूल हो चुकी है। रेलवे प्रशासन के अधिकारियों ने साफ किया है कि रविवार को सभी गाड़ियां अपने पूर्व निर्धारित समय के अनुरूप ही पटरियों पर दौड़ेंगी। उल्लेखनीय है कि 9 और 10 अक्टूबर को कई रेलगाड़ियों को रद्द करने के साथ-साथ उनके प्रस्थान समय में बड़े फेरबदल करने पड़े थे। रेलवे ने उस समय आई भारी दिक्कतों के लिए दोनों प्रमुख स्टेशनों के बीच की संपर्क सड़कों पर वाहनों के असामान्य दबाव और अप्रत्याशित जाम को जिम्मेदार ठहराया था। रेलवे ने सलाह दी है कि मुसाफिर घर से प्रस्थान करने से पहले आधिकारिक डिजिटल माध्यमों पर अपनी विशेष ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें, यद्यपि रविवार के दिन किसी भी प्रकार की पुरानी बंदिश लागू नहीं रखी गई है।
नई और मध्य दिल्ली के तीस चौराहों पर कड़ी निगरानी और डायवर्जन
जमीनी परिवहन के मोर्चे पर स्थिति उतनी सहज नहीं रहने वाली है। सीजेपी संगठन द्वारा बुलाए गए विरोध कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों ने मध्य और लुटियंस दिल्ली के बड़े हिस्से को छावनी में तब्दील कर रखा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार सुबह 6 बजे से ही लगभग 30 प्रमुख चौराहों और उनसे जुड़ने वाले संपर्क मार्गों पर पहरा बैठा दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई स्थानों पर अचानक वाहनों का रुख मोड़ा जा सकता है, जिससे कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर और आसपास के समूचे इलाके में भारी जाम लगना तय माना जा रहा है।
यातायात पुलिस के अनुसार जिन तीस प्रमुख मार्गों और चौराहों पर वाहनों की गति थमी रहेगी अथवा दबाव बढ़ेगा, उनमें कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं
- झंडेवालान और पंचकुइयां गोलचक्कर क्षेत्र
- मिंटो रोड तथा दीन दयाल उपाध्याय मार्ग का हिस्सा
- चेम्सफोर्ड रोड से कनॉट प्लेस आउटर सर्किल की ओर मिलने वाला टी-पॉइंट
- लोधी रोड फ्लाईओवर और नीला गुंबद गोलचक्कर का दायरा
- सरदार पटेल मार्ग तथा पंचशील मार्ग का प्रमुख चौराहा
- भीकाजी कामा प्लेस और मोती बाग फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाला मार्ग
- अशोक रोड और जंतर-मंतर रोड को जोड़ने वाला गोलचक्कर
- जय सिंह रोड तथा संसद मार्ग का चौराहा
- गोल डाकखाना और पटेल चौक का गोलचक्कर
इसके अतिरिक्त कनॉट प्लेस के बाहरी घेरे से बाराखंभा रोड और संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों पर भी वाहनों की कतारें लग सकती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जमीनी हकीकत को देखते हुए मौके पर ही तात्कालिक डायवर्जन लागू किए जाएंगे।
हवाई अड्डे, बस अड्डे और स्टेशनों की ओर जाने वाले बरतें अतिरिक्त सावधानी
जिन नागरिकों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली अथवा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन या कश्मीरी गेट व आनंद विहार जैसे अंतरराज्यीय बस अड्डों की ओर जाना है, उन्हें अपनी सामान्य योजना में बड़ा बदलाव करने की जरूरत है। तय समय से काफी पहले निकलना ही सुरक्षित विकल्प होगा, क्योंकि पुलिस बैरिकेड्स और बदले हुए रास्तों के कारण सफर में दोगुना वक्त लग सकता है। यातायात विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे जब तक कोई अपरिहार्य काम न हो, प्रभावित इलाकों की यात्रा करने से बचें। यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक माध्यमों पर अद्यतन ट्रैफिक संदेश देख लें और वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें।
सर्वोच्च अदालत में याचिकाओं पर सुनवाई, आगे की दिशा होगी तय
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कानूनी पेंच भी उलझ चुका है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इस कदर व्यापक रूप से ठप किए जाने के प्रशासनिक कदम के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में एक अवमानना याचिका लगाई गई है। अर्जी में यह सवाल उठाया गया है कि आम जनजीवन को प्रभावित करने वाली पाबंदियां लगाते समय शीर्ष अदालत के पिछले दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अचानक स्टेशन बंद करने से भारी परेशानी पैदा हुई और जनता को पहले से चेतावनी देने वाली एडवाइजरी का प्रचार-प्रसार भी नाकाफी रहा। इस मामले पर अदालत का रुख आना अभी शेष है। साथ ही शनिवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए विपक्षी दलों के नेताओं और अन्य लोगों के मामले से जुड़ी याचिका पर भी रविवार को ही सुनवाई मुकर्रर है, जिसके बाद ही राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था का अगला रुख स्पष्ट होगा।





















