मायानगरी में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की कमर तोड़ने के उद्देश्य से मुंबई पुलिस ने व्यापक स्तर पर दो दिवसीय विशेष धरपकड़ अभियान संचालित किया। 14 और 15 अक्टूबर को चलाए गए इस समन्वित अभियान का मुख्य केंद्र नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करना, लगातार अपराध में लिप्त गिरोहों पर नकेल कसना और आम जनता को नशाखोरी के दुष्प्रभावों के प्रति सतर्क करना रहा। महज अड़तालीस घंटों की इस सघन कार्रवाई के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज अधिनियम के तहत कुल 72 आपराधिक मामले दर्ज किए और 61 आरोपियों को हिरासत में लिया।
करोड़ों की नशीली सामग्री और कफ सिरप की खेप बरामद
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त राज तिलक रौशन तथा एंटी नार्कोटिक्स सेल की पुलिस उपायुक्त पूर्णिमा चौगुले ने साझा विवरण में बताया कि गिरफ्त में आए लोगों में लंबे समय से फरार चल रहे 21 वांछित अपराधी शामिल हैं। इनके अतिरिक्त एनडीपीएस मामलों से जुड़े 40 अन्य आरोपियों को भी विभिन्न इलाकों से पकड़ा गया। पुलिस टीमों ने छापेमारी के दौरान कुल 15 करोड़ 87 लाख रुपये की अनुमानित कीमत के विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधित रसायन एवं मादक पदार्थ बरामद किए।
जब्त की गई प्रतिबंधित खेप का कुल वजन 46.16 किलोग्राम आंका गया है। इसमें गांजा, हेरोइन, चरस, ब्राउन शुगर, एलएसडी पेपर, कोकीन, हशीश और हाइड्रोपोनिक गांजा जैसे घातक नशीले उत्पाद शामिल हैं। नशीले रसायनों के अतिरिक्त पुलिस ने अवैध रूप से जमा की गई कोडीनयुक्त कफ सिरप की 9,540 बोतलें भी अपने कब्जे में लीं, जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जा रहा था।
मकोका और पीआईटी एनडीपीएस के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई
संगठित नेटवर्क बनाकर नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों को सबक सिखाने के लिए पुलिस ने कठोर कानूनों का सहारा लिया है। डीसीपी राज तिलक रौशन के अनुसार, एनडीपीएस से जुड़े एक प्रकरण में पांच अभियुक्तों के विरुद्ध महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका की धाराएं लगाई गई हैं। संगठित सिंडिकेट के वित्तीय और आपराधिक आधार को खत्म करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया।
इसके साथ ही लगातार मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त एक शातिर अपराधी को प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज कानून के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि के लिए नासिक स्थित केंद्रीय कारागार में निरुद्ध कर दिया गया। पुलिस का मानना है कि ऐसे आदतन अपराधियों को जेल में अलग रखने से तस्करी के स्थानीय नेटवर्क कमजोर पड़ते हैं।
अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर और तंबाकू दुकानों पर कार्रवाई
नशे के सौदागरों के खिलाफ केवल गिरफ्तारियों तक सीमित न रहकर पुलिस ने उनके बुनियादी ढांचे पर भी प्रहार किया। जांच अधिकारियों के अनुसार, नशा कारोबारियों से ताल्लुक रखने वाले 20 आवासीय ढांचों को ध्वस्त किया गया। इसके समानांतर 145 अवैध पान और तंबाकू विक्रय केंद्रों के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की गई, ताकि शिक्षण संस्थानों और रिहायशी बस्तियों के आसपास नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता रोकी जा सके। हालांकि पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण गिराने की प्रक्रिया का कानूनी ब्योरा संबंधित सक्षम अधिकारियों के स्तर पर सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
पंडालों और आयोजनों में नौ हजार से अधिक जागरूकता सत्र
एंटी नारकोटिक्स सेल की डीसीपी पूर्णिमा चौगुले ने रेखांकित किया कि कानूनी सख्ती के साथ-साथ समाज को जागरूक बनाना भी इस मुहिम का एक अहम पहलू रहा। नवरात्रि के गरबा उत्सवों, पंडालों और गणेशोत्सव के सार्वजनिक स्थलों सहित कुल 9,031 स्थानों पर जनसंवाद और चेतना कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस व्यापक प्रयास के जरिए लगभग 1,83,108 नागरिकों को नशे की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान से आगाह किया गया।
पुलिस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। नागरिकों से पुरजोर आग्रह किया गया है कि यदि उन्हें अपने आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री, भंडारण या वितरण की कोई भी भनक लगे, तो वे तत्काल पुलिस महकमे को सूचित करें ताकि समय रहते निर्णायक कानूनी कदम उठाए जा सकें।



















