हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में पर्यावरण अनुकूल वाहनों को जोड़ने की कवायद अब धरातल पर ठोस वित्तीय और पर्यावरणीय नतीजे दिखाने लगी है। मंडी जिले के सार्वजनिक परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शामिल की गईं 25 नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय यात्रियों को शांत और सुगम सफर देने के साथ-साथ निगम के वित्तीय घाटे को पाटने में भी मददगार साबित हो रही हैं। राज्य सरकार की मंशा आने वाले पांच वर्षों के दौरान परिवहन निगम को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की है, और संचालन के शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह बदलाव परिवहन व्यवस्था की दिशा बदल रहा है। पारंपरिक ईंधन की तुलना में ऊर्जा खपत पर होने वाला खर्च प्रति किलोमीटर लगभग 12 से 13 रुपये तक कम हो चुका है, जिससे निगम के दैनिक संचालन व्यय में भारी राहत दर्ज की गई है।
मंडी जिले में महत्वपूर्ण मार्गों पर दौड़ीं नई बसें
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 17 अगस्त को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर मंडी जिले के लिए इन 25 ई-बसों के संचालन का शुभारंभ किया था। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन और डिपो प्रबंधन ने इन्हें प्रमुख अंतर-जिला मार्गों के साथ-साथ ग्रामीण व उप-शहरी संपर्कों पर तैनात कर दिया। लंबी दूरी के रूटों में मंडी से शिमला, मंडी से पालमपुर, मंडी से चंडीगढ़ तथा मंडी-शिमला-तुलाह मार्ग शामिल हैं। वहीं स्थानीय और ग्रामीण संपर्कों की बात करें तो मंडी से सुंदरनगर, मंडी से बटाहर, मंडी से तांदी, मंडी से पाली, मंडी से रोपा, मंडी से रिवालसर-नैनादेवी, मंडी से कोट, मंडी से कोटली, मंडी से माहन और मंडी से दुर्गापुर जैसे रूटों पर इन बसों ने नियमित फेरे लगाने शुरू कर दिए हैं।
यात्रियों ने सराहा शोरमुक्त और आरामदायक अनुभव
इलेक्ट्रिक बसों के सड़कों पर उतरते ही दैनिक यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही है। लंबे समय से डीजल बसों के शोर और कंपन से जूझ रहे मुसाफिरों के लिए यह सफर किसी सुखद बदलाव से कम नहीं है। मंडी के ज्वालापुर इलाके के निवासी इंद्र ठाकुर ने मंडी से शिमला तक का सफर इस बस से पूरा करने के बाद कहा, "सफर बहुत अच्छा और आरामदायक रहा। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। राज्य सरकार का यह प्रयास सराहनीय है, इसके लिए मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार।" उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण रहित सफर आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
दुर्गापुर रूट पर सफर करने वाली वंशिका जम्वाल ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सामान्य बसों की तुलना में इन नई गाड़ियों की बैठक व्यवस्था काफी आरामदायक है और यात्रा पूरी तरह थकावट मुक्त रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही अन्य ग्रामीण रूटों पर भी ऐसी ही गाड़ियां उतारेगा ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को भी आधुनिक परिवहन का लाभ मिल सके। इसी तरह तुलाह जाने वाले जसवंत कुमार ने रेखांकित किया कि केबिन के भीतर इंजन की आवाज बिल्कुल न के बराबर है, जिससे यात्रा बेहद शांत रहती है। कोटली निवासी किरण राणा ने भी सरकार के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की बेहतर बनावट से बुजुर्गों और महिलाओं के लिए लंबी यात्राएं काफी सहज हो गई हैं।
मंडी डिपो में दर्ज हुआ 11.34 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो हरित परिवहन का यह मॉडल निगम के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ है। निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के विवरण के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 से 10 सितम्बर 2026 तक के 24 दिनों में दोनों डिपो की ई-बसों का परिचालन प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। मंडी डिपो को आवंटित 15 बसों ने इस दौरान कुल 60,060 किलोमीटर का फासला तय किया। इस दूरी को पूरा करने के लिए बिजली चार्जिंग पर कुल 7,95,795 रुपये का खर्च आया। यदि इन्हीं रूटों पर निगम की पुरानी डीजल बसें चलाई जातीं, तो ईंधन पर 19,30,055 रुपये खर्च होते। इस तरह मंडी यूनिट ने ईंधन के मद में सीधे 11,34,260 रुपये की शुद्ध बचत दर्ज की है।
सुंदरनगर इकाई में भी राजस्व को मिला सहारा
यही उत्साहजनक रुझान सुंदरनगर डिपो में भी देखने को मिला, जहां 10 इलेक्ट्रिक बसों को विभिन्न रूटों पर उतारा गया था। इन 10 बसों ने 24 दिनों की समान अवधि में कुल 35,044 किलोमीटर का सफर तय किया। इस संचालन के दौरान बिजली बिल और चार्जिंग का कुल व्यय मात्र 2,10,037 रुपये रहा, जबकि डीजल इंजन से इतनी दूरी तय करने पर 10,07,732 रुपये का तेल जल जाता। नतीजतन, सुंदरनगर डिपो को भी 7,97,695 रुपये का भारी मुनाफा हासिल हुआ। दोनों इकाइयों के आंकड़ों को मिला दिया जाए तो निगम ने इस छोटी सी अवधि में कुल 19,31,955 रुपये की ऐतिहासिक बचत की है।
चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और हरित परिवहन का लक्ष्य
इलेक्ट्रिक बेड़े के निर्बाध संचालन के लिए आधारभूत ढांचे को भी तेजी से तैयार किया जा रहा है। मंडी बस स्टैंड, मंडी वर्कशॉप तथा सुंदरनगर बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जहां निर्धारित शेड्यूल के अनुसार गाड़ियों को चार्ज किया जाता है। इसके अतिरिक्त जंजैहली में भी एक नया चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है, जिसके पूरा होने पर पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में भी ई-बसों का विस्तार आसान हो जाएगा। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन घटाने का यह मॉडल हिमाचल प्रदेश को एक स्वच्छ और हरित राज्य बनाने के व्यापक संकल्प का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।



















