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शिमला के चौपाल थाने में तैनात आरक्षी ने सीनियर पर लगाया छुआछूत का आरोप, एससी-एसटी कानून में केसहिमाचल प्रदेश
23 सित॰ 2026, 12:04 pm (5 घंटे पहले)· 0

शिमला के चौपाल थाने में तैनात आरक्षी ने सीनियर पर लगाया छुआछूत का आरोप, एससी-एसटी कानून में केस

हिमाचल प्रदेश पुलिस में तैनात एक आरक्षी के साथ उसके सीनियर द्वारा जातिगत भेदभाव करने और बर्तन छूने से रोकने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में सहकर्मी के साथ जातिगत भेदभाव और छुआछूत बरतने की गंभीर घटना सामने आई है। शिमला जिले के चौपाल पुलिस थाने में पदस्थ एक आरक्षी ने अपने वरिष्ठ सहयोगी पर जाति के आधार पर अपमानित करने और मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की छानबीन शुरू कर दी है।

ड्यूटी पर तैनाती के पहले दिन ही जाति पूछने का आरोप

पीड़ित आरक्षी राजेश कुमार ने चौपाल के थाना प्रभारी को दी गई अपनी लिखित शिकायत में पूरे मामले का सिलसिलेवार विवरण दिया है। शिकायत पत्र के अनुसार, राजेश कुमार की ड्यूटी 27 जुलाई से बिरेंद्रा देवी की सुरक्षा गार्ड के तौर पर लगाई गई थी। पीड़ित का कहना है कि सुरक्षा गार्ड के इंचार्ज पद पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार ने ड्यूटी के पहले दिन ही उससे उसकी जाति के बारे में पूछताछ की। जैसे ही राकेश कुमार को यह पता चला कि वह दलित समुदाय से ताल्लुक रखता है, उसने तुरंत छुआछूत भरा व्यवहार दिखाना शुरू कर दिया।

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धार्मिक मान्यता की आड़ में भोजन के बर्तन छूने से रोका

शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार ने खुद को महासू देवता का गूर बताया। उसने आरक्षी से कहा कि गूर होने के नाते उसे कई तरह के नियमों और परहेजों का पालन करना होता है। इसके बाद आरोपी ने दलित आरक्षी को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि वह खाने-पीने के बर्तनों को बिल्कुल न छुए, अन्यथा उसका देवता खुद ही इस बात को देख लेगा। गार्ड रूम के भीतर खाना पकाने और पानी पीने के बर्तनों से दूर रहने का दबाव बनाए जाने से पीड़ित को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

सितंबर महीने में भी दोहराया गया भेदभावपूर्ण बर्ताव

आरक्षी राजेश कुमार के अनुसार, भेदभाव की यह प्रवृत्ति पहली घटना के बाद भी जारी रही। जब 11 सितंबर को उसी सुरक्षा दल में उसकी दोबारा तैनाती की गई, तब हेड कॉन्स्टेबल ने फिर से उसके साथ छुआछूत और अपमानजनक व्यवहार किया। इसके बाद 13 सितंबर को भी भोजन को लेकर दोबारा जातिगत टिप्पणी की गई और अनुचित आचरण दोहराया गया।

फोन रिकॉर्डिंग का दावा और कानूनी कार्रवाई

पीड़ित आरक्षी ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया है कि उसके पास अपने मोबाइल फोन में इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें आरोपी द्वारा जाति पूछने और भेदभाव करने की बात स्वीकार की गई है। चौपाल थाना पुलिस ने इस औपचारिक शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जारी है।

सवाल-जवाब

यह मामला किस पुलिस थाने और जिले से संबंधित है?
यह मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल पुलिस थाने में सामने आया है।
शिकायतकर्ता और आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम क्या हैं?
शिकायतकर्ता आरक्षी का नाम राजेश कुमार है और आरोपी हेड कॉन्स्टेबल का नाम राकेश कुमार है।
पीड़ित आरक्षी को भोजन के बर्तन छूने से क्यों रोका गया?
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल ने खुद को महासू देवता का गूर बताते हुए कथित धार्मिक परहेज का हवाला दिया और दलित आरक्षी को बर्तन छूने से मना किया।
पीड़ित आरक्षी की तैनाती किस सुरक्षा ड्यूटी में थी?
पीड़ित आरक्षी 27 जुलाई से बिरेंद्रा देवी की सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था।
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ किन कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है?
पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·4 घंटे पहले

पुलिस विभाग के अंदर ही ऐसी सोच होना बहुत डरावना है। क्या आरोपी सीनियर के खिलाफ पहले भी कभी ऐसी शिकायतें आई थीं?

Ravikash Gupta@ravikash·4 घंटे पहले

पुलिस विभाग जैसी जगह पर ऐसी सोच होना बहुत शर्मनाक है। वर्दी पहनने के बाद भी अगर इंसान की जाति ही दिखती है, तो कानून और सुरक्षा व्यवस्था का क्या मतलब रह गया?

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 घंटे पहले

रविकाश जी, बात बिल्कुल सही है आपकी। पर सोचता हूँ कि क्या महसू देवता के गूर होने का यह दावा कानून के सामने टिकेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 घंटे पहले

वर्दी के अंदर ही अगर ऐसा भेदभाव होने लगे और बर्तनों तक को लेकर रोक-टोक की जाए, तो फिर आम आदमी को न्याय की उम्मीद कहां से मिलेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·5 घंटे पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, जब पुलिस विभाग के भीतर ही ऐसा सलूक होगा, तो आम इंसान की तो सुनवाई दूर की बात है।

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