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होमवर्क में मदद के बावजूद युवा पीढ़ी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ता अविश्वासपड़ताल
11 अक्तू॰ 2026, 2:37 am (20 दिन पहले)· 3

होमवर्क में मदद के बावजूद युवा पीढ़ी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ता अविश्वास

चार साल में चैटबॉट्स के तेजी से फैलने के बाद भी कई टीनेजर्स एआई कंटेंट और उसके सामाजिक नुकसान को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।

स्कूल का काम निपटाने या डिजिटल बातचीत के लिए चैटबॉट्स का इस्तेमाल करने के बावजूद कई किशोर अब इस पूरी तकनीक से दूरी बनाने लगे हैं। पिछले चार वर्षों में जब से ये टूल्स आम लोगों के बीच पहुंचे और कंपनियों ने इनके प्रचार पर भारी जोर दिया, तब से युवाओं के बीच लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को लेकर संदेह गहराने लगा है। तकनीक का उपयोग करने वाले कई छात्र भी जनरेटिव कंटेंट को पसंद करने के बजाय उससे चिढ़ते नजर आते हैं।

युवाओं के बदलते नजरिए और आंकड़े

बाजार अनुसंधान फर्म वाईपल्स के अनुसार, 13 से 17 साल के 37 फीसदी किशोरों को एआई से बने संगीत और वीडियो असहज कर देते हैं। इसी अध्ययन में सामने आया कि आधे से अधिक टीनेजर्स गलत सूचनाओं और डीपफेक को लेकर गहरी चिंता में हैं। इस आयु वर्ग में तकनीक को लेकर दृष्टिकोण में एक दिलचस्प विरोधाभास दिखता है। अमेरिका में ज्यादातर किशोर चैटबॉट्स इस्तेमाल करने की बात मानते हैं, लेकिन उनके भीतर इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं है।

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प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई किशोर यह तो मानते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर यह तकनीक उनके काम आ सकती है, लेकिन इसी समूह के एक-चौथाई से अधिक युवाओं का मानना है कि अगले 20 वर्षों में समाज पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। ये युवा नौकरियों के खत्म होने, सोचने-समझने की क्षमता घटने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव जैसी वजहों को लेकर चिंतित हैं।

तकनीक थोपने पर नाराजगी और भविष्य की चिंता

आमतौर पर युवा किसी भी नए गैजेट या डिजिटल बदलाव को तुरंत अपना लेते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो में संचार की प्रोफेसर मेलानी ग्रीन के अनुसार इस बार स्थिति अलग है। पारंपरिक तौर पर किसी नई तकनीक से बड़े-बुजुर्ग डरते थे, मगर यहां बच्चे खुद इस बात से नाराज हैं कि बड़ी टेक कंपनियां और वयस्क उन पर इसे जबरन थोप रहे हैं। प्रोफेसर ग्रीन के अनुसार, युवा यह भली-भांति समझते हैं कि इस तकनीकी बदलाव से जो भी उथल-पुथल मचेगी, उसका सबसे बड़ा खामियाजा उन्हीं की पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा।

इसी वजह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस असंतोष की चर्चा दिखने लगी है। ब्लूस्काई पर माता-पिता अपने बच्चों के इस अविश्वास की कहानियां साझा कर रहे हैं, जहां कई बच्चे किसी बनावटी या खराब चीज को सीधे एआई कह देते हैं। वहीं रेडिट पर शिक्षक बता रहे हैं कि पढ़ाई में इसका सहारा लेने वाले छात्र भी इसके गंभीर परिणामों से डरे हुए हैं और कंप्यूटर से बनने वाली कला को बिल्कुल पसंद नहीं करते।

सवाल-जवाब

वाईपल्स के अनुसार कितने किशोर एआई कंटेंट को नापसंद करते हैं?
वाईपल्स के अनुसार, 13 से 17 वर्ष के 37 फीसदी किशोर एआई से बने संगीत और वीडियो देखकर असहज महसूस करते हैं।
प्यू रिसर्च में समाज पर इस तकनीक के असर को लेकर क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार एक-चौथाई से अधिक किशोरों का मानना है कि अगले 20 वर्षों में समाज पर इस तकनीक का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
युवाओं को किन प्रमुख बातों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता है?
युवा मुख्य रूप से नौकरियों के जाने, सोचने-समझने की क्षमता कम होने, पर्यावरणीय नुकसान और डीपफेक को लेकर चिंतित हैं।
प्रोफेसर मेलानी ग्रीन के अनुसार यह तकनीकी बदलाव पुरानी तकनीकों से अलग क्यों है?
उनका कहना है कि इस बार विरोध बुजुर्गों की तरफ से नहीं है, बल्कि युवा खुद कंपनियों द्वारा तकनीक थोपे जाने और भविष्य के नुकसान को लेकर नाराज हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·20 दिन पहले

कल ही मेरी बेटी ने मेरे बनाए खाने की तस्वीर देखकर उसे बनावटी एआई बोल दिया। सच में, बच्चों में अब इन सब चीजों को लेकर बहुत अविश्वास बढ़ गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

बच्चे खुद समझदार हैं, उन्हें जबरदस्ती कोई तकनीक थमाओगे तो वे चिढ़ेंगे ही।

Nyra Kaif@nyra-kaif·20 दिन पहले

रोहन, बात सिर्फ़ जबरदस्ती की नहीं है। दिक्कत यह है कि यही बच्चे होमवर्क में धड़ल्ले से एआई का इस्तेमाल भी कर रहे हैं और फिर उसी पर चिढ़ भी रहे हैं।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·20 दिन पहले

बड़ों को लगता है बच्चे तकनीक से खुश हैं, पर यहाँ तो वे खुद इसे जबरन थोपे जाने से परेशान दिख रहे हैं।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·20 दिन पहले

आयेशा जी, बिल्कुल सही कहा आपने। पर क्या वाकई आने वाले समय में ये युवा इस तकनीक को पूरी तरह नकार पाएंगे या मजबूरी में अपनाना पड़ेगा?

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