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अमेरिका में 'सॉवरेन बेबी' ट्रेंड का बढ़ता क्रेज, सरकारी कागजातों के बिना बच्चों को पालने के दावे और इसके गहरे कानूनी खतरेपड़ताल
28 अक्तू॰ 2026, 1:12 am (9 मिनट पहले)· 0

अमेरिका में 'सॉवरेन बेबी' ट्रेंड का बढ़ता क्रेज, सरकारी कागजातों के बिना बच्चों को पालने के दावे और इसके गहरे कानूनी खतरे

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अमेरिका में नए माता-पिता को बिना जन्म प्रमाण पत्र और सोशल सिक्योरिटी नंबर के बच्चों को पालने की सलाह दे रहे हैं। 'सॉवरेन बेबी' नाम के इस ट्रेंड में भारी रकम वसूल कर अवैध सरकारी छूट के वादे बेचे जा रहे हैं, जिससे बच्चों का भविष्य गंभीर कानूनी संकट में पड़ रहा है।

दुनिया भर में बिना किसी सरकारी पहचान पत्र या जन्म प्रमाण पत्र के यात्रा करने का दावा करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का एक नया वर्ग अमेरिका में तेजी से उभर रहा है। अमेरिका में जन्मे बच्चों को बिना जन्म प्रमाण पत्र या सोशल सिक्योरिटी नंबर के बड़ा करने की यह वकालत 'सॉवरेन सिटीजन' यानी संप्रभु नागरिक आंदोलन का एक डिजिटल विस्तार बन चुकी है। इस आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि उन पर अमेरिकी कानून लागू नहीं होते। सोशल मीडिया पर 'सॉवरेन बेबी' हैशटैग के जरिए प्रचार करने वाली इन्फ्लुएंसर ला हारगो का दावा है कि बच्चों को एक सफल, यात्रा करने योग्य और पूरी तरह से सक्षम इंसान बनाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। अपने दो छोटे बच्चों का पंजीकरण न कराकर, वे उन्हें संप्रभु बच्चा मानती हैं और वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों का उपयोग करती हैं।

ला हारगो अपनी कंपनी वीडा रिवाइवल के माध्यम से नए और भावी माता-पिता को एक प्रीमियम कंसीयज सेवा बेचती हैं। उनका मानना है कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाना बच्चों को अमेरिकी कॉर्पोरेशन के अधिकार क्षेत्र में सौंपने के बराबर है। यद्यपि अमेरिका में एंटी-गवर्नमेंट यानी सरकार विरोधी कार्यकर्ताओं का यह समूह दशकों से मौजूद है, जहां लोग टैक्स न देने, बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने और यहां तक कि टेरी निकोल्स जैसे मामलों में घरेलू आतंकवाद जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, लेकिन अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा वैकल्पिक पासपोर्ट और 'सॉवरेन बेबी' के विचार को डिजिटल रूप में बेचना इस विचारधारा का एक नया व्यावसायिक रूप बन गया है।

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डिजिटल कोर्स, परामर्श पैकेज और सोशल मीडिया का कारोबार

सरकारी नियमों को दरकिनार करने का यह ज्ञान अब एक लाभदायक व्यवसाय में बदल चुका है। ला हारगो 497 डॉलर में एक ऐसा पैकेज बेचती हैं, जिसमें वीडियो और टेम्पलेट दिए जाते हैं। इनके जरिए माता-पिता को नागरिकता के बजाय 'राष्ट्रीयता' के आधार पर बच्चों के पासपोर्ट प्राप्त करने और सरकारी एजेंटों से बातचीत के दौरान आत्मविश्वास से जवाब देने के निर्देश दिए जाते हैं। जो माता-पिता अधिक व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहते हैं, वे 997 डॉलर का पैकेज खरीदते हैं, जिसमें ला हारगो स्वयं उन्हें इस प्रक्रिया से गुजरने में मदद करती हैं। ला हारगो का दावा है कि उन्होंने अब तक 1,000 से अधिक माता-पिता को अपने बच्चों के लिए ऐसे वैकल्पिक पासपोर्ट दिलाने में मदद की है।

इसी तरह, इंस्टाग्राम पर 1,25,000 फॉलोअर्स रखने वाली 'फैमिली लीगेसी आर्किटेक्ट' मिनिस्टर डियोन अपने प्रशंसकों को बताती हैं कि बच्चे का पंजीकरण कराने से वे राज्य के अधीन हो जाते हैं। वे नॉन-सिटीजन नेशनल पासपोर्ट हासिल करने के लिए 'स्टेटस करेक्शन फास्टट्रैक बंडल' 555 डॉलर तक में बेचती हैं। ला हारगो एक एफिलिएट प्रोग्राम भी चलाती हैं, जिसमें उनके पैकेज बेचने वालों को 15 से 20 प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाता है।

कोविड-19 महामारी और होम स्कूलिंग से बढ़ी कट्टरता

अमेरिका में वर्तमान में कितने 'सॉवरेन बेबी' रह रहे हैं, इसका सटीक आंकड़ा जुटाना लगभग असंभव है, क्योंकि उनके माता-पिता किसी भी सरकारी रिकॉर्ड का विरोध करते हैं। हालांकि, एक आम अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 1,00,000 से 3,00,000 लोग खुद को संप्रभु नागरिक मानते हैं। पश्चिमी न्यूयॉर्क के पारिवारिक कानून वकील एडम बोजक का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। जहां पहले साल में एकाध मामला आता था, वहीं अब हर साल आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। बोजक इसे कोविड-19 महामारी के दौरान पैदा हुए सामाजिक और भावनात्मक अलगाव का दुष्परिणाम मानते हैं, जिसने लोगों में यह भावना भर दी कि हर व्यक्ति को केवल अपने बारे में सोचना चाहिए।

कोविड के दौर में रिमोट लर्निंग ने स्कूली शिक्षा का ढांचा भी बदल दिया। नेशनल होम एजुकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2003 में जहां 1.4 मिलियन बच्चे होम स्कूलिंग करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 3.4 मिलियन हो चुकी है। कोएलिशन फॉर रिस्पॉन्सिबल होम एजुकेशन की कार्यकारी निदेशक टेस अल्रे का कहना है कि होम स्कूलिंग की आड़ में कई माता-पिता इस संप्रभु विचारधारा के शिकार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपनी मर्जी के मालिक हैं और सरकार को उन पर नजर रखने का कोई अधिकार नहीं है।

ला हारगो जैसे इन्फ्लुएंसर्स पारंपरिक शिक्षा प्रणाली का खुलकर विरोध करते हैं। 'बॉर्न फ्री मेथड' पॉडकास्ट पर ला हारगो ने तर्क दिया कि अमेरिकी स्कूल प्रणाली एक सरकारी साजिश का हिस्सा है, जो जन्म प्रमाण पत्र के जरिए बच्चों को अनुबंध में बांधकर महज एक मजदूर या कार्यबल बनाती है। इसके साथ ही 'वर्ल्ड स्कूलिंग' यानी किताबों के बजाय यात्रा के जरिए बच्चों को पढ़ाने का चलन भी इस आंदोलन से जुड़ गया है। साउथ कैरोलिना की डोला जेमिला मूर अपने चार बच्चों और साथी के साथ घुमंतू जीवन जीती हैं। उनके तीन सबसे छोटे बच्चों का न तो जन्म प्रमाण पत्र है और न ही सोशल सिक्योरिटी नंबर। मूर का मानना है कि किताबों में पढ़ने के बजाय दुनिया को सीधे देखकर सीखना बच्चों के विकास के लिए बेहतर है।

कानूनी वास्तविकता और 'स्ट्रॉ मैन थ्योरी' का छलावा

भले ही ये माता-पिता सरकारी कागजातों से बचना चाहते हैं, लेकिन वे अमेरिकी पासपोर्ट के फायदे भी उठाना चाहते हैं। नॉर्थ कैरोलिना के सलाहकार रॉब फिंच, जो पुलिस अधिकारियों को संप्रभु नागरिकों से निपटने का प्रशिक्षण देते हैं, कहते हैं कि यह विचारधारा पूरी तरह से तथ्यहीन है और अवसरवादी लोग बिना कागजात के बच्चों को रखने के भ्रामक तरीके बेचकर पैसे कमा रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का चेतावनी भरा मानना है कि जन्म प्रमाण पत्र और सोशल सिक्योरिटी नंबर के बिना ये बच्चे बड़े होकर गाड़ी चलाने, नौकरी पाने, बैंक खाता खोलने या मकान किराए पर लेने में पूरी तरह असमर्थ हो जाएंगे।

सॉवरेन सिटीजन आंदोलन का एक प्रमुख आधार 'स्ट्रॉ मैन थ्योरी' है। इसके समर्थकों का मानना है कि 1930 के दशक में जब राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने स्वर्ण मानक हटाया और जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य किए, तब सरकार ने हर नागरिक के नाम पर एक कॉर्पोरेट खाता खोल दिया। इस सिद्धांत के अनुसार, सरकार अमेरिकी कर्ज को चुकाने के लिए नागरिकों को संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करती है। संप्रभु नागरिक मानते हैं कि एक व्यक्ति की दो पहचान होती हैं—एक कानूनी इकाई जिस पर कानून लागू होता है, और एक वह खुद जिस पर कोई कानून लागू नहीं होता। हालांकि, पारिवारिक कानून के वकील क्रिस्टोफर सी. मेलचर स्पष्ट करते हैं कि अमेरिकी अदालतों ने कभी भी इस तर्क को स्वीकार नहीं किया है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।

ऐतिहासिक जड़ें और पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया

आधुनिक संप्रभु नागरिक आंदोलन की जड़ें 1970 के दशक के नस्लवादी और यहूदी-विरोधी समूह 'पॉसे कॉमिटैटस' से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना दक्षिणी कैलिफोर्निया में पूर्व सेना अधिकारी विलियम पॉटर गेल ने की थी। कृषि संकट के दौरान यह विचारधारा पूरे अमेरिका में फैल गई। बाद में इसके कई गुट बने, जिनमें से एक 'अमेरिकन स्टेट नेशनल' है। यह समूह खुद को नस्लवादी अतीत से अलग बताता है, लेकिन उनका दावा है कि वे नॉन-सिटीजन नेशनल पासपोर्ट हासिल कर सकते हैं जो उन्हें सीमित राजनयिक छूट प्रदान करता है।

अमेरिकी विदेश विभाग को पासपोर्ट जारी करने के लिए नागरिकता के प्राथमिक प्रमाण (जैसे जन्म प्रमाण पत्र) की आवश्यकता होती है। इसके न होने पर माध्यमिक साक्ष्य जैसे बपतिस्मा रिकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड, जनगणना रिकॉर्ड या पारिवारिक बाइबिल में दर्ज जन्म तिथियां स्वीकार की जाती हैं। टेक्सास की डेबोरा नामक महिला, जिसने 2,000 डॉलर से अधिक के ट्रैफिक चालान के बाद इस विचारधारा को अपनाया, ने बताया कि उसने अपने बच्चे के लिए बिना जन्म प्रमाण पत्र के बपतिस्मा रिकॉर्ड, पारिवारिक बाइबिल, समाचार पत्र में घोषणा और एक हलफनामे के जरिए सफलतापूर्वक पासपोर्ट प्राप्त कर लिया।

फ्री बर्थ आंदोलन और स्वास्थ्य संबंधी खतरे

हवाई के जंगल में खेती करने वाली ज़ोई ड्यूरेंट ने 2021 में अपनी बेटी के जन्म के समय किसी डॉक्टर की मदद नहीं ली। जब पासपोर्ट कार्यालय ने जन्म प्रमाण पत्र मांगा, तो उन्होंने टब में बच्चे के जन्म की तस्वीर भेज दी और लगभग छह महीने में पासपोर्ट प्राप्त कर लिया। ड्यूरेंट ने 'ऑप्टिंग आउट' नाम से एक किताब भी लिखी है, जो 20 डॉलर में बिकती है। इसमें चाइल्ड प्रोटेक्टिव सर्विसेज से निपटने के तरीके बताए गए हैं।

यह रुझान 'फ्री बर्थ' यानी बिना किसी मेडिकल सहायता के बच्चे को जन्म देने के आंदोलन से भी गहराई से जुड़ा है। अमेरिका में 2004 की तुलना में 2024 में फ्री बर्थ के मामलों में तीन गुना वृद्धि हुई है और यह कुल जन्मों का 1.5 प्रतिशत हो चुका है। ला हारगो और मैरीस विस्टा जैसी इन्फ्लुएंसर्स फ्री बर्थ का जमकर प्रचार करती हैं। 34 वर्षीय मैरीस विस्टा अब 'ला सोवरेन मेर' ब्रांड के तहत 44 डॉलर में 'स्पिरिट बेबी' गाइड और 5,555 डॉलर में 'सॉवरेन कन्सेप्शन प्रोग्राम' बेचती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टरी देखरेख के बच्चे को जन्म देना बेहद खतरनाक है और इससे मां तथा शिशु दोनों की मौत का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है।

पीड़ितों की आपबीती: कागजातों के बिना जीवन का संघर्ष

इस विचारधारा के शिकार बच्चों के वयस्क होने पर जो परेशानियां आती हैं, उसकी बानगी टाउनसेंड की कहानी में मिलती है। टाउनसेंड की मां ने संप्रभु नागरिक विचारों से प्रभावित होकर उनका जन्म प्रमाण पत्र और सोशल सिक्योरिटी नंबर नहीं बनवाया। 5 साल की उम्र में जब टाउनसेंड को स्कूल भेजा गया, तो उन्हें जूता बांधना तक नहीं आता था और बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे। उनके पिता ने छिपकर उन्हें टीके लगवाए।

जब टाउनसेंड 16 साल की हुईं, तो उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस देने से मना कर दिया गया। 18 साल की उम्र में वे स्वास्थ्य बीमा नहीं ले सकीं। 22 साल की उम्र में जब उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया, तो उनके बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र को दो बार खारिज कर दिया गया क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में टाउनसेंड के अस्तित्व का ही कोई प्रमाण नहीं था। टाउनसेंड का कहना है कि बिना सरकारी कागजातों के एक सामान्य वयस्क जीवन जीना नामुमकिन है, और उन्हें जीवन भर यह अहसास कराया जाता है कि वे किसी की सनक का शिकार बनी हैं।

सवाल-जवाब

'सॉवरेन बेबी' आंदोलन क्या है?
यह एक ऐसा ट्रेंड है जहां माता-पिता सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बहकावे में आकर अपने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र या सोशल सिक्योरिटी नंबर नहीं बनवाते और उन्हें सरकारी व्यवस्था से बाहर पालने का दावा करते हैं।
क्या बिना जन्म प्रमाण पत्र के अमेरिकी पासपोर्ट मिल सकता है?
अमेरिकी विदेश विभाग प्राथमिक दस्तावेज न होने पर बपतिस्मा रिकॉर्ड या पारिवारिक बाइबिल जैसे माध्यमिक साक्ष्य मांगता है, लेकिन यह प्रक्रिया बेहद कठिन है और कोई पूर्ण छूट नहीं देती।
क्या अमेरिकी अदालतें 'सॉवरेन सिटीजन' के तर्कों को स्वीकार करती हैं?
नहीं, अमेरिकी अदालतों ने संप्रभु नागरिकों की 'स्ट्रॉ मैन थ्योरी' या कानून से छूट के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
बिना कागजात के बड़े होने वाले बच्चों को क्या नुकसान होता है?
ऐसे बच्चे बड़े होकर कानूनी रूप से गाड़ी नहीं चला सकते, नौकरी नहीं पा सकते, बैंक खाता नहीं खोल सकते, और न ही स्वास्थ्य बीमा या घर किराए पर ले सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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