दुनिया के कई ताकतवर मुल्कों में अचानक आपातकालीन जीवन रक्षक सामग्री जुटाने की भारी कवायद शुरू हो गई है। ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ के तमाम देश अपने नागरिकों को राशन, पीने का पानी, बैकअप बिजली और जरूरी दवाइयां घरों में सुरक्षित रखने के निर्देश जारी कर रहे हैं। सरकारों की तरफ से जारी इन दिशा निर्देशों ने आम नागरिकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पर्दे के पीछे किसी बड़े वैश्विक संकट की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। सैन्य स्तर पर भी रणनीतिक अड्डों को बाहरी सहायता के बिना कई महीनों तक संचालित रखने की अभूतपूर्व योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं।
ब्रिटेन में बी रेडी अभियान और तीन दिनों की आपात तैयारी
ब्रिटेन की सरकार ने 22 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से 'बी रेडी' नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के लिए तैयार की गई आधिकारिक वेबसाइट पर नागरिकों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि किसी भी बड़ी आपदा या हमले की स्थिति में बचाव दलों के पहुंचने तक घरों में कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिनों का जरूरी सामान मौजूद होना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि विषम परिस्थितियों में राहत और बचाव दल हर जगह एक ही समय पर नहीं पहुंच सकते, इसलिए शुरुआती तीन दिन नागरिकों को खुद अपनी सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों का प्रबंध करना होगा।
ब्रिटिश नागरिकों को जारी की गई आधिकारिक सूची में प्रत्येक व्यक्ति के लिए 9 लीटर पीने का पानी, तीन दिनों तक चलने वाला सूखा राशन, टार्च, अतिरिक्त बैटरियां, प्राथमिक उपचार किट, नकदी, पावर बैंक, प्रसाधन सामग्री, कंबल, जरूरी पहचान पत्रों की फोटोकॉपी और एक पारंपरिक रेडियो शामिल है। ब्रिटिश प्रशासन का मानना है कि आधुनिक डिजिटल नेटवर्क ठप होने पर रेडियो ही सूचनाओं के आदान प्रदान का सबसे भरोसेमंद जरिया साबित होगा।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने इस रणनीति का बचाव करते हुए चेतावनी दी है कि दुश्मन देशों के संभावित हमले हमारे रोजमर्रा के बुनियादी ढांचे को तहस नहस कर सकते हैं। वेस स्ट्रीटिंग ने कहा, "ये खतरे अब काल्पनिक नहीं रहे, वे वास्तविक हैं।" सरकार का स्पष्ट मानना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं, आतंकवादी घटनाएं या युद्ध जैसे गंभीर हालात अब सिर्फ दूरगामी आशंकाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि वे एक ठोस वास्तविकता का रूप ले चुकी हैं।
अमेरिकी सेना का फोर्ट्रेस प्लान और 90 दिनों की आत्मनिर्भरता
संयुक्त राज्य अमेरिका में रक्षा विभाग का मुख्यालय पेंटागन अपने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों को इस तरह ढाल रहा है कि वे बिना किसी बाहरी आपूर्ति के पूरे 90 दिनों तक लगातार काम कर सकें। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 30 सितंबर को 'फोर्ट्रेस' नाम की इस महायोजना को हरी झंडी दिखाई। फोर्ट्रेस का शाब्दिक अर्थ किला होता है, और इस योजना का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सैन्य छावनियों को अभेद्य किलों में तब्दील करना है ताकि मुख्य शहरों या नागरिक बिजली ग्रिड के तबाह होने पर भी सैन्य अभियान न रुकें।
इस योजना के तहत अमेरिकी सैन्य बेस अपनी बिजली खुद पैदा करेंगे। युद्ध के समय यदि शहरी ग्रिड, तेल रिफाइनरियां या जल संस्थान पूरी तरह नष्ट भी हो जाएं, तो भी सैन्य ठिकाने बिना किसी बाहरी ईंधन या ग्रिड बिजली के निरंतर चलते रहेंगे। इसके अतिरिक्त, सैन्य अड्डों पर ऐसे स्वतंत्र जल शोधन संयंत्र और संचार तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं जो इंटरनेट या राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति के ठप होने पर भी सुरक्षित उपग्रहों और विशेष फ्रिक्वेंसी के जरिए काम करते रहें।
पेंटागन गोला बारूद, अहम खनिजों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सैन्य कलपुर्जों और जीवन रक्षक दवाओं का भारी सामरिक भंडार तैयार कर रहा है। रसद आपूर्ति में किसी भी रुकावट से बचने के लिए एक सख्त नियम लागू किया गया है, जिसके अनुसार हर महत्वपूर्ण सैन्य सामान के कम से कम दो स्वतंत्र आपूर्तिकर्ता या निर्माता होने अनिवार्य हैं। यदि युद्ध या प्रतिबंधों के कारण एक कंपनी उत्पादन बंद कर दे, तो दूसरी कंपनी से तत्काल आपूर्ति जारी रखी जा सकेगी। नागरिक सुरक्षा के स्तर पर अमेरिका ने 17 नवंबर को अपने पूरे देश में आपातकालीन चेतावनी प्रणाली का व्यापक परीक्षण करने का फैसला किया है।
जापान और यूरोप में बंकरों से लेकर अनाज भंडारण तक की तैयारी
एशिया में जापान की सरकार ने भी अपने नागरिकों से घरों में तीन से सात दिनों का भोजन और पानी अनिवार्य रूप से रखने की अपील की है। 2 नवंबर को इस संबंध में औपचारिक घोषणा की जा रही है। जापान में प्राकृतिक आपदाओं, भयानक भूकंपों और ज्वालामुखी विस्फोटों की आशंका तो हमेशा बनी रहती है, लेकिन हाल के क्षेत्रीय भू राजनीतिक तनावों ने इन चेतावनियों को बेहद गंभीर बना दिया है। जापान के आपदा प्रबंधन मंत्री गोशी होसोनो ने जनता से अपील की कि वे अपने घरों में भोजन, पानी, शौचालय का जरूरी सामान और आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहेज कर रखें ताकि सरकारी इमदाद के बिना भी संकट के शुरुआती दिन गुजारे जा सकें।
यूरोपीय संघ ने पिछले साल ही 'प्रिपेयर्डनेस यूनियन स्ट्रैटेजी' को अंगीकार किया था। इस नीति के तहत पूरे यूरोप के आम नागरिकों को किसी भी आपात झटके के बाद शुरुआती 72 घंटे तक आत्मनिर्भर रहने के लिए मानसिक और भौतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। यूरोप के अलग अलग देश अपनी ऐतिहासिक प्राथमिकताओं के आधार पर कदम उठा रहे हैं। फिनलैंड ने देश के नागरिकों के लिए पूरे नौ महीने के अनाज का रणनीतिक भंडार जमा कर लिया है। स्वीडन ने अपनी रक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण तेज कर दिया है।
रूस की सीमाओं से सटे पोलैंड, फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे देशों ने अपने भूमिगत बंकरों और शरणस्थलों की मरम्मत पूरी कर ली है और नागरिकों को नियमित रूप से आपातकालीन बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आयरलैंड ने भी अगस्त 2026 में 'बी इमरजेंसी रेडी' नामक अभियान की शुरुआत करके नागरिकों से घरों में पानी और खाद्य सामग्री सहेजने को कहा है। आयरलैंड में लोगों को यह भी सिखाया जा रहा है कि संकट के समय बिजली और गैस कनेक्शन कैसे बंद करें, माचिस और लाइटर का सुरक्षित स्टॉक कैसे रखें, और जरूरी दस्तावेजों को मजबूत प्लास्टिक बैग में कैसे सुरक्षित करें।
युद्ध की आशंका और 1000 दिनों का अंतिम समय
इन तैयारियों के पीछे सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में तेजी से सुलगते युद्ध के अंगारे हैं। 24 अक्टूबर को ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने नाटो गठबंधन के देशों को सचेत करते हुए कहा कि रूस लगातार हाइब्रिड युद्ध को तेज कर रहा है। उनके मुताबिक वर्ष 2030 तक विरोधी ताकतों की अर्थव्यवस्थाएं और हथियार इतने सक्षम हो जाएंगे कि वे खुला हमला बोल सकें। उन्होंने कड़े शब्दों में चेताया कि हमारे पास युद्ध लड़ने और जीतने की तैयारी के लिए सिर्फ 1000 दिनों का वक्त बचा है।
ब्रिटिश सेना के पूर्व प्रमुख जनरल सर पैट्रिक सैंडर्स भी लगातार आगाह कर रहे हैं कि मौजूदा वैश्विक माहौल शीत युद्ध के दौर से भी कहीं ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। जुलाई 2025 में पैट्रिक सैंडर्स ने कहा था कि रूस के साथ सीधे टकराव की तैयारी के लिए ब्रिटेन के पास पांच साल से भी कम का समय है, और देश को तत्काल बंकर बनाने तथा अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों में भारी निवेश करने की जरूरत है। नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भी आगाह किया है कि यूक्रेन के बाद रूस का अगला निशाना यूरोप हो सकता है, इसलिए पुरानी लड़ाइयों जैसे भीषण संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।
उधर डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में बार बार चेतावनी दी है कि यदि इस संघर्ष को जल्द नहीं रोका गया तो यह तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर संकेत दिए हैं कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। अमेरिकी सेना इसकी रूपरेखा तैयार कर रही है। खाड़ी देशों को कूटनीतिक और सैन्य सूत्रों के जरिए यह संदेश दे दिया गया है कि वे ईरान के खिलाफ एक तेज और सीमित सैन्य अभियान के लिए तैयार रहें। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य अड्डों पर अतिरिक्त सैनिक, 20 युद्धपोत, पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणालियां और लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध भड़कने का खतरा मंडरा रहा है।
साइबर खतरे, एआई युद्ध और ठप होते बुनियादी ढांचे
पारंपरिक हथियारों के अलावा आधुनिक तकनीकों ने भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से जापान के आसपास ऐसी गंभीर सुरक्षा स्थिति कभी नहीं देखी गई। चीन को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यूक्रेन जैसा संकट कभी भी पूर्वी एशिया में जन्म ले सकता है, खासकर तब जब रूस और चीन की जुगलबंदी मजबूत हो रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ड्रोन, सटीक मार करने वाली मिसाइलें और साइबर तकनीकें किसी भी देश के नागरिक ढांचे को पंगु बना सकती हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यूरोप और फ्रांस के खिलाफ हाइब्रिड हमलों का खतरा बहुत बढ़ गया है, जिसमें हवाई क्षेत्र और सूचना तंत्रों में घुसपैठ शामिल है। फ्रांस और जर्मनी दोनों अपने नागरिकों को बड़े साइबर हमलों के लिए तैयार रहने को कह रहे हैं।
तकनीकी मोर्चे पर हुई तीन हालिया घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। पहली घटना में पीएचपी प्रोग्रामिंग भाषा में एक तकनीकी खामी सामने आने के बाद ब्रिटेन की 32 सरकारी वेबसाइटों को अचानक बंद करना पड़ा। नीदरलैंड, फिनलैंड और फ्रांस में भी इसी तरह की आपात स्थिति देखी गई, जबकि दुनिया की 70 प्रतिशत वेबसाइटें इसी भाषा पर निर्भर हैं। दूसरी घटना में वर्ष 2026 के दौरान आर्कटिक समुद्री क्षेत्र में रूसी पनडुब्बियों को समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट केबलों को निष्क्रिय करने की कोशिश करते पकड़ा गया, जिसे ब्रिटेन, नॉर्वे और अमेरिका ने मिलकर रोका। तीसरी घटना फ्रांस में हुई, जहां 12 अक्टूबर को हैकरों ने सैकड़ों सुपरमार्केट के फ्रीजरों का रिमोट कंट्रोल हासिल करके उनका तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा दिया, जिससे भारी खाद्य सामग्री नष्ट हो गई।
शीत युद्ध का नया दौर और बेकाबू तकनीक
दुनिया भर में हिंसक टकरावों पर नजर रखने वाली संस्था एसीएलईडी के अनुसार इस समय धरती के 10 अलग अलग क्षेत्रों में युद्ध जैसी भयानक स्थितियां बनी हुई हैं। पिछले साल दुनिया भर में औसतन रोजाना 550 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। सूडान और म्यांमार में गृहयुद्ध के हालात हैं, जबकि यमन, सोमालिया, कांगो और नाइजीरिया में लगातार खूनी संघर्ष चल रहा है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने दिसंबर 2025 में रूस की रणनीति की तुलना हिटलर से करते हुए कहा था कि अगर यूक्रेन हार गया तो पुतिन वहीं रुकने वाले नहीं हैं। मध्य पूर्व में इज़रायल, गाजा और लेबनान के बीच का तनाव कभी भी यूरोपीय ताकतों को अपनी चपेट में ले सकता है। उधर ताइवान पर चीनी दावे को लेकर जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने साफ कहा है कि चीन के हमले की स्थिति में जापान चुप नहीं बैठेगा, जिसमें अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी कूद सकते हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक हेरिटेज फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार आज चीन और रूस की धुरी सोवियत संघ के चरम दौर से भी कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यह गठबंधन अमेरिकी प्रभुत्व वाले वैश्विक तंत्र को पूरी तरह बदल देना चाहता है। दूसरी तरफ युद्ध में बिना किसी वैश्विक नियम कायदे के कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बढ़ रहा है। यूक्रेन ने कमजोर सेना होने के बावजूद सैटेलाइट नेविगेशन और एआई ड्रोन के दम पर रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अनियंत्रित तकनीकी होड़ पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि दुनिया उस लक्ष्मण रेखा के बेहद करीब पहुंच चुकी है जहां इंसानी नियंत्रण के बिना मशीनें खुद इंसानों को निशाना बनाने लगेंगी।



















