पाकिस्तान के शेखुपुरा शहर में आयोजित एक सभा के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद के बेटे तलहा सईद ने भारत के खिलाफ बेहद उकसावे वाला भाषण दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे 2 मिनट 5 सेकेंड के एक वीडियो में तलहा ने भारत पर 500 वर्षों तक मुस्लिम शासन होने की बात कही और नई दिल्ली के खिलाफ सशस्त्र जिहाद को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया। इसके साथ ही उसने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को कुरान का हाफिज और धार्मिक निष्ठा से परिपूर्ण नेतृत्वकर्ता बताते हुए उनकी खुले तौर पर सराहना की है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, आंतरिक अशांति और क्षेत्रीय मोर्चों पर भारी दबाव का सामना कर रहा है।
वायरल वीडियो में तलहा सईद की मुख्य बातें
सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से देखे जा रहे इस संक्षिप्त वीडियो में तलहा सईद तीन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित नजर आ रहा है। उसने भारत के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस स्थान पर सदियों तक मुस्लिम शासकों का नियंत्रण रहा, वहां से आज पाकिस्तान के खिलाफ बयानबाजी की जा रही है। ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए उसने भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर पुराने अधिकार का दावा पेश किया।
अपने संबोधन में उसने जिहादी अभियानों को निरंतर जारी रखने का ऐलान किया। उसने कहा कि जब तक उनके पास बल और संकल्प मौजूद है, तब तक वे इस रास्ते पर बलिदान देते रहेंगे। इसके अलावा, उसने पाकिस्तानी सेना के शीर्ष कमांडर की प्रशंसा करते हुए कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि पाकिस्तान को ऐसा सैन्य प्रमुख मिला है जो धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान रखता है और जिसने जिहाद की भावना को पुनः जीवित किया है। तलहा के अनुसार, सैन्य बैठकों में सेना प्रमुख के शब्द धार्मिक विश्वास और प्रतिबद्धता की याद दिलाते हैं। इससे पूर्व भी सिंधु जल संधि को निलंबित करने के मुद्दे पर तलहा ने भारत के प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए पानी रोकने पर सांसें रोकने जैसी गीदड़भभकी दी थी।
कौन है तलहा सईद और लश्कर में उसकी भूमिका
मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकी हमलों के मुख्य सूत्रधार हाफिज सईद का पुत्र तलहा सईद वर्तमान में लाहौर में निवास करता है। लश्कर-ए-तैयबा के संगठनात्मक ढांचे में उसे हाफिज के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि वह आने वाले समय में इस प्रतिबंधित आतंकी संगठन कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले सकता है।
तलहा का जन्म 25 अक्टूबर 1975 को हुआ था। जब वर्ष 1987 में लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना हुई, तब मात्र 12 वर्ष की आयु में ही आतंकी अब्दुल रहमान मक्की की देखरेख में उसका प्रशिक्षण प्रारंभ हो गया था। वर्ष 2000 के बाद जब हाफिज सईद ने स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश करने और राजनीतिक आवरण ओढ़ने का प्रयास किया, तब संगठन के भीतर तलहा का कद और जिम्मेदारियां काफी बढ़ा दी गईं।
वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के उपरांत जब हाफिज सईद अपनी संलिप्तता से इनकार कर रहा था, उस समय तलहा ने मीडिया और जनसंपर्क के मोर्चे पर संगठन के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया। वह डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीतियों का भी विशेषज्ञ माना जाता है। भारत के गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार, तलहा पाक अधिकृत कश्मीर से भारत विरोधी आतंकी साजिशों को अंजाम देता है। वह नए कैडरों की भर्ती, वित्तीय संसाधनों के संकलन, हमलों की योजना और भारत के साथ-साथ अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में लिप्त रहा है।
भारतीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2022 में उसे आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी उसे आतंकी सूची में शामिल किया हुआ है, हालांकि चीन द्वारा वीटो का प्रयोग किए जाने के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ की वैश्विक आतंकी सूची में उसका नाम दर्ज नहीं हो सका। वर्ष 2019 में हाफिज सईद की गिरफ्तारी के बाद तलहा अधिक सक्रिय होकर सामने आया। उसी वर्ष वह एक बम विस्फोट में बाल-बाल बचा था। वर्ष 2024 के पाकिस्तान आम चुनावों में हाफिज सईद की पार्टी 'पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग' (पीएमएमएल) के बैनर तले उसने लाहौर की एनए-127 सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के प्रत्याशी के हाथों पराजय झेलनी पड़ी थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसने लश्कर में शिक्षित युवाओं की भर्ती का अभियान चलाया है और वह मस्जिदों, मदरसों तथा इंटरनेट के माध्यम से युवाओं को आतंकवाद और राजनीति का प्रशिक्षण दे रहा है।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तारीफ के पीछे की वजह
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का पृष्ठभूमि पारंपरिक सैन्य अधिकारियों से भिन्न रही है। उन्होंने सातवीं कक्षा तक मदरसे में शिक्षा प्राप्त की और कुरान को कंठस्थ किया। सेना में शीर्ष पद पर पहुंचने के बाद भी वे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते रहे हैं और अपने सार्वजनिक भाषणों में अक्सर उनका संदर्भ देते हैं। 16 अप्रैल 2025 को पहलगाम घटना से ठीक छह दिन पहले दिए गए एक भाषण में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक आधार पर अंतर बताते हुए कहा था कि पाकिस्तान के लोग हर दृष्टिकोण से हिंदुओं से अलग हैं।
पाकिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत रहे अजय बिसारिया के अनुसार, आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं कर रही, बल्कि एक धार्मिक विचारधारा का संरक्षण कर रही है। सेना धार्मिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दे रही है और उसे कट्टरपंथी धर्मगुरुओं का पूरा समर्थन प्राप्त है। वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के समय आसिम मुनीर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख पद पर तैनात थे। उन्होंने अप्रैल 2025 में कश्मीर को पाकिस्तान की मुख्य नस बताते हुए कड़ा रुख अपनाया था। भारत के साथ शांति वार्ता के प्रश्न पर मुनीर का मानना है कि जब तक भारत पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है।
वर्ष 2025 में भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। सितंबर 2025 में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मसूद इल्यास कश्मीरी ने खुलासा किया था कि जनरल मुनीर ने सैन्य अधिकारियों को मारे गए आतंकियों के जनाजे में शामिल होने के निर्देश दिए थे। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वरिष्ठ विशेषज्ञ सुशांत सरीन का कहना है कि वर्दी में मौजूद आसिम मुनीर की सोच जिहादी विचारधारा से प्रेरित है और वे हाफिज सईद जैसे आतंकी गुटों को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत के हमलों में तबाह हुए लश्कर और जैश के ठिकाने अब पुनः सक्रिय हो चुके हैं। पाकिस्तान सरकार ने इनके पुनर्निर्माण के लिए ₹50 करोड़ का कोष तय किया था, जिसे मुनीर की सिफारिश पर सैन्य कल्याण निधि से स्थानांतरित कर ₹100 करोड़ कर दिया गया। इसके अलावा, मारे गए 15 आतंकियों के परिवारों के लिए ₹10 करोड़ की सहायता राशि की घोषणा की गई थी।
तनावपूर्ण समय में बयानबाजी का महत्व
तलहा सईद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान चार प्रमुख आंतरिक संकटों से जूझ रहा है
- बलुचिस्तान में हिंसा: बलुचिस्तान स्वतंत्रता की मांग को लेकर अशांत है, जहां बीएलए द्वारा सेना पर निरंतर हमले किए जा रहे हैं। वहां स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दुर्लभ खनिज परियोजना पर काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को अपना कारखाना बंद करके वापस जाना पड़ा।
- खैबर पख्तूनख्वा में अस्थिरता: पिछले चार वर्षों के दौरान खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
- पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नागरिक असंतोष: पीओके में स्थानीय नागरिक अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर हैं, जिन्हें दबाने के लिए सेना और पुलिस बल प्रयोग कर रही है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जून और जुलाई के बीच 67 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
- चरमराती अर्थव्यवस्था: पाकिस्तान पर वर्तमान में लगभग 81 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज है, जिसमें से 23 लाख करोड़ रुपये विदेशी ऋण है। वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 31% की गिरावट आई है। देश में 5.9 करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हैं और 29% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है।
सामरिक विश्लेषक सुशांत सरीन के अनुसार, तलहा सईद के इस बयान के पीछे दो मुख्य रणनीतिक कारण हैं। पहला, पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और जन आक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए भारत के खिलाफ नया तनाव पैदा कर सकता है। दूसरा, वह सिंधु जल संधि के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोबारा उठाने की कोशिश में है, जिसके लिए तलहा सईद जैसे मोहरों के माध्यम से कट्टरपंथी आख्यान तैयार किया जा रहा है।
भारत सरकार का रुख और सामरिक रणनीति
भारत सरकार ने तलहा सईद के इस ताजा बयान पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी जारी नहीं की है। अतीत में भी भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तानी आतंकियों के इस तरह के बयानों को तवज्जो नहीं दी जाती रही है। हालांकि, भारत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट कर चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और पाकिस्तान द्वारा समर्थित किसी भी दुस्साहस या आतंकी हमले को 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा। विशेषज्ञ सुशांत सरीन का मानना है कि भारत इस समय पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत का करारा जवाब देने के लिए तैयार है।



















