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शी जिनपिंग के स्वागत में प्रोटोकॉल तोड़ेंगे डोनाल्ड ट्रंप: दुर्लभ खनिजों और ताइवान पर सौदेबाजी के बीच 11 साल बाद अमेरिकी दौरापड़ताल
23 सित॰ 2026, 9:19 pm (4 घंटे पहले)· 0

शी जिनपिंग के स्वागत में प्रोटोकॉल तोड़ेंगे डोनाल्ड ट्रंप: दुर्लभ खनिजों और ताइवान पर सौदेबाजी के बीच 11 साल बाद अमेरिकी दौरा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ग्यारह साल बाद होने जा रहे ऐतिहासिक अमेरिकी दौरे पर डोनाल्ड ट्रंप खुद हवाईअड्डे जाकर उनका स्वागत करेंगे। दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, टैरिफ छूट और ताइवान के जटिल मुद्दों पर केंद्रित इस शिखर वार्ता के कूटनीतिक निहितार्थों की विस्तृत पड़ताल।

अमेरिकी धरती पर ग्यारह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी चीनी राष्ट्राध्यक्ष के कदम पड़ने जा रहे हैं, लेकिन इस बार का कूटनीतिक माहौल पारंपरिक प्रोटोकॉल से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने अतीत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ तीखी बहस की, जापान के प्रधानमंत्री के प्रति उपेक्षापूर्ण रुख अपनाया और भारत के प्रधानमंत्री पर भी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस दौरे से पहले अप्रत्याशित रूप से नरम और सम्मानजनक मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी बानगी यह है कि वाशिंगटन डीसी स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज पर भारतीय समयानुसार 23 और 24 सितंबर की दरमियानी रात 1 बजे के बाद जब शी जिनपिंग का विमान उतरेगा, तब डोनाल्ड ट्रंप स्वयं रनवे पर खड़े होकर उनकी अगवानी करेंगे। दशकों पुरानी अमेरिकी परंपरा यह रही है कि विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बैठक के लिए व्हाइट हाउस आते हैं, न कि राष्ट्रपति खुद हवाईअड्डे जाकर उनका स्वागत करते हैं। हालांकि अगस्त 2025 में ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अलास्का के एक एयरफील्ड में स्वागत किया था, लेकिन वह एक निष्पक्ष स्थल पर आयोजित विशेष बैठक थी, कोई औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं थी। इस बार प्रोटोकॉल को दरकिनार किया जाना मात्र शिष्टाचार नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन में बीजिंग के गहरे प्रभाव का एक स्पष्ट कूटनीतिक संकेत है।

व्हाइट हाउस में 21 तोपों की सलामी और तकनीकी दिग्गजों की मौजूदगी

शी जिनपिंग के इस तीन दिवसीय दौरे का मुख्य औपचारिक कार्यक्रम 24 सितंबर को व्हाइट हाउस के प्रांगण में आयोजित होगा। यहां चीनी राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी, जबकि 479 अमेरिकी सैन्यकर्मी विशेष 'प्रेसिडेंशियल सैल्यूट' प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान मरीन बैंड दोनों देशों के राष्ट्रगान की धुन बजाएगा, वहीं आकाश में चार एफ-22 रैप्टर्स और एक बी-2 बॉम्बर जेट फ्लाईओवर कर अपनी सलामी देंगे। उसी शाम व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के सम्मान में एक भव्य राजकीय रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा। इस रात्रिभोज में अमेरिकी कॉरपोरेट और तकनीकी जगत की सबसे प्रभावशाली हस्तियां शरीक होंगी, जिनमें एलन मस्क, जेफ बेजोस, सुंदर पिचाई, टिम कुक और सैम ऑल्टमैन शामिल हैं। अगले दिन यानी 25 सितंबर की सुबह शी जिनपिंग और पेंग लियुआन, डोनाल्ड ट्रंप तथा प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के साथ सुबह की चाय पर चर्चा करेंगे। इसके बाद दोनों नेता नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेंगे। इस पूरे दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत मुख्य रूप से तीन बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित रहेगी, जिनमें व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी और ताइवान की सुरक्षा स्थिति शामिल हैं। 25 सितंबर की शाम तक शी जिनपिंग अपनी यह यात्रा पूरी कर वापस रवाना हो जाएंगे।

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दुर्लभ खनिज, मध्यावधि चुनाव और चार मुख्य अमेरिकी शर्तें

व्हाइट हाउस द्वारा शी जिनपिंग के स्वागत में बिछाए जा रहे इस लाल कालीन के पीछे केवल कूटनीतिक सद्भाव नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक और सामरिक मजबूरियां छिपी हुई हैं। बीते साल जब ट्रंप ने चीन और भारत सहित 90 देशों पर नए टैरिफ थोपे, तो बीजिंग ने भी जवाबी शुल्क लगाकर व्यापारिक मोर्चा खोल दिया था। दोनों देशों के बीच छिड़े इस टैरिफ युद्ध के कारण जहां व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ, वहीं जरूरी सामान की वैश्विक आपूर्ति भी ठप होने लगी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जहां 'ट्रेड ट्रूस' यानी व्यापारिक संघर्षविराम पर सहमति बनी। इस दौरान कृषि उत्पादों, महत्वपूर्ण खनिजों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अस्थायी समझौते किए गए। समझौते के तहत चीन ने दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ मिनरल्स) पर लगाए जाने वाले अपने निर्यात प्रतिबंधों को एक साल के लिए टाल दिया था, जिसकी मियाद अब 10 नवंबर को खत्म होने वाली है। अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता यही है कि इन दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे, क्योंकि अमेरिका विदेशों से जितने दुर्लभ खनिज खरीदता है, उसका 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से आता है। यदि चीन ने इस आपूर्ति श्रृंखला को रोक दिया, तो अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग, हथियार निर्माण, एयरोस्पेस उपकरण और संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की गति अचानक बेहद धीमी पड़ जाएगी।

दूसरी बड़ी मांग गैर-संवेदनशील व्यापारिक उत्पादों पर शुल्क छूट से जुड़ी हुई है। मई 2026 में हुए बीजिंग शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' नामक एक नई व्यवस्था स्थापित करने पर विचार किया था और '30 फॉर 30' के प्रारूप पर सहमति जताई थी। इसके तहत दोनों देश जूते, कपड़े, रसोई के बर्तन और कृषि उत्पादों जैसे लगभग 30 अरब डॉलर मूल्य के गैर-रणनीतिक सामानों पर एक-दूसरे को टैरिफ में रियायत देने पर सहमत हुए थे। वाशिंगटन चाहता है कि यह रियायत केवल चाकू, बेलन, नोटबुक और बोर्ड गेम्स जैसे बुनियादी उपभोक्ता सामानों तक ही सीमित रहे, जबकि बीजिंग की मांग है कि इसमें सेमीकंडक्टर्स, एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीकी उत्पादों को भी शामिल किया जाए। तीसरी मजबूरी अमेरिकी घरेलू राजनीति से प्रेरित है। मई के बीजिंग दौरे के बाद व्हाइट हाउस ने दावा किया था कि 200 बोइंग विमानों के सौदे के साथ-साथ चीन 2026 से 2028 तक अमेरिका से सालाना 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदेगा। हालांकि चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोयाबीन का नाम लिए बिना केवल कृषि व्यापार और विमान खरीद बढ़ाने की सामान्य बात कही थी। ट्रंप पर अब इस बात का भारी दबाव है कि वे इस सौदे को अमलीजामा पहनाएं, ताकि पिछले साल चीन के साथ रहे 202 अरब डॉलर के भारी-भरकम व्यापार घाटे को कम किया जा सके और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सके।

चौथा बड़ा पहलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के सामने एक विशेष 'एआई हॉटलाइन' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि यदि एआई के परीक्षण अथवा विकास के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा होता है, तो दोनों देश तुरंत एक-दूसरे को सूचित कर सकें। यह चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि हाल ही में एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों के कई वरिष्ठ कर्मचारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। उनका तर्क था कि एआई का विकास बिना किसी नियंत्रण के आगे बढ़ रहा है, जिससे समूची मानवता के लिए जोखिम पैदा हो गया है और इसकी रफ्तार पर लगाम लगाना आवश्यक है। इस मुद्दे पर 20 सितंबर को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच विस्तृत चर्चा भी हुई, लेकिन चीन ने अभी तक इस हॉटलाइन के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के चीनी व्यापार विशेषज्ञ स्कॉट कैनेडी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन को यह उम्मीद थी कि टैरिफ के एकतरफा भारी दबाव के आगे चीन झुक जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस वर्ष चीन के निर्यात में 28 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते वार्ताओं की मेज पर शी जिनपिंग की स्थिति ट्रंप की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी नजर आ रही है।

ताइवान और वैश्विक व्यापार संतुलन पर चीन की तीन रणनीतिक शर्तें

अमेरिकी पाबंदियों और भारी टैरिफ के बावजूद चीन का व्यापार अधिशेष लगातार दूसरे वर्ष 1 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने की दिशा में अग्रसर है। इसका सीधा मतलब यह है कि चीन ने दुनिया भर के देशों से जितना माल खरीदा है, उससे कहीं अधिक मूल्य का सामान वैश्विक बाजारों में बेचा है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि बीजिंग अपनी अर्थव्यवस्था के लिए केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर नहीं है। इस मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि के साथ शी जिनपिंग वाशिंगटन में अपनी तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को साधने का प्रयास करेंगे। पहली और सबसे संवेदनशील प्राथमिकता ताइवान का मुद्दा है। मई में शी जिनपिंग ने ट्रंप को दो टूक लहजे में समझा दिया था कि ताइवान दोनों देशों के रिश्तों का सबसे केंद्रीय और नाजुक पहलू है, जिसे ठीक से न संभाले जाने पर सीधा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत ताइवान को अपने मुख्य भूभाग का अभिन्न हिस्सा मानती है, जबकि ताइवान खुद को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में देखता है। अमेरिका के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह लगातार ताइपे को आधुनिक हथियार बेचता रहा है। मई में शी से मुलाकात से पहले ट्रंप ने ताइवान के साथ 14 अरब डॉलर के रक्षा सौदे को टाल दिया था। अब शी जिनपिंग चाहते हैं कि ट्रंप सार्वजनिक रूप से यह बयान दें कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करता है। चीन की फुडान यूनिवर्सिटी के अमेरिकी मामलों के निदेशक वू शिनबो का मानना है कि यदि अमेरिका ताइवान पर चीनी चिंताओं का सम्मान करता है, तो चीन भी अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद और कानून प्रवर्तन जैसे मामलों पर अमेरिकी हितों का ध्यान रखेगा।

चीन का दूसरा प्रमुख लक्ष्य दुर्लभ खनिजों के अपने दबदबे को सौदेबाजी के एक मजबूत हथियार के रूप में इस्तेमाल करना है। चीन दुनिया भर में इन खनिजों के 70 प्रतिशत खनन और 85 प्रतिशत रिफाइनिंग पर नियंत्रण रखता है, जो कंप्यूटर चिप्स, सेमीकंडक्टर्स और आधुनिक वाहनों के निर्माण की रीढ़ हैं। बीजिंग अमेरिकी कंपनियों को इन खनिजों तक खुली पहुंच देने के बजाय इसे नियंत्रित रखेगा, ताकि बदले में वह उन्नत सेमीकंडक्टर तक पहुंच हासिल कर सके, रूस से अपने तेल आयात पर अमेरिकी आंख मूंदने की गारंटी ले सके और अपने कई अन्य उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ रियायतें हासिल कर सके। तीसरा लक्ष्य शी जिनपिंग का घरेलू राजनीतिक कद है। दिलचस्प बात यह है कि जब शी वाशिंगटन में होंगे, उसी समय अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक आम सभा की बैठक भी चल रही होगी। संयुक्त राष्ट्र के बहुपक्षीय मंच पर जाने के बजाय शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ विशेष द्विपक्षीय शिखर वार्ता को चुना है। अगले साल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पांच-वार्षिक महत्वपूर्ण बैठक होनी है, जिसमें शी जिनपिंग के रिकॉर्ड चौथे कार्यकाल के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तोपों की सलामी और व्यक्तिगत अगवानी जैसा ऐतिहासिक स्वागत मिलना शी जिनपिंग की घरेलू छवि को एक अपराजेय वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।

भारत की विनिर्माण संभावनाओं और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर

वाशिंगटन में होने वाली इस शीर्ष मुलाकात की गूंज पूरी दुनिया और खासतौर पर भारत में सुनाई देने वाली है। एशियाई और यूरोपीय देशों के बीच यह गहरा संशय बना हुआ है कि यदि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां आपस में समझौता कर लेती हैं, तो वे वैश्विक व्यवस्था और नियमों को अपनी शर्तों के अनुसार तय करने लगेंगी। चूंकि अमेरिका और चीन दोनों ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए इस शिखर वार्ता के बाद पूरी दुनिया में एआई तकनीक को विनियमित करने का एक नया वैश्विक ढांचा तैयार हो सकता है। इसके अलावा, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। यदि चीनी मध्यस्थता के जरिए अमेरिका ईरान के साथ जारी युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश लेता है और होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण पर कोई व्यावहारिक सहमति बन जाती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तेल की आपूर्ति दोबारा पटरी पर लौट सकती है।

दूसरी तरफ, भारत के लिए यह घटनाक्रम दोधारी तलवार जैसा साबित हो सकता है। अमेरिका और चीन के बीच छिड़े टैरिफ युद्ध के कारण कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन के बाहर नए विनिर्माण ठिकाने तलाश रही थीं, जिससे भारत एक बड़े वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा था। यदि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच स्थायी व्यापारिक सुलह हो जाती है, तो भारत को मिलने वाला यह निवेश अवसर धीमा पड़ सकता है। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अनिल रमन के अनुसार, अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन को संतुलित करने के लिए भारत के साथ मजबूत और करीबी रिश्ते बनाए रखे थे। यदि अमेरिका और चीन अब अपने आपसी मतभेदों को खुद ही सीधे तौर पर सुलझाने लगते हैं, तो रणनीतिक रूप से अमेरिका को भारत की उतनी अधिक आवश्यकता नहीं रह जाएगी। हालांकि, यदि यह शिखर वार्ता बेनतीजा रहती है और दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता है, तो वाशिंगटन की भारत पर रणनीतिक निर्भरता में और अधिक इजाफा होगा। एक अन्य बड़ा पहलू ऊर्जा प्रतिबंधों से जुड़ा है। अमेरिका ने उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने का कानून पारित किया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। यदि दुर्लभ खनिजों के बदले में अमेरिका चीन को रूसी तेल खरीदने की विशेष छूट दे देता है, तो भारत के लिए भी वाशिंगटन पर समान रियायत देने का दबाव बनाने का एक मजबूत कूटनीतिक आधार तैयार हो जाएगा।

सवाल-जवाब

शी जिनपिंग कितने समय बाद अमेरिका का दौरा कर रहे हैं?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल के लंबे अंतराल के बाद अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप हवाईअड्डे जाकर शी जिनपिंग का स्वागत क्यों कर रहे हैं?
दशकों पुरानी परंपरा तोड़कर हवाईअड्डे जाना दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति बनाए रखने और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चीन को कूटनीतिक रूप से अहमियत देने का संकेत है।
व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के स्वागत के लिए क्या विशेष इंतजाम किए गए हैं?
उन्हें 21 तोपों की सलामी, 479 सैनिकों का प्रेसिडेंशियल सैल्यूट, चार एफ-22 और एक बी-2 बॉम्बर जेट का फ्लाईओवर तथा एक भव्य राजकीय रात्रिभोज दिया जाएगा।
अमेरिका के लिए दुर्लभ खनिज इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
अमेरिका अपने आयात का 70 प्रतिशत दुर्लभ खनिज चीन से लेता है, जो गाड़ियों, आधुनिक हथियारों, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए अनिवार्य हैं।
ताइवान को लेकर चीन की क्या मुख्य मांग है?
शी जिनपिंग चाहते हैं कि अमेरिका ताइवान को हथियारों की आपूर्ति सीमित करे और सार्वजनिक रूप से यह कहे कि वह ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करता है।
व्हाइट हाउस के रात्रिभोज में कौन से बड़े तकनीकी दिग्गज शामिल होंगे?
इस डिनर में एलन मस्क, जेफ बेजोस, सुंदर पिचाई, टिम कुक और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज उद्योगपति शामिल होंगे।
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित एआई हॉटलाइन क्या है?
यह एक आपातकालीन व्यवस्था है, जिसके जरिए एआई के विकास या परीक्षण के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई खतरा आने पर दोनों देश तुरंत एक-दूसरे को सतर्क करेंगे।
इस मुलाकात का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
अमेरिका-चीन व्यापार सुलह से विदेशी कंपनियों के भारत आने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, लेकिन रूसी तेल पर चीन को छूट मिलने पर भारत को भी रियायत का मौका मिलेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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