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चील के पंजों से लेकर सोने-चांदी तक: धनतेरस पर समझें गहनों का हजारों साल पुराना इतिहासपड़ताल
6 नव॰ 2026, 11:53 am (1 मिनट पहले)· 0

चील के पंजों से लेकर सोने-चांदी तक: धनतेरस पर समझें गहनों का हजारों साल पुराना इतिहास

धनतेरस पर सोने के बढ़ते दामों के बीच, आभूषणों का इतिहास पशुओं के पंजों से लेकर मुगलकालीन मीनाकारी कला और आज के आधुनिक रुझानों तक की दिलचस्प कहानी बयान करता है।

धनतेरस के त्यौहारी अवसर पर कीमती धातुओं की दरें खास चर्चा में हैं, जहां 24 कैरट सोना ₹14,602 प्रति ग्राम और 22 कैरट सोना ₹13,385 प्रति ग्राम पर दर्ज किया गया है। यद्यपि ये कीमतें सामान्य साल-दर-साल दरों की तुलना में अधिक हैं, लेकिन ये चालू वर्ष के दौरान दर्ज किए गए उच्चतम स्तर से थोड़ी कम हैं। ऊंची कीमतों के कारण कुछ लोग जहां आसानी से सोना खरीद पाते हैं, वहीं अन्य लोगों के लिए इसे खरीदना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

कीमती धातुओं से पहले आभूषणों की प्राचीन शुरुआत

सोने और हीरे के धन तथा प्रतिष्ठा का प्रतीक बनने से काफी पहले, प्राचीन मानव समाजों में शारीरिक सजावट के लिए प्राकृतिक चीजों का उपयोग किया जाता था। हजारों साल पहले लोग सोने की चेन के बजाय चील के पंजों को गले में आभूषण के रूप में पहनते थे। विभिन्न युगों के दौरान, गहनों का उपयोग केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि शक्ति, प्रेम, धार्मिक विश्वास और सामाजिक स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता था।

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भारत की समृद्ध आभूषण परंपरा और आधुनिक बदलाव

भारत में आभूषणों का इतिहास कलात्मक तकनीकों और सांस्कृतिक परंपराओं से समृद्ध रहा है। इनमें रंगीन मीनाकारी का काम और मुगल सम्राटों द्वारा पहने जाने वाले बहुमूल्य रत्न शामिल हैं। इसके अलावा, भारत में पुरुषों द्वारा विस्तृत गहने पहनने की एक ऐतिहासिक परंपरा रही है। हालांकि, आधुनिक समय में लोगों की पसंद धीरे-धीरे न्यूनतम आभूषणों यानी मिनिमल ज्वेलरी की ओर स्थानांतरित हो गई है, जो बदलते जीवन स्तर और आर्थिक परिस्थितियों को दर्शाती है।

सवाल-जवाब

धनतेरस पर सोने के क्या भाव दर्ज किए गए हैं?
धनतेरस पर 24 कैरट सोना ₹14,602 प्रति ग्राम और 22 कैरट सोना ₹13,385 प्रति ग्राम दर्ज किया गया है।
सोने के लोकप्रिय होने से पहले गहने किस चीज से बनाए जाते थे?
हजारों साल पहले कीमती धातुओं का उपयोग शुरू होने से पहले मानव चील के पंजों और प्राकृतिक वस्तुओं को गले के आभूषण के रूप में पहनते थे।
भारत के आभूषण इतिहास में किन प्रमुख शैलियों का उल्लेख है?
इसमें पारंपरिक मीनाकारी काम और मुगल सम्राटों तथा पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले बहुमूल्य रत्नों वाले आभूषणों का उल्लेख है।
आधुनिक भारतीय ग्राहक मिनिमल यानी हल्के गहनों को क्यों पसंद कर रहे हैं?
सोने की बढ़ती दरों और बदलती जीवनशैली के कारण लोग भारी पारंपरिक आभूषणों के स्थान पर हल्के और व्यावहारिक डिजाइनों को अपना रहे हैं।
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