जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जारी सत्र के दौरान मंगलवार को सत्ताधारी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक अहम राजनीतिक मांग सदन के पटल पर रखी। पार्टी विधायकों ने मांग की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती के अवसर पर मिलने वाले सार्वजनिक अवकाश को सरकारी स्तर पर पुनः बहाल किया जाए। सदन में चर्चा के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि शेख अब्दुल्ला ने क्षेत्र के विकास और आधुनिक ढांचे के निर्माण के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं, लिहाजा उनके इस योगदान को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शेख अब्दुल्ला के योगदान को श्रद्धांजलि देने की वकालत
सदन की कार्यवाही के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल ने इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 दिसंबर को शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी बहाल करना उनके ऐतिहासिक योगदान के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधियों का कहना था कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर की नींव रखने में उनका योगदान असाधारण रहा है, इसलिए आधिकारिक कैलेंडर में इस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में बनाए रखा जाना बेहद जरूरी है।
सरकारी कैलेंडर से दो प्रमुख छुट्टियों को हटाने का मामला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने सदन को याद दिलाया कि पहले आधिकारिक कैलेंडर में दो खास छुट्टियां शामिल थीं, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। इनमें पहली छुट्टी 13 जुलाई को मनाया जाने वाला शहीद दिवस और दूसरी 5 दिसंबर को शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती थी। विधायकों ने आपत्ति दर्ज कराई कि इन दोनों ऐतिहासिक दिनों को सरकारी अवकाश सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे लोगों की सामूहिक भावनाएं आहत हुई हैं।
इतिहास और सामूहिक यादों के सम्मान की दलील
विधानसभा चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुबारक गुल ने कहा कि "हम दशकों तक सत्ता में रहे, लेकिन हमने कभी कोई छुट्टी नहीं हटाई।" उन्होंने सदन में तर्क दिया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कई सालों तक शासन किया, लेकिन कभी किसी छुट्टी या किसी जरूरी दिन में फेरबदल नहीं किया। गुल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के नेता से जुड़ी कोई छुट्टी होती, तो भी उसे कभी नहीं हटाया जाता क्योंकि ऐसी छुट्टियां लोगों की सामूहिक यादों का प्रतिनिधित्व करती हैं। पार्टी ने इन ऐतिहासिक दिवसों के सम्मान की रक्षा के लिए दोनों अवकाशों को फिर से शुरू करने पर बल दिया।
























